thinQ360
thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 🌺 ज़िंदगानी 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 💡 मनचाही ▶️ YouTube
ज़िंदगानी

ऑक्सीजन खत्म होने से नवजात की मौत, पिता शव संग भटकता रहा, पुलिस ने बस में बैठाया

प्रदीप बीदावत प्रदीप बीदावत 28

भरतपुर (Bharatpur) से जयपुर (Jaipur) जा रहे एक नवजात की एम्बुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने से मौत हो गई। पिता मुकेश (Mukesh) बच्चे के शव को सीने से लगाए भटकता रहा, लेकिन बस्सी (Bassi) पुलिस ने मदद नहीं की और उसे बस में बैठाकर वापस भरतपुर भेज दिया।

HIGHLIGHTS

  1. 1 एम्बुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने से नवजात की मौत। पिता बच्चे के शव को सीने से लगाए मदद के लिए भटकता रहा। बस्सी पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की और पिता को शव संग बस में लौटाया। अस्पतालों और पुलिस से मदद न मिलने पर पिता ने रात में ही बच्चे का अंतिम संस्कार किया।
newborn death oxygen ambulance father police apathy
ऑक्सीजन खत्म, बेटे की मौत: पिता भटकता रहा

जयपुर: भरतपुर (Bharatpur) से जयपुर (Jaipur) जा रहे एक नवजात की एम्बुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने से मौत हो गई। पिता मुकेश (Mukesh) बच्चे के शव को सीने से लगाए भटकता रहा, लेकिन बस्सी (Bassi) पुलिस ने मदद नहीं की और उसे बस में बैठाकर वापस भरतपुर भेज दिया।

यह हृदय विदारक घटना शुक्रवार शाम की है, जिसने प्रशासनिक संवेदनहीनता और स्वास्थ्य सेवाओं की खामियों को उजागर किया है।

नवजात को सांस लेने में थी परेशानी

जिले के सिकंदरा थाना क्षेत्र निवासी मुकेश ने बताया कि उसके बेटे का जन्म गुरुवार, 11 दिसंबर को बयाना (भरतपुर) के सरकारी अस्पताल में हुआ था। जन्म के बाद से ही बच्चे को सांस लेने में तकलीफ थी।

उसी दिन उसे भरतपुर के जनाना अस्पताल में रेफर किया गया, जहां से 12 दिसंबर को सुबह 10:30 बजे उसे जयपुर के अस्पताल के लिए रेफर किया गया था।

एम्बुलेंस में खत्म हुई ऑक्सीजन, बच्चे ने तोड़ा दम

मुकेश अपने बेटे को लेकर एम्बुलेंस से जयपुर के अस्पताल जा रहे थे। बच्चे को ऑक्सीजन सिलेंडर से जुड़ी नली के माध्यम से लगातार ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही थी।

रास्ते में करीब 12:30 बजे बस्सी (जयपुर) के पास पहुंचते ही ऑक्सीजन सिलेंडर पूरी तरह से खाली हो गया। ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद होते ही बच्चा तड़पने लगा और कुछ ही पलों में उसने पिता की गोद में ही दम तोड़ दिया।

मुकेश के लिए यह क्षण किसी वज्रपात से कम नहीं था, जब एक दिन के मासूम ने उसकी आंखों के सामने अंतिम सांस ली।

ड्राइवर अस्पताल में छोड़कर हुआ फरार

नवजात के पिता ने बताया कि एम्बुलेंस ड्राइवर ने बच्चे की बिगड़ती हालत और फिर उसकी मौत देखी। इसके बाद वह उन्हें बस्सी के सरकारी अस्पताल ले गया।

अस्पताल पहुंचते ही ड्राइवर ने मुकेश और मृत बच्चे को वहीं छोड़कर तुरंत फरार हो गया। मुकेश अपने नवजात के शव को लेकर अस्पताल परिसर में ही असहाय बैठा रहा, मदद की उम्मीद में।

बस्सी पुलिस की संवेदनहीनता

मुकेश ने तुरंत बस्सी पुलिस को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी और सहायता मांगी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और एम्बुलेंस को जब्त कर लिया, लेकिन पिता की शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

मुकेश का आरोप है कि बस्सी पुलिस ने उससे कहा कि इस मामले में यहां एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती। उन्होंने उसे एफआईआर दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया।

पुलिसवालों ने तो हद ही कर दी, उन्होंने पिता को अपने मृत बेटे की लाश के साथ एक बस में बैठाकर वापस भरतपुर भेज दिया। यह घटना पुलिस प्रशासन की घोर संवेदनहीनता को दर्शाती है।

भरतपुर में भी नहीं मिली मदद

बस से वह रात करीब 9 बजे भरतपुर के जनाना अस्पताल पहुंचा। मुकेश वहां अस्पताल प्रशासन को पूरे घटनाक्रम की जानकारी देना चाहते थे, लेकिन उन्हें वहां से भी कोई संतोषजनक जवाब या मदद नहीं मिली।

इसके बाद वह मथुरा गेट थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने उसे फिर से बताया कि एफआईआर बस्सी थाने में ही दर्ज होगी। पूरी रात वह अपने मृत बेटे के शव को लेकर भरतपुर के अस्पतालों और थानों के चक्कर काटता रहा, लेकिन उसे कहीं से कोई सहायता नहीं मिली।

गांव में हुआ नवजात का अंतिम संस्कार

जब हॉस्पिटल और पुलिस से हर जगह निराशा ही हाथ लगी, तो असहाय पिता मुकेश बच्चे के शव को लेकर शुक्रवार रात को अपने गांव चले गए। उनके पास कोई और विकल्प नहीं बचा था।

गांव पहुंचकर उन्होंने रात में ही अपने नवजात बेटे का अंतिम संस्कार कर दिया। यह एक पिता की मजबूरी और व्यवस्था की विफलता का दर्दनाक अंत था।

मुकेश कुमार ने बताया कि बच्चे की खाने की नली और सांस नली में परेशानी थी, इसलिए उसे जयपुर रेफर किया गया था।

प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल

इस पूरी घटना ने देश की स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। एक नवजात की असामयिक मौत और उसके बाद एक शोक संतप्त पिता के साथ हुए अमानवीय व्यवहार ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है।

यह मामला स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि आपातकालीन स्थितियों में भी आम आदमी को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। संबंधित अधिकारियों को इस पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

शेयर करें: