उसकी पुत्री और आरोपी को आमने-सामने बैठ कर पूछताछ की तब उसकी बेटी ने सारी घटना आरोपी के सामने CI को बताई, आरोपी ने घटना करना स्वीकार किया, इस पर CI ने आरोपी को तीन-चार थप्पड़ मारे और आरोपी को तथा परिवादी को वहां से भेज दिया, दूसरे दिन परिवादी को थाने बुलाया
इसके बाद वह उसकी बेटी को लेकर 6-7 दिन तक थाना गया लेकिन CI नहीं मिले, इसके बाद पिंडवाड़ा थाने पर कार्यरत हेड कांस्टेबल सुमन ने परिवादी पर दबाव बनाया कि इस प्रकरण को लंबा खींचने की बजाय राजीनामा कर ले, लेकिन राजीनामा नहीं हुआ यह बात उसने हेड कांस्टेबल सुमन को बता दी थी,
इसके बाद भी पुलिस थाना पिंडवाड़ा में कोई कार्रवाई नहीं की, तब उसने एसपी सिरोही के समक्ष रिपोर्ट पेश की, इस पर प्रकरण में करवाई हुई,
थानाधिकारी ने जानबूझकर अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए 25 जनवरी को परिवादी द्वारा रिपोर्ट देने के बावजूद उसे दर्ज नहीं किया तथा परिवाधिक के अनुसार पुलिस अधीक्षक के आदेश पर 9 फरवरी को प्रकरण पंजीबद्ध हुआ हैं, इस प्रकार थाना अधिकारी पुलिस थाना पिंडवाड़ा का उक्त कृत्य धारा 19(2) पोक्सो अधिनियम के अपराध की श्रेणी में आता है
उक्त प्रकरण में परिवादी द्वारा 25 जनवरी को पुलिस थाना पिंडवाड़ा में रिपोर्ट देने के पश्चात फिर 9 फरवरी 15 दिवस पश्चात दर्ज की गई, जोकि सर्वोच्च न्यायालय एवं राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्णय की स्पष्ट तौर पर आवेला की श्रेणी में आता है,
पुलिस थाना पिंडवाड़ा द्वारा उक्त घृणित अपराध की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं करना धारा 166A भादस तथा धारा 19(2) पोक्सो अधिनियम के अधीन दंडनीय अपराध है तथा उक़्त धारा में पुलिस थाना अधिकारी पिंडवाड़ा के विरुद्ध प्रसंग ज्ञान लिया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है
प्रथम सूचना रिपोर्ट में थाना अधिकारी पुलिस थाना पिंडवाड़ा के पद पर सीताराम पवार पदस्थापित होना प्रकट हुआ है, सीताराम पवार थाना अधिकारी पुलिस थाना पिंडवाड़ा के खिलाफ धारा 166A भादस तथा धारा 19(2) पोक्सो अधिनियम में प्रसंज्ञान लिए जाने के आदेश दिए जाते हैं,