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ज़िंदगानी

एक वर, 450 वधुएं और 15 हजार घराती-बाराती

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शुक्रवार का दिन एक ऐसे विवाह का साक्ष्यी बनने जा रहा है, जिसमें वर तो एक है, पर उसका विवाह एक, दो या तीन से नहीं बल्कि 450 वधुओं से एक साथ और एक ही मंडप में हो रहा। इस अनोखे विवाह में 15 हजार घराती और बाराती शामिल हो रहे हैं।

HIGHLIGHTS

  1. 1 शुक्रवार का दिन एक ऐसे विवाह का साक्ष्यी बनने जा रहा है, जिसमें वर तो एक है, पर उसका विवाह एक, दो या तीन से नहीं बल्कि 450 वधुओं से एक साथ और एक ही मंडप में हो रहा। इस अनोखे विवाह में 15 हजार घराती और बाराती शामिल हो रहे हैं।
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Brahma Kumaris

आबू | Brahma Kumaris: शुक्रवार का दिन एक ऐसे विवाह का साक्ष्यी बनने जा रहा है, जिसमें वर तो एक है, पर उसका विवाह एक, दो या तीन से नहीं बल्कि 450 वधुओं से एक साथ और एक ही मंडप में हो रहा। 

इस अनोखे विवाह में 15 हजार घराती और बाराती शामिल हो रहे हैं।

चौंकिए मत, ये सच में हो रहा है। आज 450 युवतियां अपने शिव साजन से ब्याह रचाएंगी। 28 जून को सगाई हुई थी, आज विवाह का उत्सव हो रहा है।
इस अनोखे विवाह का स्थान होगा आबू रोड़ स्थित ब्रह्माकुमारीज का मुख्यालय शांतिवन।

शांतिवन सहित पूरे विश्व में ब्रह्माकुमारीज संस्थान (Brahma Kumaris Institute) का यह अब तक का सबसे बड़ा अलौकिक समर्पण समारोह का आयोजन है।

इसके पूर्व वर्ष 2013 में एक साथ 400 बेटियों ने संयम के पथ पर चलने का संकल्प कर समर्पण किया था। 

अब वर तो आप जान ही चुके हैं और कन्याएं देश के अलग-अलग भागों से यहां पहुंची हैं। 

कोई डॉक्टर है तो कोई इंजीनियर

ये कन्याएं भी एक से बढ़कर एक हैं। इनमें कोई डॉक्टर है, तो कोई इंजीनियर, किसी ने नर्सिंग की डिग्री ली है तो कोई टीचर है। 

इसके अलावा कोई आर्किटेक्ट है तो कोई पत्रकार और सीए हैं। अब ये संयम के पथ पर चलकर विश्व कल्याणार्थ कार्य करेंगी।

ये 450 युवतियां आज से ब्रह्माकुमारी के रूप में समर्पित हो जाएंगी, यानि शिव साजन से ब्याह रचाएंगी। आज इनका भव्य समर्पण समारोह है। शिव की इस बारात में शामिल होंगे 15 हजार घराती और बाराती। 

5 वर्ष तक ब्रह्माकुमारी आश्रम में गुजारा जीवन

समर्पित होने के पहले से ही ये कन्याएं कम से कम 5 वर्ष तक ब्रह्माकुमारी आश्रम में समर्पित जीवन गुजार चुकीं हैं। 

एकदम से कोई ब्रह्माकुमारी नहीं कहलाने लगता है। इसकी पूरी प्रक्रिया है। 

पहले पांच वर्ष में आप चाहे तो पुनः पुराने जीवन में लौट सकते हैं। 

लौटना चाहें तो कभी भी लौट सकते हैं, कोई बंधन नहीं है।

लेकिन वही बहनें समर्पित होतीं हैं, जिन्होंने ईश्वरीय सेवा का दृढ़ निश्चय किया हो। जिन्होंने पांच वर्षों तक ब्रह्माकुमारीज का जीवन निकट से देखा हो, अनुभव किया हो, खुद वैसे ही गुजारा हो।

विश्व की सबसे बड़ी आध्यात्मिक संस्था ब्रह्माकुमारीज का प्रबंधन हमेशा स्त्री प्रधान रहा है। 

यहां की बागडोर क्रमशः दादी प्रकाशमणि जी, दादी जानकी जी, दादी ह्दयमोहिनी जी और दादी रतनमोहिनी जी ने सम्भाली है। सेंटर्स पर भी दीदीयां ही ज्ञान योग की शिक्षा देती हैं।

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