पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund - IMF) से 7 अरब डॉलर का कर्ज चाहिए।
IMF की शर्त है कि घाटे में चल रही 24 सरकारी कंपनियों का निजीकरण किया जाए।
PIA वर्तमान में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये के भारी कर्ज में डूबी हुई है।
खराब मैनेजमेंट और 2020 के विमान हादसे के बाद एयरलाइन की छवि काफी खराब हुई है।
नीलामी की प्रक्रिया और नियम
प्राइवेटाइजेशन कमीशन (Privatization Commission) के अनुसार, यह नीलामी 'क्लोज्ड बिडिंग' प्रक्रिया के जरिए होगी।
दावेदार अपनी बोली सीलबंद लिफाफे में देंगे और सरकार एक रेफरेंस प्राइस तय करेगी।
बोली की कुल राशि का 92.5% हिस्सा सीधे PIA के खाते में जाएगा।
बाकी बचा 7.5% हिस्सा पाकिस्तान के राष्ट्रीय खजाने में जमा किया जाएगा।
मैदान में बचे तीन दावेदार
लकी सीमेंट एंड कंपनीज (Lucky Cement and Companies) इस दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रही है।
आरिफ हबीब एंड कंपनीज (Arif Habib and Companies) भी चार कंपनियों के साथ मिलकर बोली लगा रही है।
तीसरी कंपनी एयरब्लू प्राइवेट लिमिटेड (Airblue Private Limited) है, जो अकेले ही इस प्रक्रिया में शामिल है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लकी सीमेंट और आरिफ हबीब के जीतने की संभावनाएं सबसे अधिक हैं।
सेना की कंपनी ने क्यों छोड़ा साथ?
फौजी फर्टिलाइजर (Fauji Fertilizer) ने डील में लचीलापन बनाए रखने के लिए नाम वापस लिया है।
माना जा रहा है कि सेना की सीधी भागीदारी से IMF को गलत संदेश जा सकता था।
इसके अलावा, क्लोज्ड बिडिंग में हारने के डर से भी कंपनी ने पीछे हटना बेहतर समझा।
अब यह कंपनी भविष्य में जीतने वाले ग्रुप के साथ गठबंधन करने का विकल्प खुला रखेगी।