सत्र की शुरुआत प्रजना फ़ाउंडेशन की संस्थापक एवं चेयरपर्सन प्रीति शर्मा ने की। उन्होंने छात्राओं को मासिक धर्म की जैविक प्रक्रिया, सामान्य लक्षणों और पीरियड के दौरान स्वास्थ्य प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया। प्रीति शर्मा ने किशोरियों को इस विषय पर खुलकर बात करने और शर्म-झिझक को दूर करने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि वे अपने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को साझा कर सकें।
उन्होंने मासिक धर्म के दौरान होने वाले मानसिक और शारीरिक बदलावों पर भी प्रकाश डाला, जिससे छात्राओं को अपने शरीर को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली। यह जानकारी उन्हें इस अवधि को अधिक आत्मविश्वास और सहजता के साथ जीने में सहायक होगी।
स्वच्छता और संक्रमण से बचाव
इसके बाद, स्नेह फ़ाउंडेशन की चेयरपर्सन निशा कर्णावत ने स्वच्छता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने पीरियड के दिनों में स्वच्छता बनाए रखने, संक्रमण से बचने के तरीकों, सैनिटरी उत्पादों के सही उपयोग और उनके सुरक्षित निपटान पर विस्तृत चर्चा की। निशा कर्णावत ने बताया कि स्वच्छता की कमी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है, इसलिए सही जागरूकता और अभ्यास अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने छात्राओं को विभिन्न प्रकार के सैनिटरी उत्पादों की जानकारी दी और उन्हें अपनी आवश्यकताओं के अनुसार सही उत्पाद चुनने की सलाह दी। इस दौरान, स्नेह फ़ाउंडेशन द्वारा सैनिटरी नैपकिन्स भी उपलब्ध करवाए गए, जिससे छात्राओं को तत्काल सहायता मिल सकी।

छात्राओं के प्रश्न और समाधान
कार्यक्रम का सबसे प्रभावी हिस्सा इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र रहा। इसमें लगभग 250 से अधिक छात्राओं ने मासिक धर्म से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने इन सभी प्रश्नों का सरल, वैज्ञानिक और संतोषजनक ढंग से समाधान किया, जिससे छात्राओं की जिज्ञासा शांत हुई और उन्हें सही जानकारी मिली।
KVGIT के किशोरी क्लब सदस्यों ने भी पूरे कार्यक्रम में सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने सत्र के समन्वय और आवश्यक सामग्री के वितरण प्रक्रिया को सुचारु रूप से निभाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे कार्यक्रम का सफल संचालन सुनिश्चित हो सका।
जागरूकता का व्यापक प्रभाव
प्रजना फ़ाउंडेशन और स्नेह फ़ाउंडेशन का यह संयुक्त प्रयास मासिक धर्म से जुड़े सामाजिक मिथकों और भ्रांतियों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह किशोरियों में जागरूकता बढ़ाने और उन्हें सही जानकारी के साथ सशक्त बनाने में सहायक सिद्ध हो रहा है, जिससे वे एक स्वस्थ और आत्मविश्वासी जीवन जी सकें। ऐसे सत्र समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और महिला स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने में सहायक होते हैं।
