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राजस्थान में सर्वाइकल कैंसर से 15,744 मौतें, 695 करोड़ बजट का 31% खर्च

ललित पथमेड़ा ललित पथमेड़ा 37

नेशनल हेल्थ मिशन (National Health Mission) की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान (Rajasthan) में सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) से 2014 से 2023 के बीच 15,744 मौतें दर्ज हुईं। राज्य को 695 करोड़ रुपये का बजट मिला, लेकिन केवल 218 करोड़ (31%) ही खर्च हो पाए।

HIGHLIGHTS

  1. 1 राजस्थान में सर्वाइकल कैंसर से 10 साल में 15,744 मौतें। 695 करोड़ के बजट में से केवल 218 करोड़ रुपये ही खर्च हुए। राज्य में स्क्रीनिंग दर राष्ट्रीय औसत से भी कम, मात्र 0.4%। राजस्थान सर्वाइकल कैंसर मृत्यु-बोझ वाले राज्यों में सातवें स्थान पर।
rajasthan cervical cancer deaths 15744 695 crore budget 31 percent spent
सर्वाइकल कैंसर: मौतें बढ़ीं, बजट खर्च नहीं

जयपुर: नेशनल हेल्थ मिशन (National Health Mission) की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान (Rajasthan) में सर्वाइकल कैंसर (Cervical Cancer) से 2014 से 2023 के बीच 15,744 मौतें दर्ज हुईं। राज्य को 695 करोड़ रुपये का बजट मिला, लेकिन केवल 218 करोड़ (31%) ही खर्च हो पाए।

देशभर में सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतें लगातार बढ़ रही हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती है। लोकसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में सर्वाइकल कैंसर मृत्यु 2014 में 1,384 थी, जो 2023 तक बढ़कर 1,775 हो गई।

राजस्थान में बढ़ती मौतें और फंड की अनदेखी

दस वर्षों में राजस्थान में मृत्यु संख्या लगातार बढ़ती रही। इसी अवधि में राज्य में कुल 15,744 मौतें दर्ज हुईं, जिससे राजस्थान सर्वाइकल कैंसर मृत्यु-बोझ वाले राज्यों की सूची में सातवें स्थान पर आता है।

उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक की स्थिति राजस्थान से भी अधिक खराब है।

बजट का बड़ा हिस्सा अप्रयुक्त

नेशनल हेल्थ मिशन के तहत राजस्थान को 2019-20 से 2024-25 के बीच NP-NCD कार्यक्रम के लिए लगभग 695 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसमें 2022-23 और 2023-24 में 235 करोड़ रुपये की भारी राशि स्वीकृत की गई, जो देश में सर्वाधिक थी।

हालांकि, राज्य इन छह वर्षों में केवल 218 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाया, जो कुल स्वीकृत राशि का महज 31% है। यह अंतर दर्शाता है कि स्वीकृत बजट राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में पूरी तरह उतर नहीं पा रहा है।

कम स्क्रीनिंग दर और देर से पहचान

राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, राजस्थान में 30-49 वर्ष की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग दर बहुत कम है, मात्र 0.4%। यह राष्ट्रीय औसत से भी काफी कम है।

इस कम स्क्रीनिंग दर के कारण सर्वाइकल कैंसर के मामले अक्सर देर से पकड़ में आते हैं, जिससे इलाज अधिक जटिल और महंगा हो जाता है।

अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान सहित उत्तर भारत में लगभग 17,000 सर्वाइकल कैंसर के मामले होने की संभावना है।

राष्ट्रीय स्क्रीनिंग प्रयास और इलाज का खर्च

रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल हेल्थ मिशन के तहत सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग में तेजी से वृद्धि हुई है। 2020-21 में 21 लाख महिलाओं की स्क्रीनिंग हुई, जो 2022-23 में बढ़कर 1.86 करोड़ तक पहुंची।

निजी अस्पतालों में सर्वाइकल कैंसर के इलाज का खर्च (ऑपरेशन, कीमोथेरेपी और रेडिएशन) लगभग 7 लाख से 8 लाख रुपये तक आता है। सरकारी अस्पतालों में इलाज का खर्च अपेक्षाकृत कम होता है।

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