शव को सड़क या किसी अन्य स्थान पर रखकर प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ 6 माह से लेकर 5 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। यह कानून राज्य में आए दिन शव रखकर अपनी मांगों को पूरा कराने की घटनाओं पर लगाम लगाने के उद्देश्य से दो साल पहले बनाया गया था।
नियमों का महत्व और प्रक्रिया
पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने 20 जुलाई 2023 को विधानसभा में यह अधिनियम पारित किया था। राज्यपाल ने 17 अगस्त को इसे मंजूरी दी और सरकार ने 18 अगस्त को इसकी अधिसूचना जारी कर दी, जिससे कानून प्रभावी हो गया था। हालांकि, तब तक इसके नियम नहीं बने थे, जिससे शवों के अंतिम संस्कार, अनुसंधान और प्रकरण में चालान पेश करने की प्रक्रिया में दिक्कतें आ रही थीं।
अब नियमों के लागू होने से यह प्रक्रिया सुगम हो जाएगी। परिजनों को नोटिस कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा तामील करवाए जाएंगे, जिसे डाक, ई-मेल या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी भेजा जा सकेगा।
अस्पताल नहीं रोक सकेंगे शव
इस अधिनियम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अस्पताल प्रशासन बकाया बिलों का भुगतान न करने के आधार पर शव को नहीं रोक सकेगा। अस्पतालों को शव को परिवार या सार्वजनिक प्राधिकरण को सम्मानजनक तरीके से सौंपना अनिवार्य होगा, जिससे मानवीय गरिमा बनी रहे।
राजस्थान बना देश का पहला राज्य
ऐसा कानून बनाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है। यह कदम शवों की गरिमा बनाए रखने और सार्वजनिक व्यवस्था को भंग होने से रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
सजा के प्रमुख प्रावधान
अधिनियम में सजा के चार बड़े प्रावधान किए गए हैं, जिनका उद्देश्य कानून का उल्लंघन करने वालों को दंडित करना है:
- शव कब्जे में न लेने पर: यदि मृतक के परिजन शव को कब्जे में नहीं लेते हैं, तो उन्हें एक साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है।
- शव के साथ विरोध प्रदर्शन पर: यदि परिवार का कोई सदस्य शव का उपयोग प्रदर्शन के लिए करता है या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसा करने की अनुमति देता है, तो परिजन को 2 साल तक की जेल या जुर्माने की सजा हो सकती है।
- अन्य व्यक्ति द्वारा प्रदर्शन पर: परिवार के सदस्यों के अलावा कोई अन्य व्यक्ति शव का उपयोग विरोध प्रदर्शन के लिए करता है, तो उसे 6 माह से 5 साल तक की सजा या जुर्माना हो सकता है।
- गोपनीयता भंग करने पर: राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला में लावारिस शवों का जैनेटिक डाटा सुरक्षित रखा जाएगा। इस डाटा को लीक करने वाले दोषी कर्मचारी या अधिकारी को 3 से 10 साल तक की सजा हो सकेगी।