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सरकार ने हाईकोर्ट में कहा- एसआई भर्ती रद्द करना गलत, एकलपीठ ने नियमों को किया दरकिनार

गणपत सिंह मांडोली गणपत सिंह मांडोली 40

राजस्थान सरकार ने हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष एसआई भर्ती 2021 को रद्द करने के एकलपीठ के फैसले को चुनौती दी है और जांच एजेंसी की क्षमता पर भरोसा जताया है।

HIGHLIGHTS

  1. 1 महाधिवक्ता ने एकलपीठ के एसआई भर्ती रद्द करने के फैसले को नियमों के विरुद्ध बताया। सरकार का तर्क है कि जांच एजेंसियां धांधली करने वालों की पहचान करने में सक्षम हैं। ईडी की चार्जशीट में बाबूलाल कटारा और आरपीएससी सदस्यों की कार्यशैली पर खुलासे हुए। एसआई भर्ती 2021 के तहत कुल 859 पदों के लिए प्रक्रिया आयोजित की गई थी।
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Rajasthan Sub Inspector Exam RPSC in Court

जयपुर | राजस्थान में सब इंस्पेक्टर भर्ती 2021 को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। हाईकोर्ट की खंडपीठ में राज्य सरकार ने एकलपीठ के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने की बात कही गई थी।

महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि एकलपीठ ने इस मामले में कानूनी पहलुओं और स्थापित नियमों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मूल याचिका सुनवाई के योग्य ही नहीं थी।

सरकार की दलील है कि किसी भी भर्ती में गड़बड़ी होने पर पूरी प्रक्रिया को रद्द करना अंतिम विकल्प नहीं होना चाहिए। जांच एजेंसियां इतनी सक्षम हैं कि वे धांधली करने वाले और ईमानदार अभ्यर्थियों के बीच स्पष्ट अंतर कर सकें।

एकलपीठ के फैसले पर सरकार के सवाल

महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि एकलपीठ ने बिना किसी ठोस आधार के मेरिट पर सुनवाई की और भर्ती रद्द करने का आदेश सुना दिया। यह निर्णय उन हजारों युवाओं के सपनों पर प्रहार है जिन्होंने कड़ी मेहनत से चयन सूची में जगह बनाई है।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने प्रवर्तन निदेशालय की उस चार्जशीट का हवाला दिया जो हाल ही में दाखिल की गई है। इस चार्जशीट में राजस्थान लोक सेवा आयोग के कामकाज और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने खंडपीठ से आग्रह किया है कि ईडी की इस जांच रिपोर्ट को आधिकारिक रिकॉर्ड पर लिया जाए। उनका मानना है कि यह रिपोर्ट पेपर लीक मामले की गहराई को समझने में सहायक सिद्ध होगी।

ईडी की चार्जशीट और बाबूलाल कटारा का मामला

कोर्ट में प्रतिवादी पक्ष ने बताया कि आरपीएससी के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा ने पूछताछ में सनसनीखेज खुलासे किए हैं। कटारा ने स्वीकार किया है कि उन्होंने आयोग का सदस्य बनने के लिए करोड़ों रुपए की रिश्वत दी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बाबूलाल कटारा ने तत्कालीन कांग्रेस जिलाध्यक्ष दिनेश खोड़निया को करीब 40 लाख रुपए का भुगतान किया था। कुल डील 1.20 करोड़ रुपए में तय हुई थी जिसे किस्तों में चुकाया गया था।

ईडी की चार्जशीट में यह भी दर्ज है कि आरपीएससी सदस्य किस प्रकार से इंटरव्यू के दौरान चहेते अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाते थे। सिफारिशी उम्मीदवारों को अधिक अंक देकर उन्हें चयन प्रक्रिया में आगे बढ़ाया जाता था।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि जब चयन करने वाली संस्था के सदस्य ही भ्रष्टाचार में लिप्त हों तो पूरी प्रक्रिया की पवित्रता समाप्त हो जाती है। इसीलिए एसआई भर्ती 2021 के पेपर लीक मामले में भी इनकी भूमिका की गहन जांच जरूरी है।

भर्ती प्रक्रिया का पूरा विवरण

एसआई भर्ती 2021 की प्रक्रिया पर नजर डालें तो यह राजस्थान पुलिस में 859 रिक्त पदों को भरने के लिए शुरू की गई थी। इस महत्वाकांक्षी भर्ती के लिए प्रदेश के लगभग 7.97 लाख युवाओं ने आवेदन पत्र भरे थे।

भर्ती के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन 13 सितंबर से 15 सितंबर 2021 तक विभिन्न केंद्रों पर किया गया था। इस परीक्षा में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों की संख्या लगभग 3.80 लाख रही थी।

राजस्थान लोक सेवा आयोग ने 24 दिसंबर 2021 को लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित किया था। इसमें कुल 20 हजार 359 अभ्यर्थियों को अगले चरण यानी शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए पात्र पाया गया।

शारीरिक दक्षता परीक्षा का आयोजन 12 फरवरी से 18 फरवरी 2022 के बीच किया गया था। इस चरण का परिणाम 11 अप्रैल 2022 को जारी हुआ जिसमें 3291 अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए सफल घोषित हुए।

इंटरव्यू की प्रक्रिया काफी लंबी चली और इसे कुल नौ चरणों में विभाजित किया गया था। यह साक्षात्कार 23 जनवरी 2023 से शुरू होकर 29 मई 2023 तक अनवरत रूप से संचालित किए गए थे।

साक्षात्कार की समाप्ति के तुरंत बाद 1 जून 2023 को आयोग ने भर्ती का अंतिम परिणाम सार्वजनिक कर दिया था। इसके बाद से ही पेपर लीक के आरोपों के चलते यह भर्ती विवादों के घेरे में आ गई थी।

पदों का वर्गीकरण और विवाद

इस भर्ती के तहत उप निरीक्षक आर्म्ड पुलिस के सर्वाधिक 746 पदों पर चयन किया जाना था। इसके अलावा उप निरीक्षक आईबी के 64 पदों के लिए भी योग्य उम्मीदवारों का चयन किया गया।

प्लाटून कमांडर आरएसी के 38 पदों और उप निरीक्षक एमबीसी के 11 पदों को भी इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया गया था। अब इन सभी श्रेणियों के चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां अधर में लटकी हुई हैं।

सरकार ने खंडपीठ के समक्ष स्पष्ट किया है कि जांच एजेंसी पेपर लीक में शामिल लोगों को अलग करने में जुटी है। ऐसे में पूरी भर्ती को रद्द करना प्रशासनिक और न्यायिक दृष्टि से उचित नहीं होगा।

बुधवार को होने वाली सुनवाई में सरकार अपनी दलीलों को आगे बढ़ाएगी और अदालत से एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाने की मांग करेगी। चयनित अभ्यर्थी भी अपनी ओर से मजबूती से पक्ष रख रहे हैं।

आरपीएससी के पूर्व सदस्यों ने भी एकलपीठ द्वारा की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की अपील की है। उनका कहना है कि ये टिप्पणियां उनके करियर और सम्मान को अपूरणीय क्षति पहुंचा रही हैं।

राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता एक बड़ा मुद्दा बन चुका है और यह मामला इसका केंद्र बिंदु है। हाईकोर्ट का अंतिम निर्णय यह तय करेगा कि प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं का भविष्य किस दिशा में जाएगा।

प्रदेश के लाखों युवाओं की उम्मीदें अब न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। वे चाहते हैं कि दोषियों को सख्त सजा मिले और निष्पक्ष अभ्यर्थियों को उनके अधिकार प्राप्त हों।

कानूनी जानकारों का मानना है कि खंडपीठ इस मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद ही कोई संतुलित फैसला सुनाएगी। तब तक एसआई भर्ती 2021 के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराते रहेंगे।

राजस्थान सरकार इस मामले में पूरी संजीदगी से पैरवी कर रही है ताकि पुलिस बेड़े में रिक्त पदों को जल्द भरा जा सके। कानून और व्यवस्था को मजबूत करने के लिए इन नियुक्तियों का होना अत्यंत आवश्यक है।

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