कोर्ट ने कर्मचारी चयन बोर्ड को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 नवंबर को निर्धारित की गई है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला फरवरी 2024 में 400 से अधिक पदों के लिए आयोजित स्टेनोग्राफर-निजी सहायक ग्रेड-2 सीधी भर्ती परीक्षा से जुड़ा है।
भर्ती नियमों के अनुसार, चयन के लिए टाइपिंग परीक्षा में 20 प्रतिशत तक गलतियों की छूट का प्रावधान है।
इसके अतिरिक्त, यदि पात्र अभ्यर्थी पर्याप्त संख्या में नहीं मिलते हैं, तो पांच प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दी जा सकती है।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि पर्याप्त संख्या में अभ्यर्थी चयनित होने के बावजूद, बोर्ड उन उम्मीदवारों को नियुक्ति देने पर विचार कर रहा है, जिन्होंने टाइपिंग में 25 प्रतिशत तक गलतियां की हैं।
यह प्रावधान केवल तभी लागू होता है जब योग्य उम्मीदवारों की कमी हो, लेकिन वर्तमान स्थिति में ऐसा नहीं है।
अपात्रों को छूट देने पर आपत्ति
प्रार्थी पक्ष ने इस बात पर आपत्ति जताई कि अपात्र अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत की अतिरिक्त छूट देकर नियुक्ति देना नियमों का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इससे योग्य और मेहनती अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन होगा।
इस चुनौती के बाद, हाईकोर्ट ने कर्मचारी चयन बोर्ड से स्पष्टीकरण मांगा है और भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
यह निर्णय पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगने से हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ेगा और वे अब 24 नवंबर को होने वाली सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं।