सिरोही | राजस्थान की राजनीति में प्रशासनिक अधिकारियों का इस्तेमाल अक्सर राजनीतिक मोहरे के रूप में होता रहा है, लेकिन जब कानून का डंडा चलता है तो बड़े-बड़े आदेश धरे रह जाते हैं। ऐसा ही एक मामला सिरोही और माउंट आबू में देखने को मिला है, जहां कार्यवाहक आयुक्त आशुतोष आचार्य की नियुक्ति को राजस्थान हाई कोर्ट ने पूरी तरह से स्टे कर दिया है। सिरोही नगर परिषद के पूर्व पार्षद भरत धवल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायालय ने यह कड़ा रुख अपनाया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस आदेश के बाद आचार्य अगले छह सप्ताह तक दोनों ही महत्वपूर्ण पदों पर किसी भी प्रकार का कार्य नहीं कर पाएंगे।
हाई कोर्ट ने किन आदेशों पर लगाई रोक?
मामले की गहराई में जाएं तो जिला कलेक्टर ने 24 नवंबर 2025 को एक आदेश जारी कर आशुतोष आचार्य को सिरोही का कार्यवाहक आयुक्त नियुक्त किया था। इसके तुरंत बाद, स्वायत्त शासन विभाग (DLB) के शासन सचिव एवं आयुक्त रवि जैन ने 26 फरवरी 2026 को एक और आदेश जारी कर उन्हें माउंट आबू नगर पालिका का भी अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया। राजस्थान हाई कोर्ट के न्यायाधीश संजीत पुरोहित ने इन दोनों ही आदेशों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता निशांत बापना ने दलील दी कि 'राजस्थान सबोर्डिनेट ऑफिसेस मिनिस्ट्रियल सर्विस रूल' के तहत नियुक्त किसी भी कार्मिक को आयुक्त या अधिशासी अधिकारी जैसे उच्च पदों का अतिरिक्त प्रभार नहीं दिया जा सकता।