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राजस्थान पंचायत चुनाव मार्च-अप्रैल में संभव: लॉटरी जनवरी में

प्रदीप बीदावत प्रदीप बीदावत 565

राजस्थान (Rajasthan) में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव मार्च-अप्रैल में होने की संभावना है। पंच-सरपंच (Panch-Sarpanch) के चुनाव पहले होंगे, जिसके लिए जनवरी में लॉटरी निकालने की तैयारी है। इसके बाद पंचायत समिति (Panchayat Samiti) और जिला परिषद (Zila Parishad) के चुनाव अप्रैल में हो सकते हैं।

HIGHLIGHTS

  1. 1 पंचायती राज चुनाव मार्च-अप्रैल में संभावित। पंच-सरपंच चुनाव पहले, अप्रैल में पंचायत समिति व जिला परिषद के। मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण 1 जनवरी से, लॉटरी जनवरी में। ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट इसी महीने संभव।
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राजस्थान पंचायत चुनाव मार्च-अप्रैल में संभव

जयपुर: राजस्थान (Rajasthan) में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव मार्च-अप्रैल में होने की संभावना है। पंच-सरपंच (Panch-Sarpanch) के चुनाव पहले होंगे, जिसके लिए जनवरी में लॉटरी निकालने की तैयारी है। इसके बाद पंचायत समिति (Panchayat Samiti) और जिला परिषद (Zila Parishad) के चुनाव अप्रैल में हो सकते हैं।

राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव जल्द ही संपन्न हो सकते हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया फिर से सक्रिय होगी। राज्य निर्वाचन आयोग इन चुनावों की तैयारी में पूरी मुस्तैदी से जुट गया है। पहले चरण में पंच-सरपंच के चुनाव कराए जाएंगे, जिसके बाद प्रधान और जिला परिषद के चुनाव होंगे।

राज्य निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पंच-सरपंच के चुनाव की अधिसूचना 1 मार्च के आसपास जारी होने की प्रबल संभावना है। इन चुनावों को 20 मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि ग्रामीण स्तर पर नई नेतृत्व व्यवस्था स्थापित हो सके।

चुनाव की संभावित समय-सारणी और प्रक्रिया

पंच-सरपंच के चुनाव बैलेट पेपर यानी मत पत्र से कराए जाएंगे, जो पारदर्शिता और पारंपरिक चुनावी प्रक्रिया को बनाए रखेगा। इन चुनावों के संपन्न होने के लगभग एक महीने बाद, यानी अप्रैल में, राज्य की 437 पंचायत समितियों और 41 जिला परिषदों के चुनाव कराए जा सकते हैं।

राज्य सरकार ने नवगठित ग्राम पंचायतों सहित कुल 14,781 ग्राम पंचायतों में चुनाव कराने के लिए हरी झंडी दे दी है। हालांकि, पंच-सरपंच और पंचायत समिति तथा जिला परिषद के चुनाव साथ-साथ कराने पर फिलहाल संशय बना हुआ है, और आयोग अलग-अलग चरणों में चुनाव कराने की योजना बना रहा है।

मतदाता सूची का पुनरीक्षण और आरक्षण की प्रक्रिया

मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कार्यक्रम

राज्य निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, 1 जनवरी को मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कार्यक्रम जारी होगा। यह प्रक्रिया मतदाताओं की सही संख्या और उनके पते में हुए बदलावों को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

पुनरीक्षण के बाद मतदाता सूची प्रकाशन का काम शुरू होगा, जिससे यह पता चलेगा कि कितने वोटर कटे, कितने जुड़े और कितने शिफ्ट हुए हैं। यह चुनावी प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है।

मतदाता सूचियों के प्रारूप का प्रकाशन 1 फरवरी के आसपास किया जाएगा, जिस पर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। विभाग सूत्रों के मुताबिक, आयोग ने इस संबंध में अपनी पूरी तैयारी कर ली है।

1 मार्च को मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा, जिसके बाद चुनाव के लिए अंतिम वोटर लिस्ट उपलब्ध होगी। आयोग चाहता है कि पंच-सरपंच के चुनाव 15 दिन में संपन्न हो जाएं, ऐसे में आयोग की पहली प्राथमिकता इन्हीं चुनावों को कराने की है।

आरक्षण को लेकर ओबीसी आयोग की रिपोर्ट

चुनाव प्रक्रिया में सबसे पहले आरक्षण को लेकर ओबीसी आयोग की रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग के पास आनी है। माना जा रहा है कि यह रिपोर्ट इसी महीने, यानी 31 दिसंबर से पहले, पंचायती राज विभाग आयोग को सौंप देगा।

इस रिपोर्ट से यह तय होगा कि कितने वार्ड होंगे और उनकी सीमाएं कहां-कहां होंगी। ओबीसी आयोग आरक्षण के लिए आवश्यक आंकड़े उपलब्ध कराएगा, जिनकी पालना निर्वाचन आयोग के लिए जरूरी होगी।

राज्य निर्वाचन आयोग मतदाता सूची तैयार करेगा। इन सभी महत्वपूर्ण कार्यों के पूरा होने पर आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी, जिससे आरक्षित सीटों का निर्धारण होगा।

सूत्रों के अनुसार, जनवरी में यह पूरी प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी। आरक्षण तय होने के बाद सरकार का पत्र निर्वाचन आयोग को भेजा जाएगा, जो चुनाव की दिशा में एक और कदम होगा।

प्रशासकों का मौजूदा परिदृश्य और संघ की मांग

राज्य सरकार ने प्रदेश की 11 हजार ग्राम पंचायतों में सरपंचों को प्रशासक और पूर्व सदस्यों को प्रशासनिक कमेटी की जिम्मेदारी दी है। हाल ही में इन सरपंचों का कार्यकाल पूरा हो गया था, जिसके बाद चुनाव समय पर नहीं हो पाए थे।

सरकार ने मौजूदा सरपंचों को ही प्रशासक बनाकर उनका कार्यकाल बढ़ा दिया था, ताकि ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक कार्य बाधित न हों। यह एक अस्थायी व्यवस्था थी।

सरपंचों और वार्ड पंचों की एक कमेटी बनाकर चुनाव होने तक उसे ही प्रशासक के अधिकार दिए गए। इससे पहले ग्राम सचिव प्रशासक लगते रहे हैं, लेकिन इस बार सरकार ने एक नया पैटर्न अपनाया है, जिससे स्थानीय प्रतिनिधियों को जिम्मेदारी मिली है।

सरपंच संघ राजस्थान के प्रवक्ता रफीक पठान का कहना है कि सरकार द्वारा चुनाव करवाना एक स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने कहा कि वे भी चाहते हैं कि जल्द से जल्द चुनाव हों और निर्वाचित सरपंचों को काम करने का अवसर मिले।

पठान ने यह भी मांग की कि चुनावों के बाद रुका हुआ फंड जारी हो, ताकि पंचायतों में विकास कार्य फिर से शुरू हो सकें। यह ग्रामीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

राजस्थान हाई कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्देश

उल्लेखनीय है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव करवाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। यह निर्देश चुनावी प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट कहा है कि 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन की पूरी प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि चुनावों में किसी भी प्रकार की देरी न हो। यह समय-सीमा सरकार के लिए एक चुनौती है।

20 नवंबर को कोर्ट ने परिसीमन प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इस संबंध में आने वाली शिकायतों पर राज्य स्तरीय कमेटी ही निर्णय लेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान हो सके।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि परिसीमन का अंतिम नोटिफिकेशन जारी होने के बाद उसे अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी। यह निर्णय परिसीमन प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में मदद करेगा।

ज्यादातर ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो गया था, लेकिन विभिन्न कारणों से चुनाव नहीं हुए थे, जिससे ग्रामीण प्रशासन में अनिश्चितता का माहौल था।

कार्यकाल पूरा कर चुकी पंचायत समितियां और प्रशासक

राज्य में करीब 222 पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, जो चुनावी प्रक्रिया की आवश्यकता को और बढ़ा देता है। ये पंचायत समितियां उदयपुर, टोंक, सीकर, राजसमंद सहित 21 जिलों में स्थित हैं।

जैसलमेर, उदयपुर, बाड़मेर, अजमेर, पाली, भीलवाड़ा, राजसमंद, नागौर, बांसवाड़ा, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चूरू, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, जालोर, झालावाड़, झुंझुनूं, प्रतापगढ़, सीकर और टोंक के जिला परिषदों में कलेक्टर को प्रशासक नियुक्त किया गया है। यह व्यवस्था तब तक रहेगी जब तक नए चुनाव नहीं हो जाते।

जनगणना और एसआईआर का संभावित प्रभाव

यह सवाल उठ रहा था कि ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव जनगणना और एसआईआर (स्टेट इनकम रजिस्टर) से प्रभावित होंगे या नहीं। साथ ही, चुनावी प्रक्रिया के लिए आवश्यक मेन पावर की उपलब्धता को लेकर भी चिंताएं थीं।

इसके जवाब में आयोग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके पास मेन पावर की कोई कमी नहीं है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इसके लिए राज्य सरकार के अधिकारियों से पहले ही बात हो चुकी है और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होंगे।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में दो चरणों में जनगणना होगी, जिसका पहला चरण अप्रैल 2026 से शुरू होगा। वहीं, एसआईआर की अंतिम वोटर लिस्ट का प्रकाशन 14 फरवरी को होगा, जिससे चुनावी प्रक्रिया पर कोई सीधा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

परिसीमन रिपोर्ट पर निर्वाचन आयोग का दबाव

सूत्रों के मुताबिक, राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज विभाग से जल्द से जल्द परिसीमन रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है। आयोग चुनाव प्रक्रिया को समय पर शुरू करने के लिए उत्सुक है।

आयोग ने इस संबंध में पंचायती राज विभाग के सचिव जोगाराम को एक पत्र भी लिखा है, जिसमें रिपोर्ट की शीघ्रता पर जोर दिया गया है। यह पत्र आयोग की गंभीरता को दर्शाता है।

जोगाराम ने आयोग के अधिकारियों को जल्द ही रिपोर्ट सौंपने का आश्वासन दिया है। सूत्रों के अनुसार, पंचायती राज विभाग इस सप्ताह के अंत तक यह महत्वपूर्ण रिपोर्ट सौंप देगा।

जानकारों के मुताबिक, पंचायत विभाग द्वारा परिसीमन रिपोर्ट सौंपे जाने का अर्थ है ग्राम पंचायतों, वार्डों या अन्य स्थानीय निकायों की सीमाओं का निर्धारण या उनमें बदलाव करना। यह चुनावी क्षेत्र के निर्धारण के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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