यह पूरा मामला रेवदर क्षेत्र के मंडार में संचालित एक होम्योपैथिक क्लिनिक से जुड़ा हुआ है। क्लिनिक संचालक प्रवीण चौधरी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में इसकी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के अनुसार, बीसीएमएचओ डॉ. लोंग मोहम्मद क्लिनिक संचालन की अनुमति देने और भविष्य में किसी भी प्रकार की आपत्ति नहीं उठाने के बदले रिश्वत की मांग कर रहे थे। उन्होंने इस काम के लिए 50 हजार रुपए मांगे थे।
परिवादी प्रवीण चौधरी ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि पहले भी जब उन्होंने रिश्वत नहीं दी थी, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई थी। इस गंभीर शिकायत के बाद एसीबी टीम तुरंत सक्रिय हो गई और जांच शुरू की।
सुनियोजित सत्यापन और ट्रैप की तैयारी
एसीबी टीम ने 12 दिसंबर को इस शिकायत का गहन सत्यापन किया। सत्यापन के दौरान परिवादी द्वारा लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए, जिससे कार्रवाई की दिशा तय हुई।
इसके बाद चित्तौड़गढ़ एसीबी टीम ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए पूरी योजना तैयार की। एक सुनियोजित रणनीति के तहत रिश्वत की रकम में 30 हजार रुपए के नकली नोट भी शामिल किए गए, ताकि लेन-देन के स्पष्ट और अकाट्य सबूत जुटाए जा सकें।
इस प्रकार, टीम ने अपनी योजना को अत्यंत गोपनीय तरीके से अंजाम दिया, जिससे आरोपी को कोई शक न हो। यह पूरी तैयारी भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश देने के लिए की गई थी।
घर बुलाकर कार में ली रिश्वत, मौके पर दबोचा
डॉ. लोंग मोहम्मद ने परिवादी प्रवीण चौधरी को भैरूगढ़ रोड स्थित अपने निजी आवास पर बुलाया। इसके बाद उन्होंने परिवादी को अपनी कार में बैठाकर रिश्वत की मांग की, ताकि लेन-देन निजी और सुरक्षित रहे।
जैसे ही आरोपी ने 50 हजार रुपए की रिश्वत राशि ली, पहले से घात लगाकर बैठी एसीबी टीम ने तुरंत कार्रवाई की। टीम ने मौके पर पहुंचकर डॉ. लोंग मोहम्मद को रंगे हाथ पकड़ लिया, जिससे वह भौंचक्के रह गए।
भागने का प्रयास विफल, कानूनी प्रक्रिया शुरू
कार्रवाई के दौरान आरोपी डॉ. लोंग मोहम्मद ने मौके से भागने का असफल प्रयास किया। हालांकि, एसीबी टीम ने अपनी तत्परता और मुस्तैदी दिखाते हुए उसे तुरंत हिरासत में ले लिया।
इसके बाद आरोपी को रेवदर थाने ले जाया गया, जहां उससे गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसमें मामले की विस्तृत जांच शामिल है।
उच्च अधिकारियों के निर्देशन में सफल ऑपरेशन
यह पूरी कार्रवाई एसीबी के डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के कुशल निर्देशन में की गई। डीएसपी हरिश्चंद्र ने इस संवेदनशील ट्रैप ऑपरेशन का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया।
एसीबी महानिदेशक गोविंद गुप्ता एवं एडीजी ईडब्ल्यूएस स्मिता श्रीवास्तव के उच्च निर्देशों पर यह सफल ट्रैप ऑपरेशन अंजाम दिया गया। भ्रष्टाचार के खिलाफ यह कार्रवाई सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।