इस प्रकरण ने सिरोही की राजनीति में भी उबाल ला दिया था। पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार संयम लोढ़ा के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने इस आवंटन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। प्रदर्शनकारियों ने राज्यमंत्री ओटाराम देवासी और उनके करीबियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। लोढ़ा ने कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में साक्ष्य दिए थे कि कैसे सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर मंदिर की भूमि को निजी लाभ के लिए आवंटित किया गया। इस विरोध प्रदर्शन ने प्रशासन पर दबाव बनाया जिससे त्वरित जांच संभव हो सकी।
इन लाभार्थियों के आवंटन हुए रद्द
जिला कलेक्टर के आदेश के बाद जिन लोगों के पट्टे निरस्त किए गए हैं उनमें विनोद मालवीय पुत्र मदनलाल मालवीय के नाम भूखंड संख्या एक, दो और तीन शामिल हैं। इसके अलावा भूखंड संख्या चार पर खुशवंत माली, भूखंड संख्या पांच पर कुलदीप सिंह देवड़ा, भूखंड संख्या छह पर विनोद कुमार देवड़ा, भूखंड संख्या सात पर राकेश कुमार और भूखंड संख्या आठ पर तारा कंसारा के नाम जारी पट्टे अब अवैध घोषित कर दिए गए हैं। प्रशासन अब इन भूखंडों के दस्तावेजों को रिकॉर्ड से हटाने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है ताकि भूमि का मूल स्वरूप बहाल हो सके।
दोषी अधिकारियों पर गिरेगी गाज
कलेक्टर अल्पा चौधरी ने आदेश में यह भी उल्लेख किया है कि इस पूरे प्रकरण में जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने नियमों की अनदेखी की है उनकी पहचान की जाए। प्रशासन ने नगर परिषद को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक पारदर्शी प्रणाली विकसित की जाए। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यदि जांच में अधिकारियों की जानबूझकर की गई मिलीभगत साबित होती है तो उनके खिलाफ विभागीय जांच के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। मंदिर भूमि के संरक्षण के लिए अब कड़े सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं।
श्रद्धालुओं और स्थानीय समाज में खुशी
इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद रामझरोखा मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों में खुशी की लहर है। लोगों ने जिला प्रशासन की निष्पक्षता की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक आस्था के केंद्रों की भूमि को बचाना प्रशासन का सराहनीय कदम है। स्थानीय लोगों ने पूर्व विधायक संयम लोढ़ा के प्रयासों का भी आभार जताया जिन्होंने इस लड़ाई को जन आंदोलन बनाया। अब इस भूमि को मंदिर के मूल स्वरूप में वापस लाने और इसके संरक्षण की मांग उठ रही है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि मंदिर की संपत्ति के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।