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ज़िंदगानी

रोहिड़ा गाँव में सामाजिक समरसता का अद्भुत एवं ऐतिहासिक कार्यक्रम संपन्न

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सोमवार को श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर रोहिड़ा गाँव के पीपलसा माताजी मंदिर प्रांगण में आर्य समाज की प्रेरणा से यज्ञोपवित संस्कार का आयोजन किया गया।

HIGHLIGHTS

  1. 1 सर्व समाज के आयोजन में 57 लोगों का हुआ सामूहिक यज्ञोपवित संस्कार
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यज्ञोपवित धारण करते बटुक।

रोहिड़ा (सिरोही), 19 अगस्त: सोमवार को श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर रोहिड़ा गाँव के पीपलसा माताजी मंदिर प्रांगण में आर्य समाज की प्रेरणा से एक अद्भुत और ऐतिहासिक सामूहिक यज्ञोपवित संस्कार का आयोजन किया गया। इस आयोजन में सर्व समाज के 57 व्यक्तियों ने वैदिक मंत्रोचारण के साथ एक ही यज्ञ वेदी के समक्ष विधि विधान से जनेऊ धारण किया।

इस सामूहिक संस्कार में मेघवाल समाज के 25, ब्राह्मण समाज के 15, लोहार समाज के 5, सोनी समाज के 4 और अन्य समाजों के 8 व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। इन सभी ने जनेऊ धारण कर वैदिक धर्म के मार्ग पर चलने और स्वयं एवं विश्व के कल्याण की कामना करने की शपथ ली।

कार्यक्रम के दौरान माउंट आबू गुरुकुल के स्वामी ओमानंदजी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए यज्ञवेदी में लगने वाली प्रत्येक आहुति के भावों को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में जाति व्यवस्था नहीं थी, बल्कि वर्ण व्यवस्था थी। जाति जन्म से नहीं, बल्कि व्यक्ति के आचार, विचार, और कृत्यों से बनती है। जाति तो एक ही है - मनुष्य जाति। उन्होंने समाज में भेदभाव की प्रवृत्ति को नष्ट कर मानव कल्याण के लिए कार्य करने का आह्वान किया। स्वामीजी ने नवदीक्षित जनेऊधारी सनातनी यजमानों को आशीर्वाद देकर वैदिक व्रतों को धारण कराया।

इस आयोजन का संचालन रोहिड़ा निवासी गिरीश जोशी के आचार्यत्व और राजेश दवे के संयोजन में किया गया। विश्व हिन्दू परिषद के जिला अध्यक्ष शंकर लाल माली, जिला मंत्री लक्ष्मण रावल, और आयोजन समिति के सदस्य चुन्नीलाल मेघवाल, जितेंद्र मेघवाल, मोहन मेघवाल, किशोर मेघवाल, वीसाराम मेघवाल आदि ने इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया।

विश्व हिन्दू परिषद के जिला अध्यक्ष शंकरलाल माली ने कहा कि यह आयोजन पूरे प्रदेश में अपने आप में पहला और अनूठा है, जिसमें सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के पश्चात गुरुकुल से आए ब्रह्मचारियों ने भजन गाकर कार्यक्रम का समापन किया। अंत में सभी लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन किया।

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