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ज़िंदगानी

सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में रैंप पर दवा, मरीज लिफ्ट में ठसाठस

गणपत सिंह मांडोली गणपत सिंह मांडोली 21

जयपुर (Jaipur) के एसएमएस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल (SMS Super Specialty Hospital) में मरीजों के लिए बना रैंप दवा स्टोर बन गया है। हर फ्लोर पर दवा के कार्टन और गंदगी होने से मरीज इसका उपयोग नहीं कर पाते, जिससे उन्हें भरी हुई लिफ्ट से जाना पड़ता है और आगजनी जैसी आपात स्थिति में सुरक्षा पर सवाल उठते हैं।

HIGHLIGHTS

  1. 1 रैंप पर दवाइयों के कार्टन और गंदगी के कारण मरीज उपयोग नहीं कर पाते। गंभीर मरीजों को भरी हुई लिफ्ट से जाना पड़ता है, स्ट्रेचर वालों को इंतजार। आपात स्थिति में आग से बचाव का एकमात्र रास्ता रैंप भी बंद पड़ा है। अधीक्षक ने मामले का संज्ञान लिया, रैंप खुलवाने का आश्वासन दिया।
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सुपरस्पेशलिटी में रैंप पर दवा: मरीज परेशान

जयपुर: जयपुर (Jaipur) के एसएमएस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल (SMS Super Specialty Hospital) में मरीजों के लिए बना रैंप दवा स्टोर बन गया है। हर फ्लोर पर दवा के कार्टन और गंदगी होने से मरीज इसका उपयोग नहीं कर पाते, जिससे उन्हें भरी हुई लिफ्ट से जाना पड़ता है और आगजनी जैसी आपात स्थिति में सुरक्षा पर सवाल उठते हैं।

मरीजों की सुविधा के लिए बना रैंप बना दवा स्टोर

एसएमएस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में गंभीर मरीजों को एक मंजिल से दूसरी मंजिल पर ले जाने के लिए सात मंजिला रैंप बनाया गया था। यह महत्वपूर्ण रैंप अब प्रबंधन की घोर लापरवाही की भेंट चढ़कर दवा स्टोर में तब्दील हो गया है।

यह अस्पताल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान करता है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों गंभीर मरीज इलाज के लिए आते हैं, जिनके लिए सुगम आवाजाही अत्यंत आवश्यक है।

प्रवेश द्वार से लेकर आखिरी मंजिल तक, हर फ्लोर पर सीरिंज, इंजेक्शन और दवाइयों के कार्टन बिखरे पड़े हैं। स्थिति देखकर साफ लगता है कि मरीजों द्वारा इस रैंप का कभी उपयोग ही नहीं किया गया।

गंभीर मरीजों को लिफ्ट पर निर्भरता और चुनौतियां

लिफ्ट में भीड़ और लंबा इंतजार

गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी जैसे विभागों में भर्ती गंभीर मरीजों को मजबूरन अत्यधिक भरी हुई लिफ्ट का उपयोग करना पड़ता है। स्ट्रेचर वाले मरीजों को तो कई बार लिफ्ट में जगह खाली होने तक लंबा इंतजार करना पड़ता है, जो उनकी स्थिति को और बिगाड़ सकता है।

अस्पताल में मरीजों के लिए 6 और डॉक्टरों के लिए 2 लिफ्ट उपलब्ध हैं, लेकिन 1100-1200 दैनिक ओपीडी और 50-70 मरीजों की रोज भर्ती के कारण वे अक्सर ठसाठस भरी रहती हैं। सीढ़ियां भी एक विकल्प हैं, लेकिन स्ट्रेचर या गंभीर मरीज उनका उपयोग नहीं कर सकते।

रैंप की बदहाली और संक्रमण का खतरा

रैंप के हर फ्लोर पर दवा कार्टन के ढेर, जगह-जगह मकड़ी के जाले, धूल और गंदगी का अंबार लगा हुआ है। कई दवाएं बींट और संक्रमण के खतरे में पड़ी मिलीं, जिससे मरीजों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकता है।

यह स्थिति अस्पताल प्रशासन की सीधी अनदेखी को दर्शाती है, जहां स्वच्छता और मरीजों की सुरक्षा को ताक पर रख दिया गया है। मरीजों को इस गंदगी भरे रास्ते से जाने में डर लगता है, जिससे वे लिफ्ट पर अधिक निर्भर होते हैं।

आपातकालीन सुरक्षा पर गंभीर सवाल

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आगजनी जैसी आपदा की स्थिति में मरीजों को बचाने का एकमात्र सुरक्षित रास्ता यही रैंप होता है, क्योंकि ऐसी आपातकालीन स्थितियों में लिफ्ट बंद कर दी जाती है।

लेकिन, यह महत्वपूर्ण रैंप फिलहाल पूरी तरह से बंद और अनुपयोगी है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। यह सुरक्षा मानकों का सीधा उल्लंघन है।

अस्पताल अधीक्षक का आश्वासन

सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. नचिकेत व्यास ने बताया कि मरीजों की सुविधा के लिए बने रैंप का मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे छुट्टी से लौटकर इसे प्राथमिकता के आधार पर खुलवा देंगे।

डॉ. व्यास ने बताया, "मरीजों की सुविधा के लिए बना रैंप का मामला प्रसंज्ञान में आया है। मैं निजी कारणों से अभी छुट्‌टी पर हूं। इसी माह की 17 दिसंबर से फिर से जॉइन करूंगा।"

उन्होंने आगे कहा, "यह मरीजों के लिए बना है, इसे खुलवा देंगे। मरीजों को किसी प्रकार की समस्या नहीं आने देंगे।"

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