जो लोगों के लिए तो अचरज भरा है साथ ही सियासी गलियारों में भी हलचल पैदा कर रहा है।
बता दें कि राजस्थान विधानसभा का 8वां सत्र आज से शुरू हो गया है।
विधानसभा के इस सत्र में करीब 11 नए, संशोधित और पेंडिंग बिल पेश किए जाएंगे।
बता दें कि, विधानसभा का ये सत्र बेहद हंगामेदार होने के आसार है। चुनावी घमासान के बीच विपक्षी पार्टी कई मुद्दों पर गहलोत सरकार को घेरने के लिए हर तरह से तैयार बैठ है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि, ’जनप्रतिनिधि जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं। उनका आचार-विचार जनहित की दिशा में जनता के लिए होना चाहिए।
जनप्रतिनिधियों की सोच ’मैं’ और ’मेरा’ को छोड़कर ’हमारा’ होना चाहिए।
मैं और मेरा सोचने से देश और समाज का हित नहीं होता, इसलिए जनप्रतिनिधियों को हमेशा जनता के लिए, राज्य के लिए सोचना चाहिए।
ऐसे में लोगों को लगता है कि राष्ट्रपति मुर्मू के संबोधन में कहे गए ’मैं’ और ’मेरा’ को छोड़कर ’हमारा’ होना चाहिए.... का इन नेताओं पर भी प्रभाव पड़ा है। जिसके चलते इन्होंने भी अपने सियासी मतदभेदों को भूलकर राजस्थान की भलाई के लिए ये फैसला किया होगा।