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ज़िंदगानी

विराट-अनुष्का तीसरी बार प्रेमानंद जी से मिले, महाराज ने कहा- मस्त रहो

गणपत सिंह मांडोली गणपत सिंह मांडोली 29

क्रिकेटर विराट कोहली (Cricketer Virat Kohli) और अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) मंगलवार को वृंदावन (Vrindavan) में प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj) से मिले। यह इस साल उनकी तीसरी मुलाकात थी। अनुष्का ने कहा, 'हम आपके, आप हमारे।' महाराज ने कहा, 'मस्त रहो।'

HIGHLIGHTS

  1. 1 विराट और अनुष्का ने वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए। अनुष्का ने महाराज जी से कहा, "हम आपके हैं और आप हमारे।" प्रेमानंद जी ने कहा, "मस्त रहो, भगवान के आश्रित रहो।" महाराज जी ने अपने काम को भगवान की सेवा समझने का उपदेश दिया।
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विराट-अनुष्का प्रेमानंद जी से मिले: मस्त रहो!

मथुरा: क्रिकेटर विराट कोहली (Cricketer Virat Kohli) और अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) मंगलवार को वृंदावन (Vrindavan) में प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj) से मिले। यह इस साल उनकी तीसरी मुलाकात थी। अनुष्का ने कहा, 'हम आपके, आप हमारे।' महाराज ने कहा, 'मस्त रहो।'

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली और उनकी अभिनेत्री पत्नी अनुष्का शर्मा ने एक बार फिर वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए। यह उनकी इस साल की तीसरी और कुल मिलाकर चौथी मुलाकात थी।

दोनों मंगलवार को केली कुंज आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने महाराज जी से आशीर्वाद प्राप्त किया। उनकी पहली मुलाकात 4 जनवरी 2023 को हुई थी।

महाराज जी के सामने घुटनों के बल बैठे विराट-अनुष्का

आश्रम में विराट और अनुष्का घुटनों के बल महाराज जी के सामने बैठे। उन्होंने सिर झुकाकर संत का आशीर्वाद लिया।

इस दौरान दोनों हाथ जोड़कर महाराज जी की बातें ध्यानपूर्वक सुनते रहे। विराट कोहली माथे पर तिलक और गले में तुलसी की माला पहने हुए थे।

वे महाराज जी की बातों पर सिर हिलाते रहे और मुस्कुराते रहे। उनकी भक्ति और विनम्रता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी।

अनुष्का ने कहा, 'हम आपके, आप हमारे'

मुलाकात के दौरान अनुष्का शर्मा ने प्रेमानंद जी से कहा, "महाराज जी, हम आपके हैं और आप हमारे।" इस पर प्रेमानंद जी मुस्कुराए।

उन्होंने जवाब में कहा, "हम सब श्रीजी के हैं। खूब आनंद पूर्वक रहो। मस्त रहो। भगवान के आश्रित रहो।" यह सुनकर दोनों ने महाराज जी के वचनों को आत्मसात किया।

प्रेमानंद जी के उपदेश: अपने काम को भगवान की सेवा समझें

संत प्रेमानंद महाराज ने विराट और अनुष्का को जीवन के गूढ़ रहस्य समझाए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने काम को भगवान की सेवा समझना चाहिए।

महाराज जी ने गंभीर भाव से रहने और विनम्रता बनाए रखने का उपदेश दिया। उन्होंने जीवन को उन्नतिशील बनाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, "जब तक भगवान न मिल जाएं, हमारी यात्रा रुकनी नहीं है। हम लौकिक-पारलौकिक सभी क्षेत्रों को पार करते हैं।"

महाराज जी ने ठाकुरजी को एक बार देखने की लालसा रखने की बात कही। उन्होंने कहा, "एक बार ठाकुरजी को भी देखें, जिसके हम असली में हैं।"

माया से निकलकर अपने असली स्वरूप को पहचानें

प्रेमानंद जी ने समझाया कि अनंत जन्मों से हम इस माया में भ्रमित हो रहे हैं। हमने न जाने किस-किस को अपना बनाया, पर सब छूटते गए।

उन्होंने कहा, "एक बार जो अपना है, उसको तो देख लें। जो अपना असली पिता है, जिसने मुझे प्रकट किया, जिसने मुझे बनाया, एक बार उसको तो देखें।"

महाराज जी ने अपने वास्तविक स्वरूप और ईश्वर से संबंध को पहचानने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस लालसा को जीवन का लक्ष्य बताया।

'हम सब श्रीजी के बच्चे हैं'

प्रेमानंद जी ने विराट और अनुष्का को बताया कि हम सब श्रीजी के हैं। उन्होंने आकाश के नीले छत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि हम सब उसी के बच्चे हैं।

उन्होंने कहा, "आगे का मार्ग आप नहीं जानते, तो हम आपका हाथ पकड़ लिए। हमारा हाथ कोई और पकड़े है, उसका हाथ कोई और पकड़े है और उसका हाथ हमारे इष्ट ने पकड़ रखा है।"

महाराज जी ने इस क्रम को इष्ट, आचार्य, गुरुदेव बताया। उन्होंने कहा कि हम उन्हीं के बल से आगे बढ़ रहे हैं और अंत में वहीं पहुंच जाएंगे।

भगवान के सन्मुख रहने का महत्व: रावण का उदाहरण

प्रेमानंद महाराज जी ने रामायण का उदाहरण देते हुए भगवान के सन्मुख रहने का महत्व समझाया। उन्होंने रावण का जिक्र किया।

रावण के पास सब कुछ था, लेकिन उसमें विवेक नहीं था। भगवान से विमुख होने के कारण उसका पतन हुआ।

महाराज जी ने इस घटना से सीख लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि हमें भगवान के सन्मुख रहना चाहिए ताकि हमारा जीवन सफल हो सके।

उन्होंने गुरु, आचार्य और इष्ट के सहारे आगे बढ़ने की परंपरा को हाथ पकड़कर मंजिल तक पहुंचाने वाला बताया।

'जो भगवान का चिंतन करता है, उसकी जिम्मेदारी भगवान की'

भगवद्गीता का उदाहरण देते हुए महाराज जी ने कहा कि जो भगवान का अनन्य चिंतन करता है, उसके योग और क्षेम की जिम्मेदारी स्वयं भगवान लेते हैं।

योग का अर्थ अप्राप्त की प्राप्ति और क्षेम का अर्थ प्राप्त की रक्षा है। उन्होंने बताया कि गृहस्थ हो या विरक्त, भगवान सबकी व्यवस्था करते हैं।

महाराज जी ने अहंकार को त्यागने की बात कही। उन्होंने समझाया कि जब तक हम 'मैं कर रहा हूं' की भावना रखते हैं, तब तक सीमित ही मिलता है।

भगवान के आश्रय में आने पर सभी व्यवस्थाएं अपने आप होती हैं। यह विश्वास ही सच्ची भक्ति का आधार है।

भक्ति में विश्वास की अनिवार्यता

प्रेमानंद जी ने प्रह्लाद और अर्जुन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सच्चे भक्त की रक्षा भगवान स्वयं करते हैं।

विश्वास के बिना भक्ति संभव नहीं है और भक्ति के बिना सद्गति नहीं मिलती। यह जीवन का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है।

महाराज जी ने समझाया कि भगवान को नौकर न समझें। या तो कठोर तपस्या करें या भगवान के अपने बनें।

उन्होंने कहा कि अपनापन होगा तो आवश्यकता की पूर्ति स्वयं होगी। यह ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव है।

टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बाद भी की थी मुलाकात

यह पहली बार नहीं है जब विराट और अनुष्का प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे हैं। विराट ने 7 महीने पहले टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की थी।

इस घोषणा के अगले दिन भी वे अनुष्का के साथ प्रेमानंद महाराज के आश्रम गए थे। तब उन्होंने वृंदावन के केली कुंज आश्रम में 15 मिनट तक महाराज जी से बात की थी।

उस समय वे आश्रम में करीब ढाई घंटे रुके थे। यह दिखाता है कि दोनों का महाराज जी के प्रति गहरा विश्वास और श्रद्धा है।

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