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राजस्थान

विधानसभा में नक्षत्र और हर्बल वाटिका: राजस्थान विधानसभा में हर्बल और नक्षत्र वाटिका का उद्घाटन

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पांच राज्यों के स्पीकर्स संग किया वाटिकाओं का लोकार्पण।

HIGHLIGHTS

  • राजस्थान विधानसभा में हर्बल और नक्षत्र वाटिका का भव्य उद्घाटन हुआ।
  • पांच राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों ने इस गरिमामय समारोह में शिरकत की।
  • हर्बल वाटिका में 38 प्रकार की औषधीय प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं।
  • नक्षत्र वाटिका में 27 नक्षत्रों के प्रतिनिधि वृक्षों का रोपण किया गया है।
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जयपुर | राजस्थान विधानसभा परिसर में मंगलवार को पर्यावरण, आयुर्वेद और भारतीय ज्योतिष विज्ञान को समर्पित दो अनूठी वाटिकाओं का विधिवत उद्घाटन सम्पन्न हुआ। यह कदम भारतीय ज्ञान परंपरा को सहेजने की दिशा में अहम है।

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने देश के पांच राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों के साथ इन वाटिकाओं का लोकार्पण किया। इस अवसर पर परिसर में उत्सव जैसा माहौल नजर आया।

इस गरिमामय कार्यक्रम में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम के विधानसभा अध्यक्ष विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभी ने राजस्थान की इस पहल की सराहना की।

हर्बल वाटिका: औषधीय ज्ञान का जीवंत केंद्र

विधानसभा के उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थापित हर्बल वाटिका का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य और आयुर्वेद के महत्व को रेखांकित करना है। यह वाटिका औषधीय पौधों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाएगी।

इस वाटिका को वैज्ञानिक पद्धति से तैयार किया गया है। इसमें 8×13 फीट आकार की कुल 38 क्यारियां बनाई गई हैं। प्रत्येक क्यारी में विशिष्ट औषधीय पौधे रोपे गए हैं।

वाटिका में इलायची, पोदीना, लेमनग्रास, घृतकुमारी (एलोवेरा), सदाबहार और तुलसी जैसी जड़ी-बूटियां शामिल हैं। इसके अलावा सिट्रोनेला, पत्थर चट्टा और सफेद मूसली के पौधे भी यहाँ की शोभा बढ़ा रहे हैं।

प्राकृतिक चिकित्सा को प्रोत्साहन

हर्बल वाटिका में इन्सुलिन, पीपली, समुद्र बेल, ब्राह्मी, लाजवंती और अपराजिता जैसी दुर्लभ प्रजातियां भी लगाई गई हैं। यह वाटिका आने वाले आगंतुकों को प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के प्रति प्रेरित करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन पौधों का सानिध्य मानसिक शांति और शारीरिक आरोग्य प्रदान करता है। विधानसभा परिसर में इनका होना पर्यावरण की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।

नक्षत्र वाटिका: प्रकृति और खगोल विज्ञान का संगम

परिसर के दक्षिणी क्षेत्र में स्थापित नक्षत्र वाटिका भारतीय ज्योतिष और आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है। यह वाटिका खगोल विज्ञान और प्रकृति के गहरे संबंध को दर्शाती है।

भारतीय ज्योतिष के अनुसार आकाशमंडल में 27 नक्षत्र माने गए हैं। प्रत्येक नक्षत्र का संबंध एक विशिष्ट वृक्ष से होता है। नक्षत्र वाटिका में इन सभी 27 प्रतिनिधि वृक्षों को लगाया गया है।

यहाँ अश्विनी नक्षत्र के लिए कुचला, भरणी के लिए आंवला और कृतिका के लिए गूलर का वृक्ष लगाया गया है। इसी तरह रोहिणी के लिए जामुन और मृगसिर के लिए खैर रोपा गया है।

नक्षत्रों और वृक्षों का आध्यात्मिक जुड़ाव

वाटिका में आर्द्रा के लिए शीशम, पुनर्वसु के लिए बांस और पुष्य के लिए पीपल जैसे पवित्र वृक्ष मौजूद हैं। आश्लेषा के लिए नागकेसर और मघा के लिए बरगद के वृक्ष लगाए गए हैं।

पूर्व फाल्गुनी का पलाश और उत्तर फाल्गुनी का पाकड़ भी यहाँ अपनी छटा बिखेर रहे हैं। स्वाती के लिए अर्जुन और विशाखा के लिए कटाई जैसे वृक्षों का चयन किया गया है।

अनुराधा के लिए मौलश्री, मूल के लिए साल और पूर्वाषाढ़ा के लिए अशोक का वृक्ष लगाया गया है। श्रवण के लिए शमी और धनिष्ठा के लिए मदार के वृक्ष रोपे गए हैं।

शतभिषा के लिए कदंब, पूर्व भाद्रपद के लिए आम, उत्तर भाद्रपद के लिए नीम और रेवती के लिए महुआ के वृक्ष इस वाटिका को पूर्णता प्रदान कर रहे हैं।

अमृत महोत्सव और संसदीय परंपराएं

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने बताया कि राजस्थान विधानसभा की स्थापना का यह वर्ष अमृत महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। ये वाटिकाएं इसी महोत्सव का हिस्सा हैं।

राजस्‍थान विधान सभा की स्‍थापना का यह वर्ष अमृत महोत्‍सव के रूप में मनाया जा रहा है। इस महोत्‍सव के तहत ही यह दो वाटिकाएं निर्मित की गई हैं।

उद्घाटन के बाद अतिथि अध्यक्षों ने विधानसभा के भव्य सभागार का अवलोकन किया। उन्होंने राजस्थान की गौरवशाली संसदीय परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

डिजिटल म्यूजियम का अवलोकन

अतिथियों ने परिसर में स्थित अत्याधुनिक डिजिटल म्यूजियम को भी देखा। यह म्यूजियम राजस्थान की विधायी यात्रा और लोकतांत्रिक मूल्यों को तकनीक के माध्यम से बखूबी प्रदर्शित करता है।

मध्यप्रदेश के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर और उत्तरप्रदेश के अध्यक्ष सतीश महाना ने इसे ज्ञानवर्धक बताया। हिमाचल, ओडिशा और सिक्किम के अध्यक्षों ने भी म्यूजियम की तकनीक की प्रशंसा की।

विजिटर्स बुक में अतिथियों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने इन वाटिकाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम करार दिया।

अंत में, ये वाटिकाएं न केवल विधानसभा की सुंदरता बढ़ाएंगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को आयुर्वेद और ज्योतिष के वैज्ञानिक महत्व से भी परिचित कराएंगी। यह पहल सराहनीय है।

*Edit with Google AI Studio

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