thinQ360
thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
राजस्थान

राजस्थान में महिला आरक्षण का बड़ा असर: राजस्थान विधानसभा में बढ़ेंगी महिला विधायक: 200 से 266 हो सकती हैं सीटें, विकास कार्यों के लिए मिलेगा ज्यादा बजट

बलजीत सिंह शेखावत

संसद में महिला आरक्षण बिल पास होने के बाद राजस्थान की राजनीति में बड़ा बदलाव आने वाला है। अब विधानसभा में कम से कम 66 महिला विधायकों की मौजूदगी सुनिश्चित होगी और कुल सीटें भी बढ़ सकती हैं।

HIGHLIGHTS

  • राजस्थान विधानसभा में महिला विधायकों की संख्या न्यूनतम 66 होना तय माना जा रहा है।
  • परिसीमन के बाद प्रदेश में विधानसभा सीटों की कुल संख्या 200 से बढ़कर 266 हो सकती है।
  • लोकसभा की वर्तमान 25 सीटों में भी 8 सीटों की बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है।
  • विधायकों की संख्या बढ़ने से विकास कार्यों के लिए सालाना बजट 1000 करोड़ से बढ़कर 1350 करोड़ होगा।
rajasthan assembly women reservation impact seats increase

जयपुर | संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल पारित होने के बाद राजस्थान की राजनीति में एक ऐतिहासिक परिवर्तन की नींव पड़ चुकी है। माना जा रहा है कि भविष्य के विधानसभा चुनावों में महिलाओं की भागीदारी में जबरदस्त उछाल आएगा। अब सदन में कम से कम 66 महिला विधायकों का पहुंचना लगभग तय है।

सीटों की संख्या में होगा बड़ा इजाफा

परिसीमन के बाद विधानसभा की कुल सदस्य संख्या 200 से बढ़कर 266 तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही प्रदेश में लोकसभा की सीटें भी 25 से बढ़कर 33 होने की संभावना है। आरक्षण लागू होने के बाद राजस्थान की 66 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

ऐतिहासिक सफर और वर्तमान स्थिति

राजस्थान के संसदीय इतिहास में महिलाओं का सफर चुनौतीपूर्ण रहा है। 1952 के पहले चुनाव में 160 सीटों पर एक भी महिला विधायक निर्वाचित नहीं हुई थी। हालांकि, उपचुनावों के माध्यम से दो महिलाएं सदन पहुंची थीं। 1957 में सीटें 176 हुईं और 1967 में इनकी संख्या बढ़कर 184 हो गई थी। साल 2008 की तेरहवीं विधानसभा में सबसे अधिक 29 महिला विधायक चुनी गई थीं। वर्तमान में 200 में से केवल 21 महिला विधायक सदन में प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

विकास कार्यों को मिलेगी नई गति

सीटों की संख्या बढ़ने से राज्य के विकास कार्यों के लिए मिलने वाले बजट में भी भारी बढ़ोतरी होगी। प्रत्येक विधायक को सालाना 5 करोड़ रुपये का कोष मिलता है। सीटें 266 होने पर विकास फंड 1000 करोड़ से बढ़कर 1350 करोड़ रुपये हो जाएगा। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे में बड़ा सुधार होगा। हालांकि, नए विधायकों के वेतन और भत्तों पर सरकारी खजाने से सालाना लगभग 12.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार भी बढ़ेगा।

महिला नेतृत्व का नया युग

राजस्थान को पहली महिला मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के रूप में 2003 में मिली थी। उसी समय सुमित्रा सिंह पहली महिला विधानसभा अध्यक्ष बनी थीं। आरक्षण के इस नए प्रावधान से जमीनी स्तर पर महिला नेतृत्व को मजबूती मिलेगी। यह कदम भविष्य के चुनावों में महिलाओं की निर्णायक भूमिका तय करेगा।

शेयर करें: