जयपुर | राजस्थान प्रदेश कांग्रेस संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की कवायद शुरू हो गई है। पार्टी ने उन नेताओं के लिए दरवाजे खोल दिए हैं जो पिछले चुनावों में साथ छोड़ गए थे।
राजस्थान: कांग्रेस में 'घर वापसी' की तैयारी, दिग्गज लौटेंगे
राजस्थान कांग्रेस अनुशासन समिति की बैठक में कई नेताओं की वापसी पर बनी सहमति।
HIGHLIGHTS
- अनुशासन समिति ने एक दर्जन से अधिक नेताओं की वापसी पर सहमति जताई है।
- पूर्व विधायक और भाजपा छोड़कर आने वाले नेता भी सूची में शामिल हैं।
- अंतिम निर्णय प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी हाईकमान द्वारा लिया जाएगा।
- पंचायत और निकाय चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने की रणनीति है।
संबंधित खबरें
कांग्रेस अनुशासन समिति की महत्वपूर्ण बैठक
रविवार शाम को प्रदेश कांग्रेस वॉर रूम में अनुशासन समिति की एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा पार्टी छोड़कर गए नेताओं की वापसी था।
बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना ने की। इस दौरान संगठन की मजबूती और अनुशासन के मानकों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में समिति की सदस्य शकुंतला रावत और हाकम अली भी मौजूद रहे। सभी सदस्यों ने नेताओं की वापसी के विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय साझा की।
संबंधित खबरें
समिति की अगली बैठक अब 11 मई को होना संभावित है। इसमें बचे हुए नामों और आवेदनों पर अंतिम विचार-विमर्श किया जाएगा।
दिग्गज नेताओं की वापसी पर बनी सहमति
करीब एक घंटे से अधिक समय तक चली इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सूत्रों के अनुसार, एक दर्जन से अधिक नेताओं की वापसी पर सहमति बनी है।
इन नामों में पूर्व विधायक, पूर्व पदाधिकारी और कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने विधानसभा या लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी से दूरी बना ली थी।
समिति ने फिलहाल गोपनीयता का हवाला देते हुए नामों का सार्वजनिक खुलासा नहीं किया है। हालांकि, माना जा रहा है कि सूची में कई बड़े चेहरे शामिल हैं।
दिलचस्प बात यह है कि भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आने के इच्छुक नेताओं पर भी चर्चा हुई है। पार्टी ऐसे नेताओं को शामिल कर अपना जनाधार बढ़ाना चाहती है।
हाईकमान को सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट
उदयलाल आंजना ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत की। उन्होंने बताया कि समिति ने कुछ नामों की अनुशंसा तैयार कर ली है।
यह रिपोर्ट जल्द ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को सौंपी जाएगी। साथ ही प्रदेश प्रभारी को भी इस पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया जाएगा।
आंजना ने स्पष्ट किया कि किसी भी नेता की एंट्री पर अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान ही करेगा। समिति केवल अपनी सिफारिशें और जमीनी फीडबैक भेजने का काम कर रही है।
प्रदेश और देश में भाजपा का ग्राफ लगातार गिर रहा है, जिसके चलते अन्य दलों के नेता अब कांग्रेस की ओर रुख कर रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा के कई नेता भी कांग्रेस के संपर्क में हैं। वे पार्टी की विचारधारा और नीतियों से प्रभावित होकर जुड़ना चाहते हैं।
विचारधारा के प्रति निष्ठा का होगा परीक्षण
समिति उन नेताओं पर गंभीरता से विचार कर रही है जो बाहर रहते हुए भी सक्रिय रहे। विशेषकर उन पर जिनका झुकाव हमेशा कांग्रेस की विचारधारा की ओर रहा है।
कई नेताओं ने पार्टी में शामिल होने के लिए प्रदेश और केंद्रीय स्तर पर आवेदन किया है। उनके पिछले कार्यों और पार्टी के प्रति वफादारी की समीक्षा की जा रही है।
हाल के दिनों में मेवाराम जैन, अमीन खान और सुनील परिहार जैसे नेताओं की वापसी हुई है। वीरेंद्र बेनीवाल की वापसी ने भी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरा है।
पार्टी का मानना है कि पुराने अनुभवी नेताओं के लौटने से संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी। इससे आगामी चुनावों में कांग्रेस को जमीनी स्तर पर फायदा होगा।
पंचायत और निकाय चुनाव पर नजर
राजस्थान में आने वाले समय में पंचायत और नगर निकाय चुनाव होने वाले हैं। कांग्रेस इन चुनावों से पहले अपनी पूरी ताकत झोंकना चाहती है।
नेताओं की 'घर वापसी' को इसी चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
संगठन में एकता और मजबूती से ही भाजपा की चुनौतियों का मुकाबला किया जा सकेगा। कांग्रेस नेतृत्व अब किसी भी तरह की गुटबाजी को खत्म करने के मूड में है।
इस अभियान से कार्यकर्ताओं में यह संदेश जाएगा कि पार्टी अपने पुराने साथियों का सम्मान करती है। इससे संगठन के भीतर अनुशासन और विश्वास का माहौल बनेगा।
आने वाले दिनों में कांग्रेस कई बड़े कार्यक्रमों के जरिए जनता के बीच जाएगी। 'घर वापसी' अभियान इस पूरे मास्टरप्लान की एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होने वाला है।
*Edit with Google AI Studio