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राजस्थान

कोटा कांग्रेस में भारी बवाल: राजस्थान: कोटा कांग्रेस की बैठक में हंगामा, धारीवाल और गुंजल समर्थकों के बीच जमकर चले लात-घूंसे

मानवेन्द्र जैतावत

कोटा में कांग्रेस की बैठक के दौरान गुटबाजी खुलकर सामने आई। प्रहलाद गुंजल का नाम न लेने पर कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए और जमकर हाथापाई हुई। वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुए इस हंगामे ने पार्टी की अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया है।

HIGHLIGHTS

  • कोटा कांग्रेस कार्यालय में आयोजित बैठक के दौरान शांति धारीवाल और प्रहलाद गुंजल के समर्थकों के बीच जमकर हाथापाई हुई।
  • हंगामे की मुख्य वजह जिला अध्यक्ष राखी गौतम द्वारा अपने संबोधन में प्रहलाद गुंजल का नाम न लेना बताया जा रहा है।
  • जिला प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज ने पार्टी में गुटबाजी की बात स्वीकार की लेकिन चुनावों में एकजुटता का दावा किया।
  • जिला अध्यक्ष राखी गौतम ने हंगामे को 'चंबल का पानी' बताते हुए कार्यकर्ताओं के जोश का परिणाम करार दिया।
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कोटा | राजस्थान के कोटा जिले में कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सार्वजनिक रूप से सामने आ गई है। शुक्रवार को शहर कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक के दौरान भारी हंगामा और मारपीट देखने को मिली। यह बैठक आगामी राजनीतिक रणनीति और पार्टी की मजबूती पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी, लेकिन यह गुटबाजी की भेंट चढ़ गई। बैठक में वरिष्ठ नेताओं और प्रभारियों की मौजूदगी के बावजूद कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए और मर्यादाएं लांघ दीं।

संबोधन में नाम न लेने पर भड़का विवाद

हंगामे की शुरुआत उस समय हुई जब कोटा संभाग के प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज और नीतीश सुराणा बैठक में पहुंचे। जैसे ही जिला अध्यक्ष राखी गौतम ने अपना संबोधन शुरू किया, हॉल में मौजूद कार्यकर्ताओं के बीच सुगबुगाहट शुरू हो गई। राखी गौतम ने अपने भाषण में पार्टी के कई नेताओं का नाम लिया, लेकिन पूर्व भाजपा नेता और अब कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी प्रहलाद गुंजल का नाम नहीं लिया। इस बात से प्रहलाद गुंजल के समर्थक कार्यकर्ता बेहद नाराज हो गए और उन्होंने तुरंत विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया।

नारेबाजी और हाथापाई का नजारा

गुंजल के समर्थकों ने जिला अध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी शुरू की, जिससे बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया। इसके जवाब में पूर्व मंत्री शांति धारीवाल के समर्थक भी सक्रिय हो गए और अपने नेता के पक्ष में नारे लगाने लगे। देखते ही देखते दोनों गुटों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई जो जल्द ही धक्का-मुक्की में बदल गई। विवाद इतना बढ़ा कि कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर लात और घूंसे चलाने शुरू कर दिए, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई।

बैठक को बीच में ही रोकना पड़ा

हंगामे और हिंसा को देखते हुए वरिष्ठ नेताओं ने बैठक की कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया। प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज और अन्य नेताओं ने कार्यकर्ताओं को शांत करने की काफी कोशिश की लेकिन वे सफल नहीं हो पा रहे थे। काफी देर तक चले ड्रामे के बाद जब पुलिस और वरिष्ठ नेताओं ने हस्तक्षेप किया, तब जाकर मामला थोड़ा शांत हुआ। इस घटना ने पार्टी के भीतर गहरे मतभेदों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

प्रभारी ने स्वीकारी गुटबाजी की बात

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज ने स्वीकार किया कि पार्टी में गुटबाजी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है और यहां अलग-अलग विचारों का होना स्वाभाविक है। भारद्वाज ने आगे कहा कि हमारा मुख्य लक्ष्य सभी को एकजुट करना और आगामी चुनावों में भाजपा को पराजित करना है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को नसीहत दी कि वे अपनी ऊर्जा पार्टी को मजबूत करने में लगाएं।

'चंबल का पानी है' - जिला अध्यक्ष की सफाई

जिला अध्यक्ष राखी गौतम ने अपने ऊपर लगे आरोपों और हंगामे पर सफाई देते हुए एक रोचक तर्क दिया। उन्होंने कहा कि कोटा चंबल का क्षेत्र है और यहां का पानी थोड़ा गर्म है, इसलिए कार्यकर्ताओं में जोश अधिक रहता है। गौतम ने दावा किया कि यह कोई बड़ी गुटबाजी नहीं है, बल्कि कार्यकर्ताओं का अपनी बात रखने का एक तरीका है। उन्होंने यह भी कहा कि इतनी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं का आना पार्टी की मजबूती का संकेत है।

उपस्थित प्रमुख नेता और भविष्य की राह

बैठक में प्रहलाद गुंजल, अमित धारीवाल, अमीन पठान और शहर व देहात अध्यक्ष सहित कई पदाधिकारी मौजूद थे। इन बड़े नेताओं की मौजूदगी में कार्यकर्ताओं का इस तरह भिड़ना पार्टी के अनुशासन पर सवाल खड़े करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कोटा में धारीवाल और गुंजल गुटों के बीच का यह संघर्ष पार्टी के लिए महंगा पड़ सकता है। अब गेंद कांग्रेस आलाकमान के पाले में है कि वे इस गुटबाजी को कैसे शांत करते हैं। आने वाले समय में कोटा कांग्रेस को अपनी एकता साबित करनी होगी, अन्यथा चुनावी नतीजे प्रभावित हो सकते हैं। कार्यकर्ताओं को भी यह समझना होगा कि आपसी लड़ाई से केवल विपक्ष को ही मजबूती मिलती है। पार्टी को अब एक ठोस अनुशासन नीति की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटनाएं दोबारा न हों।

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