thinQ360
thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
राजस्थान

प्राइवेट स्कूलों पर नकेल: राजस्थान में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक: शिक्षा विभाग ने गठित की ब्लॉक स्तरीय टीमें, 15 अप्रैल तक जांच रिपोर्ट अनिवार्य

बलजीत सिंह शेखावत

राजस्थान शिक्षा विभाग ने प्राइवेट स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर डाले जा रहे अतिरिक्त वित्तीय बोझ को रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब ब्लॉक स्तर पर टीमें बनाकर स्कूलों द्वारा विशेष दुकानों से सामान खरीदने के दबाव की जांच की जाएगी।

HIGHLIGHTS

  • राजस्थान शिक्षा विभाग ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए ब्लॉक स्तरीय निगरानी समितियों का गठन किया।
  • निरीक्षण टीमें जांच करेंगी कि स्कूल किसी खास दुकान से यूनिफॉर्म या किताबें खरीदने का दबाव तो नहीं बना रहे।
  • जांच प्रक्रिया 15 अप्रैल तक पूरी करनी होगी और 20 अप्रैल तक विभाग को रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य है।
  • नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ मान्यता रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
rajasthan government action against private schools monopoly uniform books

जयपुर | राजस्थान सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ा है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों द्वारा यूनिफॉर्म और किताबों के नाम पर की जा रही लूट को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद, माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने एक आधिकारिक आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत राज्य के सभी ब्लॉक स्तर पर विशेष निगरानी समितियों का गठन किया गया है।

ब्लॉक स्तर पर होगी सघन जांच

शिक्षा विभाग ने सभी मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (CBEO) को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में तीन सदस्यीय निरीक्षण टीमें बनाएं। ये टीमें सीधे स्कूलों में जाकर जमीनी हकीकत का पता लगाएंगी। इन समितियों का मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से सामान खरीदने के लिए मजबूर न करे। विभाग का उद्देश्य पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करना है।

यूनिफॉर्म और किताबों के सिंडिकेट पर प्रहार

अक्सर देखा गया है कि निजी स्कूल कुछ खास दुकानों के साथ साठगांठ कर लेते हैं। इससे अभिभावकों को बाजार से कहीं अधिक ऊंचे दामों पर किताबें, जूते और यूनिफॉर्म खरीदने पड़ते हैं। अब जांच टीमें स्कूल के रिकॉर्ड और अभिभावकों के फीडबैक के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेंगी। यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करते पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इसमें भारी जुर्माना भी शामिल हो सकता है।

समयसीमा और रिपोर्टिंग की अनिवार्यता

सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक सख्त टाइमलाइन निर्धारित की है। सभी टीमों को 15 अप्रैल तक अपनी जांच पूरी करने का आदेश दिया गया है। इसके बाद 20 अप्रैल तक विभाग को अंतिम रिपोर्ट सौंपनी होगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने स्पष्ट किया है कि पिछले दिशा-निर्देशों की अनदेखी करने वाले स्कूलों को अब बख्शा नहीं जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले संस्थानों की मान्यता तक रद्द करने की सिफारिश की जा सकती है।

अभिभावकों की मांग: केवल कागजी आदेश न रहें

हालांकि सरकार के इस कदम का स्वागत हो रहा है, लेकिन अभिभावक संघों में अभी भी संशय बना हुआ है। उनका मानना है कि ऐसे आदेश पहले भी आए हैं लेकिन सही ढंग से लागू नहीं हुए। अभिभावकों का कहना है कि नियम के अनुसार स्कूल 3 साल में केवल एक बार फीस बढ़ा सकते हैं, लेकिन हर साल भारी वृद्धि की जाती है। वे चाहते हैं कि सरकार फीस वृद्धि पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाए और केवल किताबों तक सीमित न रहे।

सख्त क्रियान्वयन की जरूरत

राजस्थान में शिक्षा विभाग की इस पहल से उम्मीद जगी है कि इस बार स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगेगी। समयबद्ध जांच और जवाबदेही तय होने से व्यवस्था में सुधार की संभावना बढ़ गई है। अब देखना यह होगा कि क्या ये टीमें वास्तव में स्कूलों के सिंडिकेट को तोड़ पाती हैं। अभिभावकों को उम्मीद है कि इस बार आदेश केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेंगे और उन्हें वास्तविक आर्थिक राहत मिलेगी।

शेयर करें:

ताज़ा खबरें