जयपुर | राजस्थान हाईकोर्ट ने जलदाय विभाग द्वारा ठेकेदार के माध्यम से 8,100 रुपए में नल कनेक्शन देने की व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अदालत ने विभाग के 12 फरवरी 2025 के परिपत्र को रद्द कर दिया है।
नल कनेक्शन पर हाईकोर्ट का फैसला: 8100 रुपए में नल कनेक्शन की व्यवस्था रद्द
राजस्थान हाईकोर्ट ने जलदाय विभाग के उस परिपत्र को रद्द कर दिया है जिसके तहत 8100 रुपए में ठेकेदार के माध्यम से नल कनेक्शन देने की व्यवस्था की गई थी।
HIGHLIGHTS
- हाईकोर्ट ने 12 फरवरी 2025 के जलदाय विभाग के परिपत्र को रद्द किया।
- नियमों में बदलाव के लिए अधिसूचना जारी करना विधिक रूप से अनिवार्य।
- रुपए में ठेकेदार के जरिए नल कनेक्शन की व्यवस्था अब समाप्त।
- पीएचईडी कॉन्ट्रेक्टर कल्याण समिति की याचिका पर कोर्ट ने दिया आदेश।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजस्थान वाटर सप्लायर नियम, 1967 में किसी भी प्रकार के संशोधन के लिए अधिसूचना जारी करना विधिक रूप से अनिवार्य है। इसे केवल कार्यालय आदेश या परिपत्र के जरिए नहीं बदला जा सकता।
विधिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य
न्यायाधीश शुभा मेहता ने पीएचईडी कॉन्ट्रेक्टर कल्याण समिति की याचिका पर यह महत्वपूर्ण आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि अधिसूचना के जरिए नियम जारी करना एक विधिक प्रक्रिया है।
ऐसे नियमों में प्रशासनिक आदेश या परिपत्र के माध्यम से बदलाव नहीं किया जा सकता। कोर्ट के अनुसार, 12 फरवरी 2025 के परिपत्र से नल कनेक्शन की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई थी।
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परिपत्र के जरिए बदलाव को बताया अवैध
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी विधिक नियम को केवल कार्यालय आदेश या प्रशासनिक परिपत्र के जरिए नहीं बदला जा सकता। इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रक्रिया को सरल बनाने और लोगों को सुविधा देने के नाम पर नियमों में प्रशासनिक आदेश के जरिए बदलाव नहीं किया जा सकता। प्रशासनिक आदेश कभी भी वैधानिक अधिसूचना का स्थान नहीं ले सकते।
नल कनेक्शन की प्रभावित प्रक्रिया
12 फरवरी के परिपत्र के जरिए नल कनेक्शन की पूरी प्रक्रिया में बदलाव किया गया था। इसमें निम्नलिखित कार्य शामिल थे:
- प्लंबिंग और पाइप फिटिंग का कार्य।
- जल मीटर की स्थापना और जांच।
- सड़क कटिंग और उसकी मरम्मत का कार्य।
- नल कनेक्शन से जुड़े अन्य तकनीकी कार्य।
कोर्ट ने माना कि इन संशोधनों से पूरी व्यवस्था प्रभावित हुई थी। याचिकाकर्ता पक्ष ने तर्क दिया कि इस व्यवस्था से सरकार को राजस्व का नुकसान होगा।
शुल्क निर्धारण और राजस्व हानि का तर्क
याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता बाबूलाल गुप्ता और अंकुल गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने नियमों में संशोधन कर नल कनेक्शन के लिए 8100 रुपए शुल्क तय किया था।
इसके तहत ठेकेदार लाइसेंसी प्लंबरों के माध्यम से यह कार्य करवाते। मामले में सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने परिपत्र के जरिए किए गए नियम संशोधन को पूरी तरह रद्द कर दिया।
विभाग के भविष्य के निर्णय पर संशय
हाईकोर्ट के आदेश के बाद 8100 रुपए में ठेकेदार के माध्यम से नल कनेक्शन देने की व्यवस्था फिलहाल समाप्त हो गई है। हालांकि, जलदाय विभाग ने अभी नई व्यवस्था को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया है।
फिलहाल विभाग में निम्नलिखित बिंदुओं पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है:
- क्या पुरानी एल फॉर्म व्यवस्था फिर से शुरू होगी?
- क्या कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की जाएगी?
- नल कनेक्शन के लिए नई विधिक अधिसूचना कब जारी होगी?
जलदाय विभाग ने अभी तक हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने या नई व्यवस्था लागू करने को लेकर कोई आधिकारिक फैसला नहीं किया है।
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