जयपुर | राजस्थान सरकार के बाल अधिकारिता विभाग ने प्रदेश में किशोर न्याय प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है। विभाग ने किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के तहत राज्य स्तरीय चयन समिति का पुनर्गठन किया है।
इस नई समिति का मुख्य उद्देश्य राज्य में बालकों की देखरेख, संरक्षण और उनके पुनर्वास से संबंधित महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं का पारदर्शी संचालन सुनिश्चित करना है। यह कदम बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया है।
राजस्थान किशोर न्याय समिति गठन: राजस्थान: राज्य स्तरीय किशोर न्याय चयन समिति का गठन, प्रजना फाउंडेशन की प्रीति शर्मा बनीं सदस्य
राजस्थान सरकार ने किशोर न्याय अधिनियम के तहत नई राज्य स्तरीय चयन समिति की घोषणा की है। इसमें प्रजना फाउंडेशन की प्रीति शर्मा सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान सरकार ने किशोर न्याय अधिनियम के तहत नई राज्य स्तरीय चयन समिति का गठन किया है।
- सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रकाश गुप्ता को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
- प्रजना फाउंडेशन की श्रीमती प्रीति शर्मा को स्वयंसेवी संस्था प्रतिनिधि के रूप में चुना गया।
- समिति में शिक्षा, न्याय और सामाजिक क्षेत्र के कुल 7 सदस्यों को शामिल किया गया है।
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समिति का कानूनी आधार और संरचना
बाल अधिकारिता विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस समिति का गठन किशोर न्याय आदर्श नियम, 2016 के नियम 87(1) के तहत किया गया है। यह नियम राज्य सरकारों को चयन प्रक्रिया के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने का अधिकार देता है।
समिति की अध्यक्षता का दायित्व राजस्थान उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, माननीय श्री प्रकाश गुप्ता को सौंपा गया है। उनकी कानूनी विशेषज्ञता समिति के निर्णयों को न्यायिक गरिमा और स्पष्टता प्रदान करेगी।
शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व
समिति में शैक्षणिक जगत से दो प्रमुख विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। राजस्थान विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ. रोहित कुमार जैन और डॉ. मीना रानी को सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। उनकी उपस्थिति से नीतिगत निर्णयों में शैक्षणिक दृष्टिकोण शामिल होगा।
स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) के कोटे से प्रजना फाउंडेशन की श्रीमती प्रीति शर्मा को सदस्य मनोनीत किया गया है। प्रीति शर्मा लंबे समय से बाल कल्याण के क्षेत्र में सक्रिय हैं और उनका अनुभव समिति के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।
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अन्य प्रमुख सदस्य और उनकी भूमिका
प्रीति शर्मा के साथ ही समरस भारत सेवा संस्थान, जयपुर की श्रीमती सुमन सिंह को भी स्वयंसेवी संस्थान प्रतिनिधि के रूप में शामिल किया गया है। यह जमीनी स्तर पर काम करने वाली संस्थाओं के अनुभव को समिति से जोड़ने का प्रयास है।
समिति में राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के एक प्रतिनिधि को भी सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा, बाल अधिकारिता विभाग के आयुक्त इस महत्वपूर्ण समिति के सदस्य-सचिव के रूप में अपनी सेवाएं देंगे।
बाल कल्याण की दिशा में बड़ा कदम
इस 7 सदस्यीय समिति का गठन यह दर्शाता है कि राजस्थान सरकार बाल अधिकारों के प्रति कितनी गंभीर है। समिति में न्यायपालिका, शिक्षा और सामाजिक कार्य के विशेषज्ञों का संतुलन बनाया गया है।
यह टीम अब राज्य में बाल कल्याण समितियों और किशोर न्याय बोर्डों के सदस्यों के चयन एवं अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यों की निगरानी करेगी। इससे पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रजना फाउंडेशन जैसी सक्रिय संस्थाओं की भागीदारी से राज्य में बच्चों के पुनर्वास के कार्यों में तेजी आएगी। यह समिति अगले तीन वर्षों के लिए बाल संरक्षण की दिशा में मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगी।
मानसरोवर, जयपुर स्थित बाल अधिकारिता विभाग के मुख्यालय से जारी इस आदेश ने राज्य के सामाजिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी है। विभाग का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर बच्चा सुरक्षित वातावरण में विकसित हो सके।
इस समिति के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी या अनियमितता न हो। यह राजस्थान की बाल कल्याण नीतियों को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने का एक प्रयास है।
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