जयपुर | राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव समय पर नहीं होने के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। हाईकोर्ट द्वारा 15 अप्रैल तक चुनाव नहीं कराने पर जारी अवमानना नोटिस के बाद राज्य निर्वाचन आयोग अपना पक्ष रखने की तैयारी में है। आयोग न्यायालय में यह स्पष्ट करने जा रहा है कि चुनाव कार्यक्रम में देरी के पीछे मुख्य कारण राज्य सरकार से जरूरी सूचनाएं नहीं मिलना है। आयोग ने इस संबंध में सरकार के साथ हुए पत्राचार का पूरा ब्यौरा तैयार किया है।
निकाय चुनाव: आयोग का सरकार पर वार: पंचायत और निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, निर्वाचन आयोग ने राज्य सरकार की सुस्ती को ठहराया जिम्मेदार
राज्य निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट की अवमानना नोटिस का जवाब तैयार कर लिया है, जिसमें चुनाव में देरी के लिए सरकार द्वारा समय पर सूचना न देने को मुख्य कारण बताया गया है।
HIGHLIGHTS
- आयोग ने हाईकोर्ट में सरकार के साथ हुए पत्राचार को आधार बनाकर अपना पक्ष रखने की तैयारी की है।
- मार्च के पहले सप्ताह में चुनाव घोषणा की योजना थी, लेकिन सरकारी सूचनाओं के अभाव में प्रक्रिया रुकी।
- 31 दिसंबर 2025 को परिसीमन के बाद भी आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं करने पर आयोग ने सरकार को चेताया था।
- नगरीय निकायों की मतदाता सूची अब मई 2026 तक जारी होगी, जिससे चुनाव कार्यक्रम में और देरी संभव है।
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मार्च में होनी थी चुनाव की घोषणा
सूत्रों के अनुसार, निर्वाचन आयोग मार्च के पहले सप्ताह में ही चुनाव की घोषणा करने की पूरी तैयारी कर चुका था। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से आरक्षण और अन्य प्रशासनिक सूचनाएं साझा नहीं की गईं, जिससे पूरी प्रक्रिया अटक गई। पंचायती राज संस्थाओं का परिसीमन 31 दिसंबर 2025 को ही पूरा कर लिया गया था। इसके बाद 25 फरवरी 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन भी हो चुका था, लेकिन आरक्षण का पेंच अब भी फंसा हुआ है।
आरक्षण निर्धारण में सरकारी सुस्ती
मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद सरकार को एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षण की स्थिति स्पष्ट करनी थी। आरक्षण तय होने के बाद ही आयोग चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता था, लेकिन सरकार ने इस पर चुप्पी साधे रखी। आयोग ने 9 मार्च को पंचायती राज सचिव को पत्र लिखकर चेताया था कि यदि देरी हुई तो अवमानना की जिम्मेदारी सरकार की होगी। इसके जवाब में 31 मार्च को सरकार ने केवल यह कहा कि आरक्षण की प्रक्रिया अभी जारी है।
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पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल बढ़ा
इसी बीच सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया, जिससे चुनाव प्रक्रिया और भी अनिश्चित हो गई। नगरीय निकाय चुनावों को लेकर भी स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। आयोग ने दिसंबर 2025 में ही सरकार से पूछा था कि जिन निकायों का परिसीमन निरस्त हुआ है, वहां चुनाव किस आधार पर होंगे। सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब न मिलने पर आयोग ने एकतरफा कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
नया मतदाता सूची कार्यक्रम
आयोग ने अब 196 निकायों के लिए अलग से मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम जारी किया है, जिसकी अंतिम सूची 22 अप्रैल को आएगी। वहीं 113 अन्य निकायों के लिए अंतिम सूची 8 मई 2026 को जारी की जाएगी। इन परिस्थितियों को देखते हुए स्पष्ट है कि अब चुनाव प्रक्रिया काफी लंबी खिंच सकती है। आयोग हाईकोर्ट में इन्हीं तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं का हवाला देकर खुद को अवमानना की कार्रवाई से बचाने का प्रयास करेगा।
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