सीकर | राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में लग्जरी कारों के नाम पर करोड़ों रुपये का बीमा क्लेम हड़पने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। सीबीआई की जांच में सामने आया है कि पिछले चार सालों से मर्सिडीज और फॉर्च्यूनर जैसी महंगी गाड़ियों के फर्जी एक्सीडेंट दिखाकर बीमा राशि डकारी जा रही थी।
राजस्थान लग्जरी कार बीमा घोटाला: राजस्थान: 48 लग्जरी कारों का फर्जी एक्सीडेंट, CBI की FIR
राजस्थान में करोड़ों का कार बीमा घोटाला, CBI ने 17 पर की FIR।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान के सीकर और चूरू में 48 लग्जरी कारों का फर्जी एक्सीडेंट दिखाकर करोड़ों का बीमा क्लेम उठाया गया।
- सीबीआई ने इस मामले में न्यू इंडिया एश्योरेंस के अधिकारियों सहित 17 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
- वर्कशॉप में सर्विस के लिए आने वाली मर्सिडीज और फॉर्च्यूनर जैसी कारों को निशाना बनाकर फर्जी कागजात तैयार किए जाते थे।
- बीमा कंपनी की ऑडिट में खुलासा हुआ कि एक ही कार का साल में तीन-तीन बार एक्सीडेंट दिखाकर क्लेम लिया गया।
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इस पूरे खेल में बीमा कंपनी के छोटे कर्मचारियों से लेकर बड़े अधिकारियों तक की मिलीभगत सामने आई है।
सीबीआई ने हाल ही में इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं।
कैसे हुआ इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश?
इस घोटाले की शुरुआत तब हुई जब बीमा कंपनी को अपने ही दफ्तरों से होने वाले क्लेम भुगतानों पर संदेह हुआ।
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सीबीआई को खुफिया जानकारी मिली थी कि सीकर, चूरू और नागौर जैसे इलाकों में वाहनों पर फर्जी क्लेम उठाए जा रहे हैं।
इसके बाद सीबीआई ने राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाया।
1 सितंबर 2025 को सीबीआई और एसीबी की टीमों ने सीकर में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के दफ्तर पर छापा मारा।
जांच के दौरान टीम सुजानगढ़ में इंश्योरेंस सर्वेयर प्रतीक चोटिया के घर भी पहुंची और घंटों पूछताछ की।
सीबीआई की शुरुआती जांच में पाया गया कि 2019 से 2022 के बीच यह गोरखधंधा चरम पर था।
वर्कशॉप से शुरू होता था धोखाधड़ी का जाल
यह गिरोह उन गाड़ियों को अपना निशाना बनाता था जो सर्विस या छोटे-मोटे काम के लिए वर्कशॉप में आती थीं।
खासकर मर्सिडीज, फॉर्च्यूनर और अन्य लग्जरी कारों पर इस गिरोह की पैनी नजर रहती थी।
वर्कशॉप के मैनेजर और कर्मचारी उन गाड़ियों की पहचान करते थे जो पहले से डैमेज किसी अन्य कार से मेल खाती हों।
जैसे ही कोई लग्जरी कार वर्कशॉप पहुंचती, उसकी पूरी डिटेल बीमा कंपनी के भ्रष्ट अधिकारियों को भेज दी जाती थी।
इसके बाद उस कार का फर्जी एक्सीडेंट दिखाया जाता और कागजों में असली मालिक की जगह डमी मालिक खड़ा कर दिया जाता।
असली मालिक को इस बात की कानों-कान भनक भी नहीं लगती थी कि उसकी कार के नाम पर लाखों का क्लेम पास हो चुका है।
केस स्टडी 1: चूरू की सुपर लग्जरी कार का खेल
चूरू में मार्च 2022 में एक व्यक्ति ने अपनी बेहद महंगी लग्जरी कार को सर्विस के लिए श्री गंगा व्हीकल्स वर्कशॉप पर भेजा।
वर्कशॉप के इंचार्ज ने गाड़ी देखते ही फर्जी क्लेम का ताना-बाना बुन लिया और बीमा अधिकारियों से संपर्क साधा।
अगले ही दिन गाड़ी का फर्जी एक्सीडेंट दिखाया गया और क्लेम के कागजों में पवन जांगिड़ नाम के व्यक्ति को मालिक बताया गया।
आरोपियों ने कागजों में मोबाइल नंबर और बैंक खाते की जानकारी भी बदल दी ताकि ओटीपी उनके पास ही आए।
महज कुछ ही दिनों के भीतर 6 लाख 17 हजार रुपये का क्लेम पवन जांगिड़ के खाते में जमा हो गया।
बाद में इस राशि को गिरोह के सदस्यों ने आपस में बंदरबांट कर लिया और असली मालिक को कुछ पता नहीं चला।
केस स्टडी 2: नई फॉर्च्यूनर और सुमीता का खाता
सीकर की श्री कृष्ण फोरव्हील्स वर्कशॉप पर सितंबर 2020 में एक ब्रांड न्यू फॉर्च्यूनर कार सर्विस के लिए आई थी।
वर्कशॉप मैनेजर और बीमा अधिकारियों ने मिलकर इस गाड़ी का भी फर्जी एक्सीडेंट क्लेम फाइल कर दिया।
इस बार सुमीता नाम की एक महिला को गाड़ी का फर्जी मालिक बनाकर उसके दस्तावेज पेश किए गए।
क्लेम फॉर्म में सुमीता का मोबाइल नंबर और बैंक चेक लगाया गया ताकि पैसा सीधे उसी के पास पहुंचे।
बीमा कंपनी ने बिना किसी भौतिक सत्यापन के 5 लाख 85 हजार रुपये का क्लेम सुमीता के खाते में ट्रांसफर कर दिया।
सीबीआई की जांच में ऐसे कई और मामले सामने आए हैं जहाँ महिलाओं के नाम पर भी क्लेम उठाए गए।
मास्टरमाइंड की चालाकी: डैमेज फोटो का खेल
आरोपी इतने शातिर थे कि वे लग्जरी गाड़ियों की फुल डैमेज वाली फोटो बड़ी चालाकी से अपलोड करते थे।
वे उन फोटो का इस्तेमाल करते थे जो किसी पुरानी दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी की होती थीं और उन्हें नई गाड़ी से जोड़ देते थे।
इससे बीमा कंपनी के सिस्टम में असली और नकली गाड़ी की पहचान करना लगभग नामुमकिन हो जाता था।
इसके अलावा, बीमा क्लेम के लिए जरूरी ओटीपी भी डमी मालिकों के फोन पर ही मंगाए जाते थे।
बीमा कंपनी के अधिकारियों ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए इन फर्जी फाइलों को तुरंत अप्रूव किया।
सीकर दफ्तर के कई बड़े अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया को वेरिफाई करने में शामिल पाए गए हैं।
म्यूल अकाउंट्स और साइबर ठगी का कनेक्शन
सीबीआई को संदेह है कि क्लेम की राशि को ठिकाने लगाने के लिए 'म्यूल अकाउंट्स' का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ।
म्यूल अकाउंट वे खाते होते हैं जो किसी गरीब या अनजान व्यक्ति के नाम पर लालच देकर खुलवाए जाते हैं।
साइबर अपराधी अक्सर पकड़े जाने से बचने के लिए इन खातों का उपयोग पैसों के ट्रांजेक्शन के लिए करते हैं।
इस मामले में भी क्लेम का पैसा इन खातों में डाला गया और फिर वहां से नकद निकालकर आपस में बांट लिया गया।
सीबीआई अब उन बैंक खातों की कुंडली खंगाल रही है जिनमें यह करोड़ों की राशि ट्रांसफर की गई थी।
जांच एजेंसी को अंदेशा है कि इस घोटाले की जड़ें राजस्थान के बाहर भी फैली हो सकती हैं।
ऑडिट में कैसे पकड़ी गई करोड़ों की चोरी?
यह खेल लगातार चार सालों तक चलता रहा, लेकिन एक आंतरिक ऑडिट ने इस गिरोह की पोल खोल दी।
ऑडिट के दौरान देखा गया कि कुछ खास लग्जरी कारें एक ही साल में तीन-तीन बार भीषण दुर्घटना का शिकार हुई हैं।
एक ही कार पर बार-बार फुल क्लेम का भुगतान किया जाना बीमा कंपनी के नियमों के खिलाफ और संदेहास्पद था।
जब इन गाड़ियों के रिकॉर्ड की भौतिक जांच की गई, तो पता चला कि वे गाड़ियां कभी दुर्घटनाग्रस्त हुई ही नहीं थीं।
इसके बाद मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचा और अंततः सीबीआई को जांच सौंपी गई।
सीबीआई ने पाया कि कुल 48 कारों के नाम पर 1 करोड़ 23 लाख रुपये से अधिक का फर्जीवाड़ा किया गया है।
नामजद आरोपी: कौन-कौन शामिल है इस लिस्ट में?
सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर में न्यू इंडिया एश्योरेंस के कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल हैं।
इनमें दो सीनियर डिविजनल मैनेजर, एक मैनेजर और एक डिप्टी मैनेजर को मुख्य आरोपी बनाया गया है।
इसके साथ ही चार असिस्टेंट मैनेजर, तीन प्रशासनिक अधिकारी और एक सीनियर असिस्टेंट भी जांच के घेरे में हैं।
सभी आरोपी उस समय न्यू इंडिया एश्योरेंस के सीकर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में तैनात थे।
दो सर्वेयर और कार वर्कशॉप के जनरल मैनेजर व इंचार्ज को भी इस साजिश का हिस्सा माना गया है।
सीबीआई सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां भी संभव हैं।
भ्रष्टाचार और आम जनता पर इसका असर
बीमा क्षेत्र में इस तरह के संगठित अपराध न केवल कंपनी को वित्तीय नुकसान पहुँचाते हैं, बल्कि आम ग्राहकों के प्रीमियम पर भी बोझ डालते हैं।
इस घोटाले ने बीमा कंपनियों की आंतरिक सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
अगर वर्कशॉप और बीमा अधिकारी ही आपस में मिल जाएं, तो आम आदमी का सिस्टम पर भरोसा कम हो जाता है।
राजस्थान पुलिस और एसीबी भी अब इस मामले में सीबीआई को हर संभव तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है।
सीबीआई अब उन 48 लग्जरी कारों के असली मालिकों से भी पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।
यह जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि क्या वर्कशॉप में कारों के स्पेयर पार्ट्स के साथ भी कोई छेड़छाड़ की गई थी।
निष्कर्ष: सख्त कार्रवाई की उम्मीद
राजस्थान का यह लग्जरी कार बीमा घोटाला भ्रष्टाचार के एक नए और खतरनाक स्वरूप को उजागर करता है। सीबीआई की एफआईआर के बाद अब आरोपियों पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया है, जिससे भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी पर लगाम लगने की उम्मीद है।
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