जयपुर | राजस्थान में जल संकट एक गंभीर चुनौती है और इससे निपटने के लिए भजनलाल सरकार ने मिशन मोड पर काम शुरू कर दिया है। हाल ही में जयपुर के पंत कृषि भवन में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 को लेकर एक महत्वपूर्ण सीएसआर कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला को संबोधित करते हुए शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने जल संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि हमें जल स्वावलंबन अभियान के मूल उद्देश्य को गहराई से समझना होगा और उसे धरातल पर उतारना होगा। मंत्री दिलावर ने प्रदेश में गिरते भूजल स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि केवल कागजों पर योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जल दोहन को नियंत्रित करना और वॉटर रिचार्ज पर प्रभावी ढंग से काम करना अनिवार्य है।
जल स्वावलंबन 2.0: मदन दिलावर का बड़ा कदम: मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0: मंत्री मदन दिलावर ने दिया भूजल स्तर सुधारने और जल संरक्षण का मंत्र, CSR भागीदारी पर जोर
राजस्थान में जल संकट से निपटने के लिए मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के तहत जयपुर में सीएसआर कार्यशाला आयोजित की गई। मंत्री मदन दिलावर ने जल पुनर्भरण, वृक्षारोपण और गौवंश संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
HIGHLIGHTS
- मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के तहत जयपुर में सीएसआर कार्यशाला का आयोजन किया गया।
- मंत्री मदन दिलावर ने विलुप्त नदियों को पुनर्जीवित करने और जल पुनर्भरण पर विशेष जोर दिया।
- प्रत्येक ग्राम पंचायत में गौवंश संरक्षण के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए गए।
- सीएसआर के माध्यम से लगभग 140 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की प्रतिबद्धता प्राप्त हुई है।
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जल संरक्षण के लिए व्यापक रणनीति
मंत्री ने बताया कि जल स्तर को सुधारने के लिए हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना होगा। इसके लिए प्रदेश भर में व्यापक स्तर पर पौधारोपण और चारागाह विकास जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि मिट्टी की नमी बनी रहे। अभियान के तहत गांवों में तालाबों और एनीकेट (छोटे बांधों) का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही, जो नदियां समय के साथ विलुप्त हो चुकी हैं, उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए आधुनिक और पारंपरिक दोनों तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। दिलावर ने जोर दिया कि प्राकृतिक जल मार्गों में जो भी अतिक्रमण या बाधाएं आई हैं, उन्हें तुरंत हटाया जाए। जब तक वर्षा जल का प्राकृतिक प्रवाह बहाल नहीं होगा, तब तक जल संचयन के बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करना संभव नहीं होगा।
गौवंश संरक्षण और पॉलीथीन मुक्त संकल्प
कार्यशाला के दौरान मंत्री ने एक और महत्वपूर्ण सामाजिक पहलू पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने प्रत्येक ग्राम पंचायत में गौवंश के संरक्षण के लिए एक ठोस और प्रभावी कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। पर्यावरण की रक्षा के लिए उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित सभी अधिकारियों और प्रतिनिधियों को पॉलीथीन का इस्तेमाल न करने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि जल और जमीन को बचाने के लिए हमें प्लास्टिक मुक्त जीवन शैली को अपनाना ही होगा। मंत्री ने डार्क जोन के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए डेटा-आधारित समाधानों पर चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में पानी की स्थिति बेहद चिंताजनक है, वहां प्राथमिकता के आधार पर जल पुनर्भरण के ढांचे तैयार किए जाएं।
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जनभागीदारी और सीएसआर का संगम
पंचायत राज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी ने भी कार्यशाला में अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान एक जन आंदोलन है। बहते हुए वर्षा जल को रोकना और उसे सहेजना ही इस योजना की असली सफलता है। देवासी ने सिरोही जिले का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे वहां वर्षा जल संचयन के कारण धरातल जल स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने जनभागीदारी को इस अभियान की सफलता का सबसे बड़ा आधार बताया और इसे सामूहिक जिम्मेदारी कहा।
140 करोड़ के विकास कार्यों पर चर्चा
कार्यशाला में सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) की भूमिका पर विस्तार से मंथन हुआ। शासन सचिव डॉ. जोगाराम ने बताया कि सरकार जल संरक्षण के लिए निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम कर रही है, जिससे विकास कार्यों को नई गति मिल रही है। 1 दिसंबर 2025 को आयोजित होने वाली सीएसआर कॉन्फ्रेंस की समीक्षा के दौरान बताया गया कि अब तक लगभग 140 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के लिए प्रतिबद्धताएं प्राप्त हो चुकी हैं। यह राशि जल संचयन और ग्रामीण विकास में खर्च की जाएगी। इस अवसर पर विभिन्न संस्थाओं के साथ एमओयू (MoU) भी संपन्न किए गए। जल ग्रहण विकास विभाग की निदेशक कल्पना अग्रवाल ने आगामी योजनाओं की जानकारी दी। एनजीओ और सीएसआर प्रतिनिधियों ने भी जल संरक्षण के लिए कई नवाचार आधारित सुझाव प्रस्तुत किए।
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