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राजस्थान बिजली टैरिफ: क्या सस्ता, क्या महंगा?: राजस्थान में बिजली की नई दरें जारी: EV चार्जिंग हुई सस्ती, घरेलू उपभोक्ताओं को राहत और उद्योगों को मिली बड़ी छूट

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

राजस्थान विद्युत नियामक आयोग ने साल 2026-27 के लिए नया टैरिफ जारी कर दिया है। इसमें घरेलू बिजली दरों को स्थिर रखा गया है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए फिक्स चार्ज खत्म कर दिए गए हैं।

HIGHLIGHTS

  • घरेलू उपभोक्ताओं की बेसिक बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।
  • EV चार्जिंग स्टेशनों पर लगने वाला 150 रुपये का फिक्स चार्ज अब पूरी तरह खत्म।
  • मध्यम उद्योगों के लिए बिजली दर 6.30 रुपये से घटाकर 6.00 रुपये की गई।
  • स्ट्रीट लाइट को टाइम ऑफ डे (ToD) चार्ज से पूरी तरह मुक्त रखा गया है।
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जयपुर | राजस्थान विद्युत नियामक आयोग (RERC) ने प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए साल 2026-27 का नया टैरिफ ऑर्डर जारी कर दिया है। यह आदेश जयपुर, अजमेर और जोधपुर तीनों डिस्कॉम पर लागू होगा। आयोग ने इस बार मध्यम वर्ग और घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए बेसिक बिजली दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि, बिजली कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए कुछ सरचार्ज जारी रहेंगे।

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर

घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर यह है कि उनके प्रति यूनिट रेट में कोई इजाफा नहीं किया गया है। 50 यूनिट तक की खपत पर 4.75 रुपये प्रति यूनिट की दर ही लागू रहेगी। वहीं, 50 से 150 यूनिट तक 6 रुपये और 150 से 500 यूनिट तक 7 रुपये प्रति यूनिट का चार्ज लगेगा। 500 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करने वालों को 7.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना होगा। फिक्स्ड चार्ज में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम आदमी के मासिक बजट पर सीधा बोझ नहीं पड़ेगा। हालांकि, रेगुलेटरी सरचार्ज का भुगतान पहले की तरह करना होगा।

EV चार्जिंग हुई अब और भी सस्ती

राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब EV चार्जिंग स्टेशनों पर लगने वाले फिक्स चार्ज को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। अब तक इन स्टेशनों को 150 रुपये प्रति केवीए तक का फिक्स चार्ज देना पड़ता था। इस फैसले से चार्जिंग स्टेशनों की संचालन लागत कम होगी, जिसका सीधा फायदा इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को मिलेगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग के लिए बिजली की दर 6 रुपये प्रति यूनिट तय की गई है। फिक्स चार्ज हटने से अब प्रदेश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार होने की उम्मीद जताई जा रही है।

उद्योगों के लिए बड़ी सौगात

मध्यम श्रेणी के उद्योगों (Medium Industry) के लिए बिजली दरों में 30 पैसे प्रति यूनिट की कटौती की गई है। पहले यह दर 6.30 रुपये थी, जिसे अब घटाकर 6 रुपये कर दिया गया है। लार्ज इंडस्ट्री के लिए दरें 6.50 रुपये प्रति यूनिट और फिक्स्ड चार्ज 380 रुपये प्रति केवीए रखा गया है। लघु उद्योगों के लिए भी 6 रुपये प्रति यूनिट की दर को बरकरार रखा गया है। इन बदलावों से राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी और उत्पादन लागत में कमी आएगी। उद्योगों को अन्य छूटों का लाभ भी पहले की तरह मिलता रहेगा।

टाइम ऑफ डे (ToD) के नए नियम

आयोग ने 10 किलोवॉट से अधिक लोड वाले उपभोक्ताओं के लिए टाइम ऑफ डे (ToD) चार्जिंग व्यवस्था लागू रखी है। इसके तहत दिन के अलग-अलग समय पर बिजली की दरें अलग होंगी। सुबह 6 से 8 बजे के बीच बिजली इस्तेमाल करने पर 5% अतिरिक्त चार्ज देना होगा। वहीं, दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बिजली खर्च करने पर बिल में 10% की बड़ी छूट मिलेगी। शाम 6 से रात 10 बजे तक, जब बिजली की मांग सबसे अधिक होती है, तब उपभोक्ताओं को 10% अतिरिक्त चार्ज देना होगा। यह व्यवस्था ग्रिड पर लोड कम करने के लिए की गई है।

स्ट्रीट लाइट और निकायों को राहत

नगरीय निकायों को बड़ी राहत देते हुए स्ट्रीट लाइट कनेक्शनों को ToD नियमों से बाहर कर दिया गया है। इससे नगर निगमों और नगर पालिकाओं के बिजली बिल में कमी आने की संभावना है। इसके अलावा, ट्रांसफार्मर शिफ्टिंग के नियमों में भी ढील दी गई है। अब उपभोक्ता अपनी सप्लाई को HT से LT पर तीन बार शिफ्ट करवा सकेंगे, जिसकी सीमा पहले केवल दो बार थी।

सरचार्ज और अतिरिक्त शुल्क का गणित

भले ही बेसिक रेट नहीं बढ़े हैं, लेकिन रेगुलेटरी सरचार्ज जारी रहेगा। 100 यूनिट तक खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं पर 0.70 रुपये और अन्य पर 1 रुपये प्रति यूनिट का अतिरिक्त चार्ज लगेगा। ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं के लिए क्रॉस सब्सिडी सरचार्ज 1.48 रुपये प्रति यूनिट तय किया गया है। साथ ही, 0.50 रुपये प्रति यूनिट का एडिशनल सरचार्ज भी देय होगा। ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए जो उपभोक्ता हरित ऊर्जा का विकल्प चुनेंगे, उन्हें सामान्य दर से 0.05 रुपये प्रति यूनिट अधिक भुगतान करना होगा। यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक कदम है।

डिस्कॉम के घाटे पर आयोग की सख्ती

आयोग ने बिजली कंपनियों (डिस्कॉम) के बढ़ते घाटे पर चिंता जताई है। आयोग ने निर्देश दिया है कि डिस्कॉम का पुराना घाटा अगले 7 वर्षों के भीतर खत्म किया जाना चाहिए। इसके लिए एक सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम बनाने की सलाह दी गई है। सरचार्ज से होने वाली कमाई का इस्तेमाल केवल और केवल घाटा कम करने और वित्तीय स्थिति सुधारने में किया जाएगा। आयोग ने सरकार को समय पर सब्सिडी देने और उदय (UDAY) लोन के ब्याज को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने को भी कहा है। जोधपुर डिस्कॉम को विशेष वित्तीय मदद की सिफारिश की गई है।

सोलर और डिजिटल स्किल्स पर जोर

रूफटॉप सोलर उपभोक्ताओं के लिए नेट बिलिंग व्यवस्था को जारी रखा गया है। इससे सौर ऊर्जा अपनाने वाले घरों और संस्थानों को अपनी बचत जारी रखने में मदद मिलेगी। आयोग ने पावर सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के डिजिटल स्किल डेवलपमेंट और सुरक्षा नियमों के कड़ाई से पालन पर भी जोर दिया है ताकि तकनीकी नुकसान को कम किया जा सके। कुल मिलाकर, यह नया टैरिफ संतुलित नजर आ रहा है। जहां एक ओर आम आदमी और उद्योगों को राहत दी गई है, वहीं डिस्कॉम को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने का रोडमैप भी तैयार किया गया है।

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