जयपुर | राजस्थान में 1 जून से कई महत्वपूर्ण नियम बदल गए हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ेगा। सरकार ने परिवहन विभाग, जन आधार और गैस सिलेंडर की कीमतों से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं, जिससे कई प्रक्रियाएं अब डिजिटल हो गई हैं।
राजस्थान में नए नियम!: राजस्थान में 1 जून से बदले नियम, जानें क्या हुआ सस्ता-महंगा
परिवहन सेवा ऑनलाइन, जन आधार नियम सख्त और कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा। जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर।
HIGHLIGHTS
- परिवहन विभाग की 58 सेवाएं पूरी तरह से ऑनलाइन हो गईं।
- कमर्शियल गैस सिलेंडर 42 रुपये महंगा हो गया है।
- जन आधार कार्ड में बार-बार बदलाव पर अब शुल्क लगेगा।
- नागरिक अब सीधे सिटीजन पोर्टल से आवेदन कर सकेंगे।
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परिवहन विभाग हुआ डिजिटल
सबसे बड़ा बदलाव परिवहन विभाग में हुआ है, जहां अब 'इनवर्ड' व्यवस्था खत्म कर दी गई है। अब नागरिक सीधे सिटीजन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे, जिससे उन्हें दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
विभाग की कुल 58 सेवाएं ऑनलाइन कर दी गई हैं। इनमें से 26 सेवाएं सिटीजन पोर्टल और 32 सेवाएं सारथी पोर्टल पर उपलब्ध होंगी। लाइसेंस और वाहन संबंधी कामों के लिए अब ऑनलाइन आवेदन ही मान्य होगा।
इस नई व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और हर आवेदन का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। लोग ई-मित्र केंद्रों के जरिए भी आवेदन कर सकते हैं और अपने आवेदन की स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक कर सकते हैं।
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महंगाई का झटका: गैस सिलेंडर के बढ़े दाम
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 42 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट जैसे व्यवसायों की लागत बढ़ेगी। इसका असर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम परिवारों को राहत मिली है। लेकिन पांच किलो वाले सिलेंडर के रिफिल और कनेक्शन शुल्क में भी बढ़ोतरी हुई है।
जन आधार नियमों में सख्ती
जन आधार कार्ड में अब बार-बार जानकारी बदलना आसान नहीं होगा। सरकार ने नाम, वैवाहिक स्थिति और पारिवारिक जानकारी में बदलाव की सीमा तय कर दी है।
पहला बदलाव मुफ्त होगा, लेकिन उसके बाद हर संशोधन के लिए एक निर्धारित शुल्क देना होगा। यह कदम डेटा में सटीकता बनाए रखने और बार-बार होने वाले बदलावों को रोकने के लिए उठाया गया है।
कुल मिलाकर, ये बदलाव राजस्थान को डिजिटल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं, लेकिन कुछ मामलों में लोगों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ा सकते हैं।
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