जयपुर | राजस्थान में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। यूनिसेफ इंडिया की कंट्री हेड सिंथिया मैककैफ्रे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जयपुर स्थित पुलिस मुख्यालय का दौरा किया।
राजस्थान में बाल सुरक्षा की नई पहल: राजस्थान पुलिस और यूनिसेफ का नया मिशन: बच्चों की सुरक्षा
राजस्थान पुलिस और यूनिसेफ मिलकर 'चाइल्ड फ्रेंडली पुलिसिंग' को और अधिक सशक्त बनाएंगे।
HIGHLIGHTS
- यूनिसेफ इंडिया की कंट्री हेड सिंथिया मैककैफ्रे ने जयपुर में डीजीपी से मुलाकात की।
- 'चाइल्ड फ्रेंडली पुलिसिंग' को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नई रणनीति पर चर्चा हुई।
- सुरक्षा सखी और कालिका पेट्रोलिंग जैसे मॉडल्स की वैश्विक स्तर पर सराहना की गई।
- स्कूलों में ऑनलाइन और साइबर सेफ्टी जागरूकता कार्यक्रम चलाने पर विशेष जोर दिया गया।
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इस दौरान महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के साथ आयोजित बैठक में “चाइल्ड फ्रेंडली पुलिसिंग” कार्यक्रम को अधिक प्रभावी और व्यापक बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों संस्थाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर सहमति जताई।
चाइल्ड फ्रेंडली पुलिसिंग पर विशेष जोर
बैठक में सिंथिया मैककैफ्रे ने राजस्थान पुलिस द्वारा महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे अभिनव प्रयासों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि राजस्थान के सुरक्षा मॉडल अन्य राज्यों के लिए प्रेरणादायक हैं।
मैककैफ्रे ने विशेष रूप से ‘कालिका पेट्रोलिंग यूनिट’, ‘सुरक्षा सखी’ और ‘वत्सल वार्ता’ जैसी पहलों को प्रभावी बताया। उन्होंने इन कार्यक्रमों को और अधिक सुदृढ़ करने और इनके दायरे को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
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बैठक में दोनों संस्थाओं के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर सहमति बनी। बाल सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन मंथन किया गया। वर्तमान कार्यक्रमों के प्रभाव की विस्तृत समीक्षा की गई।
सिस्टम स्ट्रेंथनिंग और भविष्य का रोडमैप
विशेष रूप से “सिस्टम स्ट्रेंथनिंग” और “स्केल-अप” मॉडल को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य इन पहलों का लाभ समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचाना है।
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने सामुदायिक पुलिसिंग को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि डिजिटल भी होनी चाहिए।
स्कूलों में ऑनलाइन सेफ्टी और साइबर सेफ्टी को लेकर नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाना आज की प्रमुख आवश्यकता है। बच्चों को अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है।
डीजीपी ने आगे कहा कि पुलिस और समाज के बीच सक्रिय सहभागिता से ही एक सकारात्मक और सुरक्षित वातावरण तैयार किया जा सकता है। इसके लिए यूनिसेफ का सहयोग तकनीकी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होगा।
सामुदायिक पुलिसिंग को मिलेगा नया बल
बैठक में महिलाओं और बच्चों को जागरूक करने के लिए यूनिसेफ प्रतिनिधियों ने कई सुझाव दिए। आगामी दिनों में यूनिसेफ द्वारा एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर पुलिस मुख्यालय को प्रस्तुत की जाएगी।
इस अवसर पर यूनिसेफ राजस्थान के स्टेट हेड के.एल. नरसिम्हा राव और बाल संरक्षण विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार निराला भी उपस्थित रहे। उन्होंने जमीनी स्तर पर सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के सुझाव दिए।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक लता मनोज कुमार ने सामुदायिक पुलिसिंग के तहत चल रहे प्रोजेक्ट्स की प्रगति रिपोर्ट साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे 'सुरक्षा सखी' के माध्यम से महिला अपराधों में कमी लाने का प्रयास किया जा रहा है।
यह सहयोग राजस्थान को बच्चों और महिलाओं के लिए देश का सबसे सुरक्षित प्रदेश बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। पुलिस और यूनिसेफ का यह साझा मिशन समाज में बड़े बदलाव लाएगा।
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