जयपुर | राजस्थान के शिक्षा विभाग ने प्रदेश के निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण को रोकने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। अब कोई भी स्कूल मनमर्जी से किसी खास दुकान से सामान खरीदने का दबाव नहीं बना पाएगा।
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम: राजस्थान में प्राइवेट स्कूलों की अब खैर नहीं: किताब-यूनिफॉर्म के नाम पर वसूली तो होगी सख्त कार्रवाई, शिक्षा विभाग ने बनाई कमेटियां
राजस्थान शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर किताब और यूनिफॉर्म खरीदने के दबाव को लेकर सख्त आदेश जारी किए हैं। हर जिले में जांच के लिए कमेटियां गठित की गई हैं जो 20 अप्रैल तक अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ सख्त आदेश जारी किए हैं।
- हर जिले में 3 सदस्यीय जांच कमेटियां गठित की गई हैं जो स्कूलों का औचक निरीक्षण करेंगी।
- किताब, यूनिफॉर्म और जूते खरीदने के लिए दबाव बनाने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द हो सकती है।
- जांच कमेटियों को 20 अप्रैल 2026 तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट निदेशालय को सौंपनी होगी।
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शिक्षा विभाग को पिछले काफी समय से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि स्कूल संचालक अभिभावकों को परेशान कर रहे हैं। वे उन्हें मजबूर करते हैं कि वे महंगी किताबें और यूनिफॉर्म निर्धारित दुकानों से ही खरीदें।
इस 'कमीशन के खेल' को खत्म करने के लिए प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। अब हर जिले में निजी स्कूलों की सघन चेकिंग के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
शिक्षा विभाग का सख्त रुख
निदेशक द्वारा जारी आदेश के अनुसार, गैर-सरकारी स्कूलों में स्टूडेंट्स से किताब, यूनिफॉर्म, जूते और टाई के नाम पर लगातार अनियमिताओं की शिकायतें मिल रही थीं। विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है।
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आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निजी स्कूलों की ओर से बच्चों और उनके पेरेंट्स पर शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए अनावश्यक दबाव बनाया जाता है। यह शिक्षा के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
अब शिक्षा विभाग ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई का फैसला लिया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ अब विभाग कोई नरमी नहीं बरतने वाला है।
3 सदस्यीय जांच कमेटी का गठन
स्कूलों में 1 अप्रैल 2026 से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय कमेटियां बनाई गई हैं।
ये कमेटियां अपने आवंटित क्षेत्रों में जाकर स्कूलों का बारीकी से निरीक्षण करेंगी। वे यह देखेंगी कि क्या स्कूल किसी विशेष ब्रांड या दुकान का प्रचार तो नहीं कर रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान यदि किसी स्कूल में नियमों का उल्लंघन या पेरेंट्स से जुड़ी कोई भी शिकायत सही पाई जाती है, तो संबंधित स्कूल के खिलाफ तुरंत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मान्यता रद्द करने की चेतावनी
शिक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि गंभीर मामलों में स्कूल की मान्यता निरस्त करने की सिफारिश भी की जा सकती है। यह उन स्कूलों के लिए बड़ा झटका है जो शिक्षा को व्यापार बना चुके हैं।
जांच के दौरान कमेटियां यह भी सुनिश्चित करेंगी कि स्कूल में क्या-क्या अनियमितताएं हो रही हैं। इसके लिए एक विस्तृत परफॉर्मा तैयार किया गया है जिसे भरकर निदेशालय को भेजना होगा।
इस परफॉर्मा में यह जानकारी भी देनी होगी कि किसी विशिष्ट स्कूल के खिलाफ अब तक कितनी शिकायतें मिली हैं और उन पर क्या कार्रवाई की गई है।
20 अप्रैल तक देनी होगी रिपोर्ट
निरीक्षण के बाद सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्धारित प्रारूप (एमएस एक्सेल) में अपनी रिपोर्ट तैयार करनी होगी। यह रिपोर्ट 20 अप्रैल 2026 तक ई-मेल के माध्यम से निदेशालय को भेजी जाएगी।
शिक्षा विभाग का कहना है कि यदि कोई निजी स्कूल निर्देशों की अवहेलना करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन इस बार किसी भी दबाव में काम नहीं करेगा।
समय सीमा के भीतर रिपोर्ट न भेजने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। विभाग चाहता है कि इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और अभिभावकों को न्याय मिले।
बीकानेर शिक्षा अधिकारी का बयान
बीकानेर के जिला शिक्षा अधिकारी किशन दान चारण ने इस आदेश पर अपनी मुहर लगाते हुए कहा कि माध्यमिक शिक्षा निदेशक के आदेशों का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई निजी स्कूल संचालक या शिक्षक बच्चों पर किसी भी तरह का सामान खरीदने के लिए दबाव डालते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अभिभावकों की संतुष्टि ही उनकी प्राथमिकता है। स्कूलों को केवल शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए, न कि व्यापारिक गतिविधियों पर।
अभिभावकों के लिए राहत
इस फैसले से राजस्थान के लाखों परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। अब पेरेंट्स अपनी सुविधा के अनुसार खुले बाजार से किताबें और यूनिफॉर्म खरीद सकेंगे।
अक्सर देखा गया है कि स्कूलों द्वारा सुझाई गई दुकानों पर सामान की कीमतें सामान्य से 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक होती हैं। अब इस लूट पर अंकुश लगने की संभावना है।
शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की मनमानी की सूचना तुरंत नजदीकी शिक्षा कार्यालय में दें। विभाग हर शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेगा।
क्या है भविष्य की योजना?
विभाग आने वाले समय में स्कूलों के लिए और भी कड़े गाइडलाइंस जारी करने की तैयारी में है। इसमें फीस नियंत्रण और अन्य सुविधाओं को लेकर भी नियम बनाए जा सकते हैं।
फिलहाल, पूरा ध्यान इस जांच अभियान को सफल बनाने पर है। 20 अप्रैल के बाद राजस्थान के निजी स्कूलों की एक नई तस्वीर सामने आने की उम्मीद की जा रही है।
शिक्षा विभाग की इस पहल का चौतरफा स्वागत हो रहा है। लोगों का मानना है कि ऐसे कदमों से ही शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को कम किया जा सकता है।
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