बारां | ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने का सीधा असर अब राजस्थान के विकास कार्यों पर दिखने लगा है। प्रदेश में डामर की कीमतें अचानक दोगुनी होने से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सहित हजारों करोड़ की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं।
राजस्थान: डामर की कीमतें दोगुनी: ईरान-इजरायल युद्ध का असर: राजस्थान में डामर के दाम दोगुने
ईरान-इजरायल तनाव के चलते राजस्थान में डामर की कीमतें 1 लाख रुपये प्रति टन तक पहुंचीं।
HIGHLIGHTS
- ईरान-इजरायल युद्ध के कारण डामर की कीमतें 50 हजार से बढ़कर 1 लाख रुपये प्रति टन तक पहुंच गई हैं।
- राजस्थान में पीएम ग्राम सड़क योजना और पीएम जन मन योजना के हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट्स अधर में लटके।
- बारां जिले में पीडब्ल्यूडी और आरएसआरडीसी की 400 करोड़ रुपये से अधिक की सड़कें फिलहाल ठप हो गई हैं।
- रिफाइनरियों में कच्चे तेल की कमी से डामर का उत्पादन घटा है, जिससे सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हुई है।
संबंधित खबरें
कीमतों में भारी उछाल और सप्लाई संकट
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण मध्य पूर्व से कच्चे तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। देश की रिफाइनरियों में डामर (बिटुमिन) का उत्पादन घटने से इसकी बाजार दरों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।
पहले जो डामर 45 से 50 हजार रुपये प्रति टन की दर पर उपलब्ध था, उसकी कीमतें अब एक लाख रुपये के करीब पहुंच गई हैं। कीमतें बढ़ने के बावजूद बाजार में डामर की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे ठेकेदारों ने निर्माण कार्य रोक दिए हैं।
बारां जिले में गहराया सड़क निर्माण का संकट
अकेले बारां जिले की बात करें तो सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की 250 करोड़ रुपये से अधिक की दर्जनों सड़कें अटक गई हैं। इसके साथ ही आरएसआरडीसी (RSRDC) और अन्य विभागों की परियोजनाओं पर भी ब्रेक लग गया है, जिससे ग्रामीण कनेक्टिविटी प्रभावित हो रही है।
जानकारों का कहना है कि रिफाइनरियों में कच्चे तेल के प्रसंस्करण के दौरान पेट्रोल और डीजल निकालने के बाद बचा अवशेष डामर होता है। पानीपत, कोच्चि और मथुरा जैसी बड़ी रिफाइनरियों से डामर की आपूर्ति कम होने से ठेकेदारों के लिए बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
संबंधित खबरें
प्रमुख योजनाओं पर पड़ा सीधा प्रहार
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और पीएम जन मन योजना के तहत बनने वाली सभी डामर सड़कों का काम फिलहाल बंद है। सूत्रों के अनुसार, एक सामान्य डामर सड़क के निर्माण में प्रति किलोमीटर लगभग 10 टन डामर की आवश्यकता होती है।
मोटी लेयर वाली सड़कों में यह मात्रा और भी अधिक होती है, जिससे बढ़ी हुई लागत का बोझ उठाना अब ठेकेदारों के लिए नामुमकिन है। महीने भर के भीतर कीमतों में हुए 50 हजार रुपये प्रति टन के इजाफे ने निर्माण क्षेत्र की कमर तोड़ दी है।
ठेकेदारों की बढ़ी मुश्किलें और सरकारी प्रावधान
आमतौर पर सरकारी ठेकों में 'एस्केलेशन' का प्रावधान होता है, जिससे सामग्री की दरें बढ़ने पर ठेकेदारों को राहत मिलती है। हालांकि, पीएम जन मन और पीएम ग्राम सड़क योजना जैसी कई योजनाओं में इस राहत का कोई स्पष्ट प्रावधान शामिल नहीं है।कुछ ही दिनों में डामर 90 हजार से एक लाख रुपये प्रति टन तक पहुंच गया है। सप्लाई की कमी के कारण बारां में करोड़ों के काम अटके हैं। फिलहाल केवल इमरजेंसी काम ही किए जा रहे हैं।
- हुकुमचंद मीणा, अधीक्षण अभियंता, PWD बारां।
राजस्थान में डामर की किल्लत और बढ़ती कीमतों ने न केवल विकास की रफ्तार धीमी कर दी है, बल्कि भविष्य की परियोजनाओं पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम नहीं हुआ, तो आगामी बजट घोषणाओं को समय पर पूरा करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।
*Edit with Google AI Studio