thinQ360
thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 📰 जालोर 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
राजस्थान

रूपारेल नदी का कायाकल्प: ₹100 करोड़ से बदलेगी रूपारेल नदी की सूरत, बनेंगे 6 नए एनिकट

मानवेन्द्र जैतावत

अलवर की रूपारेल नदी के कायाकल्प के लिए 100 करोड़ की योजना तैयार, अतिक्रमण पर चलेगा प्रशासन का डंडा।

HIGHLIGHTS

  • अलवर की रूपारेल नदी के पुनरुद्धार के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
  • परियोजना के तहत नदी पर 6 नए एनिकटों का निर्माण किया जाएगा, जिस पर 1195 लाख खर्च होंगे।
  • 7 सरकारी विभागों ने डीपीआर पर मंथन किया और 10 दिनों में सुझाव मांगे गए हैं।
  • नदी क्षेत्र से अतिक्रमण हटाना और प्राकृतिक बहाव को बहाल करना प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती है।
rajasthan ruparel river revival project alwar

अलवर | राजस्थान के अलवर जिले की जीवनदायिनी मानी जाने वाली रूपारेल नदी के दिन अब बहुरने वाले हैं। प्रशासन ने नदी को पुनर्जीवित करने के लिए 100 करोड़ रुपये की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। हाल ही में जिला प्रशासन ने सिंचाई, कृषि, उद्यान और वन सहित सात प्रमुख विभागों के साथ विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पर गहन मंथन कर सुझाव मांगे हैं। 27 अप्रैल को आयोजित इस बैठक में सिंचाई, कृषि, उद्यान, वन, पंचायतीराज, वाटरशेड और भूजल विभाग के अधिकारियों ने डीपीआर पर विस्तृत चर्चा कर सहमति जताई है। अधिकारियों ने नदी के कायाकल्प हेतु तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की और सभी विभागों को 10 दिन के भीतर अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराने का निर्देश दिया है।

1195 लाख की लागत से बनेंगे 6 नए एनिकट

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत रूपारेल नदी पर छह नए एनिकटों का निर्माण किया जाएगा। इन एनिकटों के निर्माण पर लगभग 1195 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इन संरचनाओं का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल को रोकना और क्षेत्र के गिरते भूजल स्तर में सुधार करना है, जिससे स्थानीय किसानों को सिंचाई में व्यापक लाभ होगा।

परियोजना का वित्तीय ढांचा और विकास कार्य

डीपीआर के अनुसार, ड्रेन लाइन ट्रीटमेंट के लिए 2259 लाख, रिचार्ज स्ट्रक्चर के लिए 986 लाख और मिट्टी-पत्थर के कार्यों के लिए 614 लाख रुपये खर्च होंगे। इसके अतिरिक्त, वेस्टलैंड डेवलपमेंट पर 856 लाख और सब-सर्फेस वियर कार्यों पर 432 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे नदी का पारिस्थितिक तंत्र काफी मजबूत हो सकेगा। वर्षा जल के बेहतर प्रबंधन और जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण पर करीब 100 करोड़ रुपये का कुल प्रावधान रखा गया है, जो क्षेत्र की तस्वीर बदल देगा।

अतिक्रमण हटाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती

नदी के पुनरुद्धार में सबसे बड़ी बाधा इसके बहाव क्षेत्र में हो रहे अवैध अतिक्रमण हैं। प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों को चिन्हित करने के लिए विशेष टीमें गठित की हैं। सिंचाई विभाग की टीमें भौतिक सत्यापन के बाद अवैध कब्जा करने वालों को नोटिस जारी करेंगी। अधिकारियों का मानना है कि बिना प्राकृतिक बहाव बहाल किए परिणाम नहीं मिलेंगे।

"यदि नदी के मूल स्वरूप को बहाल कर दिया गया, तो बरसात में पानी का प्रवाह सुचारू होगा और क्षेत्र के भूजल स्तर में भारी सुधार होगा।"

वन विभाग की भूमि और वाटरशेड प्रबंधन से जुड़े तकनीकी मसलों पर भी बैठक में विस्तार से चर्चा कर प्रत्येक विभाग की अलग-अलग जिम्मेदारी तय की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जल संरक्षण की इन नवीन संरचनाओं को वैज्ञानिक तरीके से विकसित किया जाएगा ताकि मिट्टी के कटाव को प्रभावी ढंग से रोका जा सके। नदी के किनारों के सुदृढ़ीकरण और वर्षा जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे भविष्य में भूजल की समस्या का एक स्थाई समाधान निकल सके। रूपारेल नदी का यह कायाकल्प अलवर की कृषि और पर्यावरण के लिए वरदान साबित होगा। 100 करोड़ के इस निवेश से क्षेत्र में नई खुशहाली और हरियाली आएगी।

*Edit with Google AI Studio

शेयर करें: