जयपुर | राजस्थान में जल संकट के समाधान और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश में 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026' का आगाज आगामी 25 मई को गंगा दशमी के पावन अवसर पर होगा।
वंदे गंगा जल अभियान 2026: राजस्थान में 25 मई से शुरू होगा वंदे गंगा जल अभियान
जल संरक्षण के लिए राजस्थान में शुरू होगा भव्य जन आंदोलन।
HIGHLIGHTS
- 25 मई (गंगा दशमी) से राजस्थान में 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026' का भव्य शुभारंभ होगा।
- अभियान के तहत 5 साल में प्रदेश में 50 करोड़ पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
- जल संचय जन भागीदारी अभियान में अब तक 2.33 लाख से अधिक कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए जा चुके हैं।
- अभियान को जन आंदोलन बनाने के लिए राजीविका की महिलाओं और युवाओं को बड़े स्तर पर जोड़ा जाएगा।
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जल संरक्षण बनेगा जन आंदोलन
कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में इस अभियान की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन होगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में इस अभियान को प्रदेश के कोने-कोने तक पहुँचाया जाएगा। इसमें समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक में डॉ. मीणा ने निर्देश दिए कि इस अभियान में सभी राजनीतिक दलों, विचारकों, सांसदों, विधायकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को एकजुट किया जाए। सामूहिक प्रयासों से ही जल संकट का स्थाई समाधान संभव है।
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सामूहिक भागीदारी और समन्वय
इस महत्वपूर्ण बैठक में विद्यालय शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत और वन मंत्री संजय शर्मा भी उपस्थित रहे। सभी मंत्रियों ने अभियान की सफलता के लिए अपने सुझाव साझा किए।
डॉ. मीणा ने कहा कि भामाशाहों, स्वयंसेवी संस्थाओं, उद्योगपतियों और धार्मिक संस्थाओं को भी इस पावन कार्य से जोड़ा जाए। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ इस अभियान को गति प्रदान करेंगे।
सभी जिला प्रभारी सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अभियान के दौरान अपने आवंटित जिलों में प्रवास करें। इससे जमीनी स्तर पर कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन बेहतर तरीके से हो सकेगा।
हरियालो राजस्थान और पौधारोपण का लक्ष्य
जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से निपटने के लिए 'हरियालो राजस्थान' अभियान के तहत बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। डॉ. मीणा ने अधिक से अधिक पौधे लगाने पर जोर दिया।
वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने जानकारी दी कि सरकार ने अगले पांच वर्षों में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है।
वर्ष 2024 में प्रदेश में 7 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए थे। वहीं वर्ष 2025 के लिए 11.55 करोड़ से अधिक पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो रिकॉर्ड स्तर पर होगा।
चंदन के पौधों से महकेगा राजस्थान
इस वर्ष अभियान के दौरान विभिन्न जिलों में चंदन के पौधे भी लगाए जाएंगे। इससे न केवल पर्यावरण सुधरेगा, बल्कि भविष्य में आर्थिक लाभ की संभावनाएं भी प्रबल होंगी।
डॉ. मीणा ने सुझाव दिया कि अभियान में राजीविका से जुड़ी महिलाओं को सक्रियता से जोड़ा जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी से जल संरक्षण के संदेश को घर-घर पहुँचाना आसान होगा।
गांवों में कलश यात्राएं, पीपल पूजन और प्रभात फेरी जैसे पारंपरिक आयोजनों के माध्यम से लोगों का भावनात्मक जुड़ाव पैदा किया जाएगा। इससे जन जागरूकता में अभूतपूर्व वृद्धि होने की उम्मीद है।
जल संचय और भू-जल रिचार्ज के फायदे
जल संरक्षण के महत्व को समझाते हुए डॉ. मीणा ने कहा कि इससे भू-जल स्तर में सुधार होता है। जब भू-जल रिचार्ज होता है, तो वनस्पतियां पनपती हैं और पर्यावरण में संतुलन बना रहता है।
वनस्पतियों से हमें प्राणवायु यानी ऑक्सीजन मिलती है, जो मानव जीवन के लिए अनिवार्य है। जल संरक्षण सीधे तौर पर हमारे जीवन की सुरक्षा और भविष्य की पीढ़ियों के कल्याण से जुड़ा है।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि नागरिकों को जल संरक्षण के व्यावहारिक फायदों के बारे में शिक्षित करना जरूरी है। जब लोग लाभ समझेंगे, तभी वे स्वेच्छा से इस अभियान का हिस्सा बनेंगे।
युवाओं और विद्यार्थियों की भूमिका
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने सुझाव दिया कि अभियान में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को बड़े स्तर पर शामिल किया जाए। युवा पीढ़ी ही भविष्य में जल की रक्षक बनेगी।
उन्होंने पारंपरिक जल स्रोतों जैसे बावड़ियों और तालाबों की सफाई पर जोर दिया। मानसून से पहले इन स्रोतों को साफ करने से वर्षा जल का अधिकतम संचयन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
रावत ने कहा कि घरों में वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाने वाले नागरिकों को सम्मानित किया जाना चाहिए। इससे अन्य लोग भी अपने घरों में जल संचय की तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
जल संचय जन भागीदारी अभियान की प्रगति
बैठक में जल संचय जन भागीदारी अभियान के तहत अब तक हुए कार्यों की भी समीक्षा की गई। अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार ने बताया कि राज्य में प्रगति काफी उत्साहजनक है।
प्रदेश में कुल 2 लाख 67 हजार 837 कार्यों का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से 2 लाख 33 हजार 854 कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुके हैं, जबकि शेष कार्य प्रगति पर हैं।
इन कार्यों में जल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण प्रमुख है। इससे राज्य की जल भंडारण क्षमता में भारी वृद्धि हुई है और सूखे क्षेत्रों में भू-जल स्तर में सुधार देखने को मिला है।
कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान
भू-जल विभाग के प्रमुख शासन सचिव हेमंत कुमार गेरा ने 'कर्मभूमि से मातृभूमि' अभियान की प्रगति रिपोर्ट पेश की। इसका उद्देश्य प्रवासी राजस्थानियों को अपनी मिट्टी से जोड़ना है।
इस अभियान के तहत अब तक 19 हजार से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है। प्रवासी राजस्थानी अपनी जन्मभूमि पर जल संचय के कार्यों में आर्थिक सहयोग दे रहे हैं।
डॉ. मीणा ने निर्देश दिए कि अधिक से अधिक प्रवासियों को इस आंदोलन से जोड़ा जाए। उनकी भागीदारी से ग्रामीण क्षेत्रों में जल प्रबंधन के बुनियादी ढांचे को और अधिक मजबूती मिलेगी।
पिछले वर्ष की शानदार उपलब्धियां
वंदे गंगा अभियान के पिछले चरण में राजस्थान ने कई कीर्तिमान स्थापित किए थे। पिछले वर्ष 5 जून से 25 जून तक चले अभियान में 2.53 करोड़ नागरिकों ने भाग लिया था।
इसमें 1.32 करोड़ महिलाओं की भागीदारी रही, जो महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रदेश में 1 लाख 21 हजार से अधिक स्थानों पर आमजन ने श्रमदान कर मिसाल पेश की।
महानरेगा के तहत 2 करोड़ 47 लाख से अधिक मानव दिवस सृजित किए गए। इसके अलावा 42 हजार से अधिक पुराने जल स्रोतों की सफाई की गई, जिससे उनकी क्षमता पुनर्जीवित हुई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में जल संरक्षण और स्वच्छता का अभियान जल आंदोलन बनेगा।
भविष्य की रणनीति और नवाचार
डॉ. मीणा ने कहा कि वंदे गंगा अभियान के दौरान किसानों को 'ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट' (ग्राम) की गतिविधियों से भी जोड़ा जाए। उन्हें उन्नत कृषि तकनीकों के बारे में जानकारी दी जाए।
किसानों को जल प्रबंधन, फसल विविधीकरण और कम पानी में अधिक पैदावार देने वाली तकनीकों के बारे में शिक्षित करना अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
पंचायती राज राज्य मंत्री ओटा राम देवासी ने कहा कि मानसून से पहले सभी जल स्रोतों की सफाई का काम पूरा कर लिया जाएगा। यह अभियान भविष्य के लिए जल और जंगल बचाने का महायज्ञ है।
निष्कर्ष: एक समृद्ध राजस्थान की ओर
वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026 राजस्थान की जल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। जन-जन के सहयोग से ही मरूधरा को हरा-भरा बनाया जा सकता है।
यह अभियान न केवल जल संचय करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध पर्यावरण भी सुनिश्चित करेगा। राजस्थान अब जल क्रांति की ओर अग्रसर है।
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