पटना | टीवी इंडस्ट्री की लोकप्रिय अभिनेत्री रतन राजपूत, जिन्हें आज भी लोग 'लाली' के नाम से याद करते हैं, इन दिनों अपनी सादगी के कारण चर्चा में हैं।
रतन राजपूत का बदला लुक: 'लाली' रतन राजपूत का बदला लुक, अब क्या कर रही हैं अभिनेत्री?
'अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो' फेम रतन राजपूत अब ग्लैमर से दूर सादा जीवन जी रही हैं।
HIGHLIGHTS
- 'अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो' में लाली के किरदार से रतन राजपूत ने घर-घर में अपनी पहचान बनाई थी।
- अभिनेत्री ने अपने करियर के लिए परिवार से बगावत की और दिल्ली में थिएटर गुरु सुरेंद्र शर्मा से ट्रेनिंग ली।
- साल 2010 में रतन ने टीवी पर अपना 'स्वयंवर' रचाया था, जिसने उस समय काफी सुर्खियां बटोरी थीं।
- वर्तमान में रतन राजपूत टीवी की चकाचौंध से दूर अपने गांव में सादगी भरा जीवन बिता रही हैं।
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बिहार की गलियों से मुंबई का सफर
रतन राजपूत का जन्म 20 अप्रैल 1987 को बिहार की राजधानी पटना में हुआ था, जहाँ उनका बचपन एक मध्यमवर्गीय परिवार में बीता।
उनके पिता राम रतन सिंह एक सरकारी अधिकारी थे और उनकी माता सीमा चौहान एक कुशल गृहिणी थीं, जिन्होंने बच्चों को अच्छे संस्कार दिए।
रतन बचपन से ही पढ़ाई में अच्छी थीं, लेकिन उनके मन में अभिनय के प्रति एक अलग ही आकर्षण हमेशा से बना हुआ था।
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जब उन्होंने अपने परिवार को अभिनेत्री बनने की इच्छा बताई, तो उन्हें कड़े विरोध का सामना करना पड़ा क्योंकि परिवार इसे सुरक्षित करियर नहीं मानता था।
रतन ने हार नहीं मानी और अपने सपनों को पूरा करने के लिए परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर एक्टिंग की राह को चुनने का फैसला किया।
वह पटना से दिल्ली आ गईं, जहाँ उन्होंने थिएटर की दुनिया में कदम रखा और अपनी अभिनय प्रतिभा को निखारने का काम शुरू किया।
दिल्ली में उन्होंने प्रसिद्ध थिएटर गुरु सुरेंद्र शर्मा से अभिनय की बारीकियां सीखीं और उनके निर्देशन में कई नाटकों में अपना हुनर दिखाया।
थिएटर ने रतन को वह आत्मविश्वास दिया, जिसकी जरूरत मुंबई जैसे बड़े शहर में अपनी पहचान बनाने के लिए हर कलाकार को होती है।
'लाली' बनकर जीता करोड़ों का दिल
मुंबई आने के बाद रतन का सफर आसान नहीं था, उन्होंने कई छोटे-बड़े ऑडिशन दिए और शुरुआत में काफी संघर्ष का सामना भी किया।
उन्हें पहला बड़ा ब्रेक साल 2010 में 'अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो' सीरियल से मिला, जिसने उनकी किस्मत को पूरी तरह बदल दिया।
इस शो में उन्होंने 'लाली' नाम की एक गरीब लड़की का किरदार निभाया, जिसे उसके माता-पिता गरीबी के कारण बेच देते हैं।
रतन की मासूमियत और दमदार अभिनय ने दर्शकों को इस कदर प्रभावित किया कि वह रातों-रात टीवी की सबसे चहेती बहू और बेटी बन गईं।
यह शो भारतीय ग्रामीण समाज की कड़वी सच्चाइयों को उजागर करता था, जिसे रतन ने अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से जीवंत कर दिया था।
इसके बाद उन्होंने 'राधा की बेटियां कुछ कर दिखाएंगी' में भी काम किया, जहाँ उनके काम को काफी सराहा गया और प्रशंसा मिली।
रतन राजपूत ने पौराणिक धारावाहिक 'महाभारत' में अंबा का शक्तिशाली किरदार निभाकर यह साबित कर दिया कि वह हर तरह के रोल में फिट हैं।
उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई थी कि लोग उन्हें उनके असली नाम की जगह उनके किरदारों के नाम से ही पहचानने लगे थे।
टीवी पर स्वयंवर और विवादों का नाता
साल 2011 में रतन राजपूत ने एक साहसी कदम उठाया और रियलिटी शो 'रतन का रिश्ता' के जरिए नेशनल टीवी पर अपना स्वयंवर रचाया।
इस शो में देशभर से कई लड़कों ने हिस्सा लिया था और रतन ने अंत में अभिनव शर्मा को अपने जीवनसाथी के रूप में चुना था।
दोनों ने शो के फिनाले में सगाई भी की थी, लेकिन अफसोस कि यह रिश्ता शादी के मुकाम तक नहीं पहुँच सका और कुछ समय बाद टूट गया।
इस स्वयंवर की वजह से रतन को काफी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा और लोगों ने इसे केवल एक पब्लिसिटी स्टंट करार दिया था।
हालांकि रतन ने हमेशा यही कहा कि उन्होंने इस रिश्ते को ईमानदारी से निभाने की कोशिश की थी, लेकिन आपसी मतभेदों के कारण वे अलग हुए।
इसके बाद साल 2013 में वह विवादित रियलिटी शो 'बिग बॉस' सीजन 7 का हिस्सा बनीं, जहाँ दर्शकों को उनकी असल शख्सियत देखने को मिली।
बिग बॉस के घर में रतन का सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन उन्होंने अपनी सादगी और स्पष्टवादिता से सबका दिल जीत लिया था।
ग्लैमर की दुनिया से अचानक दूरी
रतन राजपूत ने 'संतोषी मां' सीरियल में मुख्य भूमिका निभाई थी, जो उनके करियर के सफलतम शोज में से एक माना जाता है।
लेकिन इसी शो के दौरान कुछ ऐसी घटनाएं घटीं, जिन्होंने रतन को मानसिक रूप से काफी प्रभावित किया और उन्होंने काम से ब्रेक लेने का सोचा।
एक इंटरव्यू में उन्होंने खुलासा किया था कि शूटिंग के दौरान उन्हें शोषण जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ा था, जिससे वह काफी आहत हुई थीं।
कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के दौरान रतन वापस अपने घर पटना लौट आईं और उन्होंने चकाचौंध भरी दुनिया से पूरी तरह दूरी बना ली।
लॉकडाउन के समय वह बिहार के एक छोटे से गांव में फंस गई थीं, जहाँ उन्होंने अपनी जिंदगी को एक नए नजरिए से देखना शुरू किया।
वहां उन्होंने चूल्हे पर खाना बनाना, खेती करना और गांव की सादगी को अपनाना शुरू किया, जो उनके लिए एक थेरेपी जैसा था।
एक्टिंग मेरा जुनून था, लेकिन सादगी मेरी आत्मा है, मैंने गांव में रहकर खुद को फिर से खोजा है।
आज रतन राजपूत एक डिजिटल क्रिएटर के रूप में पहचानी जाती हैं और अपने यूट्यूब चैनल के जरिए अपनी दिनचर्या साझा करती हैं।
सादगी और गांव का जीवन
रतन अब सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं, जहाँ वह अपने सादे जीवन की झलकियां अपने प्रशंसकों के साथ साझा करती रहती हैं।
वह अक्सर अपने वीडियो में स्वास्थ्य, मानसिक शांति और शुद्ध खान-पान के बारे में बात करती हुई नजर आती हैं, जो लोगों को प्रेरित करता है।
उनकी लेटेस्ट तस्वीरों में उनका लुक काफी बदल गया है, वह अब बिना मेकअप के और साधारण कपड़ों में भी बेहद खूबसूरत लगती हैं।
फैंस उनकी इन तस्वीरों को देखकर अक्सर हैरान रह जाते हैं कि एक टॉप टीवी एक्ट्रेस इतनी सादगी से कैसे रह सकती है।
पिछले कुछ समय से उन्होंने अपने चैनल पर कोई नया वीडियो साझा नहीं किया है, जिससे उनके प्रशंसक उनकी वापसी का इंतजार कर रहे हैं।
हालांकि रतन ने कभी यह साफ नहीं किया कि वह टीवी पर वापसी करेंगी या नहीं, लेकिन उनकी सादगी ने उन्हें एक नई पहचान दी है।
रतन राजपूत का यह सफर सिखाता है कि सफलता के शिखर पर पहुँचने के बाद भी अपनी जड़ों से जुड़े रहना कितना महत्वपूर्ण होता है।
उनकी कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है जो संघर्षों से लड़कर अपनी जगह बनाते हैं और फिर शांति की तलाश में खुद को चुनते हैं।
आज वह भले ही लाइमलाइट से दूर हों, लेकिन 'लाली' के रूप में उनका योगदान भारतीय टेलीविजन के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
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