बाड़मेर | राजस्थान की राजनीति में अपने आक्रामक और जन-केंद्रित तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने आगामी पंचायती राज चुनावों से ठीक पहले एक बार फिर सियासी पारा गर्मा दिया है।
Rajasthan Politics: EWS आरक्षण में सुधार के लिए रविंद्र सिंह भाटी की यात्रा
निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने EWS आरक्षण व्यवस्था में व्यावहारिक सुधार की मांग को लेकर 'घर-घर संपर्क यात्रा' का आगाज किया है, जो बाड़मेर से सांचौर तक जाएगी।
HIGHLIGHTS
- विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने बाड़मेर से EWS आरक्षण सुधार के लिए प्रदेशव्यापी आंदोलन का आगाज किया।
- यह 'घर-घर संपर्क यात्रा' बाड़मेर से शुरू होकर बालोतरा और सिणधरी होते हुए सांचौर तक पहुंचेगी।
- भाटी ने EWS प्रमाण-पत्र की वैधता को 3 से 5 साल करने और आयु सीमा में छूट की मांग की है।
- भूमि की पात्रता के लिए केवल आकार नहीं बल्कि उत्पादकता और स्थानीय मूल्य को आधार बनाने पर जोर दिया।
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विधायक भाटी ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षण व्यवस्था में व्यावहारिक सुधार और सरलीकरण की मांग को लेकर बाड़मेर से एक बड़े प्रदेशव्यापी आंदोलन का आधिकारिक आगाज कर दिया है।
रविंद्र सिंह भाटी की 'घर-घर संपर्क यात्रा'
बाड़मेर से शुरू हुई यह 'घर-घर संपर्क यात्रा' बालोतरा, आसोतरा, सिणधरी और गुड़ामालानी जैसे प्रमुख इलाकों से होते हुए सांचौर तक पहुंचेगी।
इस यात्रा के जरिए भाटी सीधे तौर पर ग्रामीण जनता और युवाओं के बीच पहुंच रहे हैं, जिससे पारंपरिक राजनीतिक दलों यानी कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों की नींद उड़नी तय मानी जा रही है।
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राजनीतिक समीकरण और युवा वोट बैंक
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायती राज चुनावों की आहट के बीच भाटी का यह कदम केवल ईडब्ल्यूएस तक सीमित नहीं है।
इसके पीछे मारवाड़ और पश्चिमी राजस्थान के ग्रामीण वोट बैंक की नब्ज टटोलने की एक सोची-समझी रणनीति भी दिखाई देती है।
भाटी का यह आक्रामक तेवर युवाओं और सवर्ण-सामान्य वर्ग के उन मतदाताओं के बीच गहरी पैठ बना रहा है जो लंबे समय से प्रशासनिक जटिलताओं से जूझ रहे हैं।
EWS सरलीकरण: क्या हैं विधायक की प्रमुख मांगें?
विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईडब्ल्यूएस (EWS) आरक्षण केवल एक सरकारी प्रावधान नहीं है, बल्कि यह हजारों प्रतिभाशाली युवाओं के भविष्य का सवाल है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कई ऐसी व्यावहारिक अड़चनें हैं, जिनके कारण जरूरतमंद युवाओं को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
भूमि पात्रता के मानदंडों में बदलाव की मांग
भाटी की ओर से उठाई गई प्रमुख मांगों में भूमि पात्रता का मुद्दा सबसे अहम है। उन्होंने मांग की है कि भूमि के केवल आकार को पात्रता का पैमाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
इसके बजाय भूमि की उत्पादकता, सिंचाई की उपलब्धता, स्थानीय भूमि मूल्य और उसकी आर्थिक उपयोगिता को ईडब्ल्यूएस पात्रता का मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए।
प्रमाण-पत्र की वैधता और केंद्रीय मान्यता
वर्तमान में हर साल प्रमाण-पत्र बनवाने की परेशानी से मुक्ति दिलाने के लिए ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र की वैधता अवधि को बढ़ाकर 3 से 5 वर्ष करने की मांग की गई है।
साथ ही, राज्य सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र को केंद्र सरकार की सभी सेवाओं और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में बिना किसी अड़चन के मान्यता मिलनी चाहिए।
शिक्षा और सरकारी सेवाओं में रियायतें
सामान्य वर्ग के गरीब विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु सीमा और आवेदन शुल्क में उचित और न्यायसंगत छूट का प्रावधान करने की मांग उठाई गई है।
विवाहित महिलाओं के लिए दस्तावेज सत्यापन और आय प्रमाण से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं को पूरी तरह व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया गया है।
छात्रवृत्ति और प्रतिनिधित्व की मांग
ईडब्ल्यूएस विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, विशेष छात्रावास और पंचायती राज संस्थाओं में इस वर्ग के लिए उपयुक्त प्रतिनिधित्व की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
इस पूरी मुहिम को लेकर अब यह सवाल सबसे बड़ा बन गया है कि क्या रविंद्र सिंह भाटी का यह तेवर स्थानीय चुनावों में कांग्रेस और बीजेपी के पारंपरिक वोटों में बड़ी सेंध लगा पाएगा?
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