जयपुर | राजस्थान की बेटियों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए आरएसएलडीसी और यूनिसेफ इंडिया ने हाथ मिलाया है। डिजिटल गर्ल्स हब (डीजीएच) मॉडल के तहत अब 18 से 29 वर्ष की युवतियों को डिजिटल कौशल सिखाया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण साझेदारी का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की महिलाओं को रोजगार के नए अवसरों से जोड़ना और आत्मनिर्भर बनाना है। आरएसएलडीसी कार्यालय में प्रबंध निदेशक ऋषभ मंडल की मौजूदगी में इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
राजस्थान की बेटियों को डिजिटल पंख: जयपुर: 2000 युवतियों को मिलेगा डिजिटल कौशल और रोजगार
आरएसएलडीसी और यूनिसेफ की नई पहल से बेटियों को मिलेगा डिजिटल हुनर और नौकरी।
HIGHLIGHTS
- 18 से 29 वर्ष की 2 हजार युवतियों को मिलेगा डिजिटल कौशल प्रशिक्षण।
- यूनिसेफ और आरएसएलडीसी के बीच डिजिटल गर्ल्स हब के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर।
- मार्च 2027 तक चलने वाले इस प्रोजेक्ट में प्लेसमेंट के बाद ही होगा भुगतान।
- फैशन और डिजाइन क्षेत्र में कौशल विकास के लिए एफडीसीआर के साथ भी समझौता।
संबंधित खबरें
डिजिटल गर्ल्स हब से मिलेगा रोजगार
इस कार्यक्रम के माध्यम से लगभग 2 हजार युवतियों को अल्पावधि डिजिटल कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। यह प्रोजेक्ट मार्च 2027 तक चलेगा और इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका परिणाम-आधारित मॉडल होना है।
सफल प्लेसमेंट होने के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता पूरी तरह सुनिश्चित होगी। यूनिसेफ के यूथहब प्लेटफॉर्म के जरिए युवतियों को नवीनतम डिजिटल पाठ्यक्रम और रोजगार के बेहतरीन अवसर मुहैया कराए जाएंगे।
बालिकाओं के डिजिटल सशक्तीकरण एवं रचनात्मक क्षेत्रों में कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ये महत्वपूर्ण पहल है।
संबंधित खबरें
फैशन और क्रिएटिविटी में भी मिलेगा हुनर
डिजिटल कौशल के साथ-साथ आरएसएलडीसी ने फैशन डिजाइन काउंसिल ऑफ राजस्थान (एफडीसीआर) के साथ भी एक समझौता किया है। इसके तहत टेक्सटाइल, फिल्म, मीडिया और डिजाइन जैसे रचनात्मक क्षेत्रों में युवाओं को उद्योग-उन्मुख ट्रेनिंग दी जाएगी।
प्रशिक्षण के दौरान मास्टर क्लास, इंटर्नशिप और स्टार्टअप के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि युवा अपना काम शुरू कर सकें। प्रबंध निदेशक ऋषभ मंडल और यूनिसेफ की सिंथिया मैककैफरी की मौजूदगी में इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए।
यह पहल राजस्थान की युवतियों को न केवल तकनीकी रूप से दक्ष बनाएगी, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से भी सशक्त करेगी। रचनात्मक और डिजिटल क्षेत्रों में मिलने वाला यह प्रशिक्षण प्रदेश की प्रगति और महिला सशक्तिकरण में बड़ा योगदान देगा।
*Edit with Google AI Studio