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राजस्थान

सहजन: किसानों की संजीवनी: सहजन आधारित कृषि: किसानों के लिए आय-रोजगार का बेहतर माध्यम

महेन्द्रसिंह शेखावत

बीकानेर में सहजन आधारित कृषि पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न हुआ। संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा ने इसे किसानों के लिए आय, रोजगार और पोषण सुरक्षा का बेहतर माध्यम बताया।

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HIGHLIGHTS

  • बीकानेर में सहजन आधारित कृषि पर तीन दिवसीय 24वें प्रशिक्षण का समापन हुआ।
  • संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा ने सहजन को पोषण और आय का बेहतर माध्यम बताया।
  • प्रशिक्षण में 50 किसानों ने भाग लिया, अब तक 700 से अधिक किसान प्रशिक्षित हो चुके हैं।
  • प्रत्येक किसान को प्रमाण-पत्र के साथ 1000 सहजन के पौधे निःशुल्क वितरित किए जाएंगे।
bikaner moringa based agriculture training concludes for farmers

बीकानेर |सतत एवं आर्थिक विकास के लिए सहजन आधारित कृषि प्रणाली विषय पर चल रहे तीन दिवसीय कृषक कौशल विकास प्रशिक्षण का बुधवार को समापन हो गया। नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित इस परियोजना के तहत काजरी के क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान में 24वें प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। समापन समारोह में संभागीय आयुक्त श्री विश्राम मीणा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

सहजन: पोषण और आय का खजाना

समारोह में संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि भोजन को संतुलित एवं पोषक बनाने के लिए सहजन का दैनिक उपयोग महत्वपूर्ण है।

उन्होंने सहजन को 'सुपर फूड' बताते हुए कहा कि यह पोषण एवं औषधीय गुणों से भरपूर है। यह एक बहुउपयोगी फसल है, जिसका उपयोग मानव पोषण, पशुपालन, कृषि सहित विभिन्न औद्योगिक कार्यों में किया जाता है।

श्री मीणा ने कहा कि सहजन के विभिन्न उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर किसान रोजगार सृजन के साथ-साथ पोषण एवं आर्थिक सुरक्षा भी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यह मिट्टी को उपजाऊ बनाने में भी सहायक है।

आयुर्वेद में सहजन का महत्व

परियोजना के मुख्य समन्वयक डॉ. बोरवाल ने बताया कि आयुर्वेद के अनुसार सहजन में शरीर की अनेक बीमारियों को दूर करने की क्षमता होती है। यह वात एवं कफ दोष को कम करने में सहायक है।

उन्होंने बताया कि सहजन की पत्तियां एवं फल हमारे रक्त को साफ करने तथा पाचन शक्ति को मजबूत बनाने में उपयोगी हैं।

पोषक तत्वों से भरपूर

डॉ. बोरवाल ने सहजन के पोषक तत्वों की जानकारी देते हुए बताया कि इसकी सूखी पत्तियों में दूध की तुलना में लगभग चार गुना अधिक कैल्शियम होता है।

इसके अलावा, संतरे की तुलना में सात गुना अधिक विटामिन-सी, गाजर की तुलना में चार गुना अधिक विटामिन-ए तथा पालक की तुलना में तीन गुना अधिक आयरन पाया जाता है।

उन्होंने कहा कि सहजन हमारे देश की मिट्टी में आसानी से उगने वाला पौधा है। इसके पत्तों एवं फलियों को दैनिक आहार में शामिल कर महंगी दवाओं पर होने वाले खर्च को कम किया जा सकता है।

जलवायु परिवर्तन में सुरक्षा कवच

काजरी के अध्यक्ष डॉ. नवरत्न पंवार ने कहा कि बदलते जलवायु परिवर्तन के दौर में सहजन केवल एक पौधा नहीं, बल्कि पृथ्वी एवं मानव जाति दोनों के लिए एक सार्थक और शक्तिशाली सुरक्षा कवच सिद्ध हो रहा है।

उन्होंने कहा कि टिकाऊ कृषि एवं पर्यावरण सुरक्षा के लिए सहजन भविष्य का एक महत्वपूर्ण हथियार है।

किसानों को मिला प्रशिक्षण और पौधे

काजरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. बीरबल मील ने बताया कि इस प्रशिक्षण में बीकानेर जिले की विभिन्न तहसीलों से 50 किसानों ने भाग लिया।

उन्होंने जानकारी दी कि प्रशिक्षण में भाग लेने वाले प्रत्येक किसान को प्रमाण-पत्र के साथ 1000 सहजन के पौधे निःशुल्क वितरित किए जाएंगे।

नाबार्ड की सहभागिता से काजरी बीकानेर में संचालित इस परियोजना के अंतर्गत अब तक 700 से अधिक किसानों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। प्रशिक्षित किसानों में से 250 किसानों के खेतों में अब तक 2.5 लाख से अधिक सहजन के पौधे लगाए जा चुके हैं। कार्यक्रम में काजरी के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी श्री मूल सिंह गहलोत एवं डॉ. सीताराम जाट ने भी सहयोग किया।

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