शिवगंज चुंगी नाका ध्वस्तीकरण जांच की मांग: शिवगंज नगर पालिका का पुराना चुंगी नाका अवैध तरीके से तोड़ने पर हंगामा, संयम लोढ़ा ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की

शिवगंज नगर पालिका का पुराना चुंगी नाका अवैध तरीके से तोड़ने पर हंगामा, संयम लोढ़ा ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की
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Highlights

  • पुराने चुंगी नाका भवन को बिना सक्षम अनुमति के आधी रात को तोड़ने का आरोप।
  • संयम लोढ़ा ने प्रमुख सचिव रवि जैन को ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
  • जर्जर भवनों की सरकारी सूची में इस भवन का नाम शामिल नहीं होने का दावा।
  • निजी व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों के उल्लंघन का गंभीर आरोप।

शिवगंज | शिवगंज नगर पालिका के पुराने चुंगी नाका भवन को बिना किसी ठोस आधार और सक्षम अनुमति के तोड़ने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार संयम लोढ़ा ने जयपुर में स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख सचिव रवि जैन से मुलाकात की है। लोढ़ा ने इस पूरे प्रकरण को भ्रष्ट आचरण की बुनियाद पर आधारित बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आधी रात को अवैध तरीके से इस भवन को जमींदोज किया गया। प्रमुख सचिव को सौंपे गए ज्ञापन में लोढ़ा ने बताया कि यह भवन शिवगंज सिरोही मुख्य मार्ग के पास स्थित एक सार्वजनिक लोक संपत्ति थी। इसे नगर पालिका प्रशासक और उपखंड अधिकारी द्वारा साजिश के तहत ध्वस्त किया गया है। लोढ़ा का कहना है कि इस कार्यवाही में किसी भी वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। साथ ही प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की भी पूरी तरह से अवहेलना की गई है।

निजी लाभ पहुंचाने का आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि एक निजी व्यक्ति को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अधिकारियों ने मनगढ़ंत शिकायत करवाई। इसी शिकायत को आधार बनाकर जेसीबी मशीन की मदद से भवन को गिरा दिया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस भवन को नकारा और जर्जर बताते हुए यातायात में बाधक करार दिया था। जबकि वास्तविकता यह है कि इस भवन से कभी कोई दुर्घटना नहीं हुई थी। यह भवन न तो सड़क पर था और न ही यातायात में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न कर रहा था। ध्वस्तीकरण से पहले न तो कोई वैधानिक नोटिस दिया गया और न ही जिला कलेक्टर की अनुमति ली गई।

नियमों की धज्जियां उड़ाने का मामला

राजस्थान स्वायत्त शासन विभाग ने जुलाई 2025 में सभी निकायों से जर्जर भवनों की सूची मांगी थी। उस समय नगर पालिका शिवगंज द्वारा भेजी गई सूची में इस भवन का नाम शामिल नहीं था। इसका अर्थ है कि विभाग ने खुद इस भवन को असुरक्षित या जर्जर घोषित नहीं किया था। ऐसे में अचानक इसे तोड़ना प्रशासनिक मनमानी और नियमों के उल्लंघन को दर्शाता है। इस भवन के संबंध में कोई तकनीकी जांच रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं है। बिना किसी सक्षम आदेश के इतनी बड़ी सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करना गंभीर अपराध है।

सरकार के निर्देशों का उल्लंघन

लोक निर्माण विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी सार्वजनिक भवन को हटाने से पहले तकनीकी परीक्षण अनिवार्य है। इसके साथ ही जिला कलेक्टर की लिखित स्वीकृति भी आवश्यक होती है। शिवगंज के मामले में इन सभी निर्देशों की खुली अवहेलना की गई है। संयम लोढ़ा ने इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच करवाने का आग्रह किया है। उन्होंने मांग की है कि दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए। सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन कर जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।

पारदर्शिता की मांग

लोढ़ा ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी दिशा निर्देश जारी किए जाने चाहिए। यह मांग किसी व्यक्तिगत द्वेष से नहीं बल्कि सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण के लिए की गई है। उनका उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता और कानून के शासन को बनाए रखना है। अब देखना यह है कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है। इस घटना के बाद से स्थानीय राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। लोग प्रशासन की इस कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। नगर पालिका प्रशासन को अब अपनी कार्यवाही का ठोस आधार प्रस्तुत करना होगा। जांच होने पर कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। सार्वजनिक संपत्तियों के इस तरह विनाश से जनता में भी रोष व्याप्त है। संयम लोढ़ा ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी यह लड़ाई जारी रहेगी।

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