Highlights
- पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर बाईपास एलाइनमेंट पर पुनर्विचार की मांग की।
- प्रस्तावित 8.689 किमी लंबा मार्ग शहर की आबादी के बेहद करीब होने से सुरक्षा और विकास में बाधक बताया गया।
- लोढ़ा ने 11 किमी लंबे वैकल्पिक मार्ग का सुझाव दिया जो मास्टर प्लान के अनुरूप और आबादी से दूर है।
- केंद्रीय मंत्री से अंतिम निर्णय होने तक भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोकने का आग्रह किया गया है।
सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-168 के प्रस्तावित बाईपास के एलाइनमेंट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पूर्व विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार संयम लोढ़ा ने इस मुद्दे को सीधे केंद्र सरकार के समक्ष उठाते हुए केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को एक विस्तृत पत्र प्रेषित किया है। इस पत्र के माध्यम से लोढ़ा ने सिरोही शहर के दीर्घकालिक और सुनियोजित विकास, भविष्य की यातायात आवश्यकताओं और जनसुरक्षा के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान प्रस्तावित एलाइनमेंट पर पुनर्विचार करने की पुरजोर मांग की है। लोढ़ा का तर्क है कि वर्तमान प्रस्ताव शहर के भविष्य के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
प्रस्तावित एलाइनमेंट और तकनीकी चुनौतियां
सिरोही-रेवदर-मंडार खंड के लिए तैयार की जा रही विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) के तहत वर्तमान में विभिन्न एलाइनमेंट विकल्पों का परीक्षण किया जा रहा है। लोढ़ा ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि 20 अगस्त 2025 को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में गठित एलाइनमेंट अप्रूवल कमेटी ने कई तकनीकी मानकों का गहन अध्ययन किया था। इस अध्ययन में सड़क की कुल लंबाई, भूमि अधिग्रहण की जटिलता, निर्माण की व्यवहार्यता, भू-आकृतिक स्थिति और परियोजना लागत जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया था। हालांकि, स्थानीय हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए लोढ़ा ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।


लोढ़ा ने बताया कि जिस एलाइनमेंट (लगभग 8.689 किमी) पर वर्तमान में विचार किया जा रहा है, वह सिरोही शहर की घनी आबादी के अत्यंत निकट से गुजरता है। यह मार्ग नेशनल हाईवे-168 से शुरू होकर 220 केवी ग्रिड स्टेशन के पास समाप्त होता है। लोढ़ा का स्पष्ट कहना है कि यह मार्ग मौजूदा राजमार्ग और शहर के मास्टर प्लान में प्रस्तावित बाईपास मार्ग के बीच स्थित है। यदि यह मार्ग इसी रूप में निर्मित होता है, तो यह भविष्य में शहर के नियोजित विकास और सड़क नेटवर्क के विस्तार पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा, जिससे शहरी नियोजन पूरी तरह ध्वस्त हो सकता है।
जनसुरक्षा और दुर्घटनाओं का गंभीर खतरा
संयम लोढ़ा ने अपने पत्र में सुरक्षा कारणों को प्रमुखता से रेखांकित किया है। उनका मानना है कि एक उच्च गति वाला राष्ट्रीय राजमार्ग यदि शहर की आबादी के इतने करीब से संचालित होगा, तो स्थानीय यातायात और राजमार्ग के तेज रफ्तार वाहनों के बीच निरंतर टकराव की स्थिति बनी रहेगी। इससे न केवल सड़क दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी, बल्कि स्थानीय निवासियों का जीवन भी हमेशा जोखिम में रहेगा। शहरी सीमा के भीतर से भारी वाहनों का गुजरना ध्वनि और वायु प्रदूषण के स्तर को भी अनियंत्रित रूप से बढ़ाएगा, जो नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है।

वैकल्पिक मार्ग: एक बेहतर समाधान
समस्या का समाधान पेश करते हुए लोढ़ा ने पत्र में एक अन्य वैकल्पिक एलाइनमेंट का उल्लेख किया है, जिसकी लंबाई लगभग 11 किलोमीटर है। यह मार्ग नेशनल हाईवे-62 और नेशनल हाईवे-168 के जंक्शन से शुरू होकर नगर के प्रस्तावित मास्टर प्लान सड़क नेटवर्क से जुड़ता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह मार्ग शहर की घनी आबादी से अपेक्षाकृत काफी दूर होकर गुजरता है। लोढ़ा के अनुसार, यह विकल्प शहरी विकास, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा की दृष्टि से वर्तमान प्रस्ताव की तुलना में कहीं अधिक उपयुक्त है। इसके साथ ही, इस क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण की लागत भी कम आने की संभावना है क्योंकि यह कम विकसित और खुले क्षेत्रों से होकर गुजरता है।
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक की मांग
पूर्व विधायक ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से यह विशेष आग्रह किया है कि जब तक इस एलाइनमेंट पर कोई अंतिम, पारदर्शी और न्यायसंगत निर्णय नहीं हो जाता, तब तक प्रस्तावित सिरोही बाईपास के लिए चल रही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से स्थगित करने के निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि गलत एलाइनमेंट पर काम आगे बढ़ता है, तो इससे न केवल बड़ी संख्या में लोग प्रभावित और विस्थापित होंगे, बल्कि भविष्य में सुधार की गुंजाइश भी समाप्त हो जाएगी।
राज्य सरकार और पूर्ववर्ती पत्राचार
यह मामला केवल केंद्र तक ही सीमित नहीं है। इससे पूर्व 13 फरवरी को संयम लोढ़ा ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भी पत्र लिखकर इस गंभीर समस्या से अवगत कराया था। उन्होंने मांग की थी कि एनएचएआई द्वारा प्रस्तावित इस फोरलेन बाईपास को मास्टर प्लान के नियमों के अनुसार आबादी से दूर निकाला जाए। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के मुख्य अभियंता को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद संबंधित विभाग ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के क्षेत्रीय अधिकारी को भी पत्र लिखकर सर्वे का पुनर्निरीक्षण करने का आग्रह किया है। अब स्थानीय निवासियों की नजरें केंद्रीय मंत्रालय के अगले कदम पर टिकी हैं।
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