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सिरोही: रेवदर से मंडार तक बजरी माफिया बेलगाम! प्रतिबंध के बावजूद नदियों में धड़ल्ले से अवैध खनन, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और डंपरों से हो रहा परिवहन

गणपत सिंह मांडोली

सिरोही के रेवदर में मानसून प्रतिबंध के बावजूद बजरी का अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है। ड्रोन सर्वे में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से परिवहन का खुलासा हुआ है, जिससे प्रशासन पर सवाल उठे हैं।

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HIGHLIGHTS

  • सिरोही के रेवदर-मंडार क्षेत्र में बजरी का अवैध खनन जारी।
  • 1 सितंबर तक मानसून प्रतिबंध के बावजूद नदियों का हो रहा दोहन।
  • थिंक 360 के ड्रोन सर्वे में दिनदहाड़े खनन की तस्वीरें कैद।
  • प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल।
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सिरोही | सिरोही जिले के रेवदर क्षेत्र में बजरी के अवैध खनन का कारोबार लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। मानसून के दौरान 1 सितंबर तक नदी से बजरी खनन पर पूर्ण प्रतिबंध होने के बावजूद रेवदर से लेकर मंडार तक कई नदी क्षेत्रों में खुलेआम अवैध खनन किया जा रहा है। दिनभर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और डंपरों के जरिए नदी से बजरी का अवैध परिवहन किया जा रहा है, जिससे जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


जानकारी के अनुसार करोटी, मारोल, अवाड़ा, वरमाण, मगरीवाड़ा और मंडार के पास जुआदरा नदी क्षेत्र में प्रतिबंध के बावजूद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और डंपरों से धड़ल्ले से बजरी निकाली जा रही है। कई स्थानों पर नदियों के बीचों-बीच खनन जारी है और सड़कों पर बेखौफ दौड़ते ओवरलोड वाहन प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर रहे हैं।


स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार अवैध खनन का विरोध किया है। हाल ही में मारोल गांव में ग्रामीणों ने खनन गतिविधियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया था। इसके बावजूद न तो अवैध खनन रुका और न ही बजरी के परिवहन पर प्रभावी रोक लग सकी।
थिंक 360 की टीम ने रेवदर से लेकर मंडार तक ड्रोन के माध्यम से नदी क्षेत्र का सर्वे किया। सर्वे के दौरान कई स्थानों पर दिनदहाड़े खनन गतिविधियां और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों एवं डंपरों से बजरी का परिवहन होता दिखाई दिया। सामने आई तस्वीरों ने अवैध खनन के दावों को और मजबूत कर दिया है।


बजरी के अवैध खनन की रोकथाम का जिम्मा संभालने वाले विभागों और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम खनन और परिवहन जारी है तो आखिर इसे रोकने के लिए अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि कहीं जिम्मेदार विभागों की लापरवाही या खनन माफिया से मिलीभगत तो इस पूरे खेल को संरक्षण नहीं दे रही।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ड्रोन सर्वे में सामने आए तथ्यों के बाद खनन विभाग, पुलिस और प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं। क्या अवैध बजरी खनन पर सख्त रोक लगेगी या फिर प्रतिबंध के बावजूद नदियों का दोहन इसी तरह जारी रहेगा?

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