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भारत

शेयर बाजार में भारी गिरावट: शेयर बाजार में कोहराम: 4 दिनों में डूबे 11 लाख करोड़

बलजीत सिंह शेखावत

सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट, निवेशकों की संपत्ति हुई साफ।

HIGHLIGHTS

  • सेंसेक्स 849 अंक टूटकर 75,164 के स्तर पर पहुंचा।
  • पिछले चार दिनों में निवेशकों के 11 लाख करोड़ रुपये डूबे।
  • रुपया 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसल गया है।
  • विदेशी निवेशकों ने मई में 19,500 करोड़ के शेयर बेचे।
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मुंबई | भारतीय शेयर बाजार में पिछले चार दिनों से जारी गिरावट ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

महज चार कारोबारी सत्रों में निवेशकों की करीब 11 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति स्वाहा हो गई है। बाजार में हर छोटी तेजी के बाद बिकवाली का दबाव बढ़ रहा है।

सेंसेक्स आज कारोबार के दौरान 849 अंक टूटकर 75,164 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 भी लगभग 1 फीसदी फिसलकर 23,614 के स्तर पर आ गया है।

बीते चार दिनों में सेंसेक्स 3 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। बाजार की इस कमजोरी का असर बीएसई में लिस्टेड सभी कंपनियों के मार्केट कैप पर पड़ा है।

6 मई को बाजार का कुल मार्केट कैप 473 लाख करोड़ रुपये था। मंगलवार को यह घटकर मात्र 462 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

बाजार में घबराहट के मुख्य कारण

वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव ने भारतीय बाजार पर नकारात्मक असर डाला है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिरोध निवेशकों के बीच चिंता का विषय बना हुआ है।

अमेरिका-ईरान तनाव और युद्ध की आशंका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त बयानों ने बाजार को अस्थिर कर दिया है। ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई की धमकियों ने भी डर का माहौल बनाया है।

"युद्धविराम की कोशिशों के बावजूद मामला पूरी तरह शांत नहीं हुआ है, जिससे निवेशकों का भरोसा लगातार डगमगाया हुआ है।"

कच्चे तेल और रुपये का दबाव

ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहना भारत के लिए बड़ी चिंता है। तेल की ऊंची कीमतें सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव डालती हैं।

तेल महंगा होने से सरकार का खर्च बढ़ता है और महंगाई तेज होती है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल बाजार में जोखिम लेने से पूरी तरह बच रहे हैं।

मंगलवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। साल की शुरुआत से अब तक इसमें 6 फीसदी गिरावट आई है।

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक यानी FPI भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। जुलाई 2025 से अब तक वे भारी बिकवाली कर चुके हैं।

सिर्फ मई महीने में ही विदेशी निवेशकों ने 19,500 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। जब विदेशी पैसा बाहर जाता है तो बाजार पर दबाव बढ़ना तय होता है।

अमेरिकी डॉलर की मजबूती और 10 साल के बॉन्ड की यील्ड बढ़ना भी बड़ा कारण है। फिलहाल यील्ड 4.42 फीसदी पर पहुंच चुकी है जो निवेशकों को आकर्षित कर रही है।

बाजार का वर्तमान मूड पूरी तरह वैश्विक खबरों पर निर्भर है। जब तक कच्चे तेल और भू-राजनीतिक स्थितियों में सुधार नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।

*Edit with Google AI Studio

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