बाजार में हाहाकार!: बैंकिंग शेयरों में बिकवाली, सेंसेक्स 600 अंक टूटा
प्राइवेट बैंकों और फाइनेंशियल शेयरों में भारी बिकवाली से बाजार धड़ाम। सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी भी लाल निशान में। जानिए गिरावट के पीछे के 6 बड़े कारण।
HIGHLIGHTS
- हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 631 अंक टूटा।
- प्राइवेट बैंकों और फाइनेंशियल शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली का दबाव देखा गया।
- ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार की चिंताएं बढ़ाईं।
- HDFC बैंक और एक्सिस बैंक जैसे बड़े बैंकों के शेयर करीब 5% तक टूट गए।
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हफ्ते के पहले कारोबारी दिन, सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में ही बाजार लाल निशान में चला गया, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल बन गया।
सुबह 9 बजकर 30 मिनट पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 0.81 फीसदी यानी 631 अंक की बड़ी गिरावट के साथ 77,520 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 0.64 फीसदी यानी 154 अंक गिरकर 24,183 पर आ गया। बाजार में इस गिरावट का मुख्य कारण बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में तेज बिकवाली रहा।
सेक्टोरल सूचकांकों का हाल
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सेक्टर के हिसाब से देखें तो सबसे ज्यादा दबाव प्राइवेट बैंकों पर दिखा। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 2.65 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो और रियल्टी सेक्टर में भी बिकवाली हावी रही।
हालांकि, इस गिरावट के बीच कुछ सेक्टर्स में तेजी भी देखने को मिली। निफ्टी पीएसयू बैंक, फार्मा, आईटी और मेटल इंडेक्स हरे निशान में कारोबार करते दिखे।
बाजार में गिरावट के 6 बड़े कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में इस बड़ी गिरावट के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। आइए इन 6 प्रमुख कारणों को विस्तार से जानते हैं।
1. ईरान-अमेरिका संघर्ष से बढ़ी चिंता
वीकेंड के दौरान ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और गहरा गया। अमेरिका द्वारा ईरान पर लगातार हमले किए जाने की खबरों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
इसी बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो तेल टैंकरों में विस्फोट का दावा किया है, जिससे भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।
2. कच्चा तेल 90 डॉलर के पार
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड का भाव 2 फीसदी से ज्यादा उछलकर 90.19 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा होता है।
3. वैश्विक बाजारों में बिकवाली का दबाव
सोमवार सुबह सिर्फ भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि प्रमुख एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव देखा गया। जापान का निक्की और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 4 फीसदी से ज्यादा टूट गए।
इससे पहले अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी का माहौल था। एसएंडपी 500 और नैस्डैक में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई थी, जिसका असर आज एशियाई बाजारों पर भी दिखा।
4. बैंकिंग शेयरों ने बिगाड़ा खेल
घरेलू बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण बैंकिंग शेयरों में तेज बिकवाली रही। कुछ बड़े प्राइवेट बैंकों के जून तिमाही के नतीजे निवेशकों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे।
नतीजों से निराशा के बाद एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक के शेयरों में करीब 5 फीसदी तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कोटक महिंद्रा बैंक का शेयर भी 3 फीसदी से ज्यादा टूट गया।
5. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी बाजार पर दबाव बनाने का काम किया। 10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.551 फीसदी पर पहुंच गई।
जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो निवेशक इक्विटी बाजार से पैसा निकालकर बॉन्ड में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित समझते हैं, जिससे शेयरों में बिकवाली बढ़ती है।
6. रुपये में कमजोरी
महंगे कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की सतर्कता का असर भारतीय रुपये पर भी पड़ा। सोमवार को शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 11 पैसे कमजोर होकर 96.41 पर आ गया। रुपये में कमजोरी भी बाजार के सेंटिमेंट को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है।