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राज्य

Rajasthan: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की निलंबित RAS हनुमानाराम की जमानत, सरकार बोली- 'प्रशासन में रहता तो राज्य बेच देता'

बलजीत सिंह शेखावत

सुप्रीम कोर्ट ने डमी कैंडिडेट फर्जीवाड़े में फंसे निलंबित RAS हनुमानाराम की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों को गंभीर माना और आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया। यह मामला राजस्थान भर्ती परीक्षा घोटाले से जुड़ा है।

HIGHLIGHTS

  • सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित RAS हनुमानाराम की जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया है।
  • हनुमानाराम पर SI और पटवारी भर्ती परीक्षा में डमी कैंडिडेट बनने का गंभीर आरोप है।
  • राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि ऐसा व्यक्ति प्रशासन में रहता तो राज्य को बेच देता।
  • आरोपी ने RAS 2021 परीक्षा में प्रदेश भर में 22वीं रैंक हासिल की थी।
supreme court denies bail to suspended ras officer hanumanaram

नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के निलंबित RAS अधिकारी हनुमानाराम की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने यह फैसला सुनाया।

कोर्ट ने माना कि आरोपों की प्रकृति बेहद गंभीर है और आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती। राज्य सरकार ने सुनवाई के दौरान हनुमानाराम के खिलाफ कड़े तर्क पेश किए।

सरकार की तीखी दलीलें

सरकार की ओर से दलील दी गई कि यदि ऐसा व्यक्ति प्रशासनिक सेवा में बना रहता, तो वह भविष्य में पूरे राज्य को बेच देता। यह कृत्य लोक प्रशासन की नींव पर प्रहार है।

सॉलिसिटर जनरल एसडी संजय और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि आरोपी ने प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता को नष्ट कर दिया है।

तीन परीक्षाओं में बना डमी

हनुमानाराम पर आरोप है कि उसने तीन अलग-अलग अभ्यर्थियों के लिए डमी कैंडिडेट बनकर परीक्षा दी थी। इसमें सब-इस्पेक्टर और पटवारी भर्ती परीक्षा-2021 शामिल हैं।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह कोई एकल घटना नहीं है। यह आरोपी के निरंतर आपराधिक आचरण को दर्शाता है। उसने व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

RAS में हासिल की थी 22वीं रैंक

हनुमानाराम ने RAS परीक्षा 2021 में 22वीं रैंक हासिल की थी। वह बाड़मेर के बिसारणियां गांव का निवासी है। उसने 2016 से ही प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी शुरू कर दी थी।

2018 में सांख्यिकी विभाग में चयन के बाद भी उसका लक्ष्य आरएएस अधिकारी बनना था। चयन के बाद उसकी पहली पोस्टिंग जालोर के चितलवाना में एसडीएम के रूप में हुई थी।

इसके बाद वह बागोड़ा, शिव और हाल ही में जैसलमेर के फतेहगढ़ में तैनात था। हनुमानाराम के पिता और भाई गांव में ही खेती का काम करते हैं।

मूल अभ्यर्थी भी सलाखों के पीछे

इस मामले में मूल अभ्यर्थी नरपतराम और उसकी पत्नी इंद्रा को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। इंद्रा पर भी एक अन्य उम्मीदवार की जगह परीक्षा देने का आरोप है।

यह मामला राजस्थान की प्रशासनिक सेवाओं की साख पर सवालिया निशान है। हजारों ईमानदार अभ्यर्थियों के हक पर यह कुठाराघात व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि लोक सेवकों का ऐसा आचरण समाज में गलत संदेश देता है। इससे न केवल सिस्टम कमजोर होता है, बल्कि युवाओं का भरोसा भी टूटता है।

सरकार ने साफ किया कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के लिए सिस्टम में कोई जगह नहीं है। इस कार्रवाई से उन युवाओं को न्याय की उम्मीद है जो कड़ी मेहनत करते हैं।

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