रुपये की अनकही दास्तां: 'मुझे डॉलर के नहीं, चुनाव आयोग के मुक़ाबले देखो' - रुपये ने देश के नाम लिखी एक भावुक और तीखी चिट्ठी
रवीश कुमार के इस लेख में भारतीय रुपया अपनी व्यथा सुना रहा है। वह अपनी गिरती कीमत, नोटबंदी के डर और चुनावों में अपनी भूमिका पर तीखा कटाक्ष करता है।