टोंक | राजस्थान के टोंक जिले में एक सामूहिक विवाह सम्मेलन के दौरान प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला। रतनपुरा गांव में आयोजित धाकड़ समाज के समारोह में अचानक आए भीषण अंधड़ ने खुशियों के माहौल को दहशत में बदल दिया।
टोंक सामूहिक विवाह में अंधड़ का कहर: टोंक: सामूहिक विवाह में आया अंधड़, उड़े पंडाल, मची भगदड़
राजस्थान के टोंक में धाकड़ समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में कुदरत का कहर देखने को मिला।
HIGHLIGHTS
- टोंक के रतनपुरा गांव में धाकड़ समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित था।
- 70 किमी/घंटा की रफ्तार से आए अंधड़ ने पूरे पंडाल को तहस-नहस कर दिया।
- विवाह स्थल पर मौजूद 36 दूल्हा-दुल्हन और मेहमान जान बचाने के लिए भागे।
- अंधड़ के बाद हुई तेज बारिश ने समारोह स्थल पर पानी भर दिया और मुश्किलें बढ़ाईं।
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रतनपुरा में 36 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न होना था, जिसके लिए भव्य पंडाल सजाया गया था। तभी सोमवार दोपहर करीब 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाओं ने सब कुछ उजाड़ दिया।
अंधड़ इतना जबरदस्त था कि लोहे के खंभों पर टिके शामियाने ताश के पत्तों की तरह हवा में उड़ गए। समारोह में मौजूद लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर सुरक्षित स्थानों की तलाश में भागने लगे।
दूल्हा और दुल्हन जो फेरों की तैयारी कर रहे थे, वे भी अपनी जान बचाने के लिए मंडप छोड़कर भागे। चारों तरफ मची भगदड़ के बीच कुर्सियां, बर्तन और उपहार में मिलने वाला सामान हवा में तैरता दिखा।
तबाही के बाद बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें
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अंधड़ के कुछ ही मिनटों बाद तेज बारिश शुरू हो गई, जिससे समारोह स्थल पर कीचड़ और पानी भर गया। तेज हवाओं की वजह से पंडाल के नीचे दबने से कुछ मेहमानों को मामूली चोटें आने की भी खबर है।
आयोजकों ने बताया कि उन्हें मौसम के इस तरह अचानक करवट लेने का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था। खुले मैदान में की गई व्यवस्थाएं चंद पलों में ही मलबे के ढेर में तब्दील हो गईं।
हमने मौसम के मिजाज को भांपने में चूक की, जिससे यह हादसा हुआ। भविष्य में हम सुरक्षित स्थानों का चयन करेंगे।
विवाह स्थल पर मौजूद बुजुर्गों और युवाओं ने मिलकर स्थिति को संभाला और घायलों की मदद की। सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें उड़ते हुए टेंट साफ दिख रहे हैं।
चुनौतियों के बीच संपन्न हुए 36 विवाह
इतनी बड़ी आपदा के बावजूद, आयोजकों और समाज के लोगों ने हार नहीं मानी और सामूहिक हौसला दिखाया। जैसे ही अंधड़ और बारिश थमी, कीचड़ के बीच ही खुले स्थान पर सभी 36 जोड़ों के फेरे कराए गए।
दूल्हा-दुल्हन के चेहरों पर डर साफ झलक रहा था, लेकिन परंपराओं को पूरा करना उनकी प्राथमिकता रही। ग्रामीणों ने मिलकर समारोह स्थल की सफाई की और विवाह की रस्मों को किसी तरह पूरा करवाया।
यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि सामूहिक विवाह की रौनक पल भर में खत्म हो गई। प्रशासन ने भी आयोजकों को भविष्य में मौसम की चेतावनी के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है।
टोंक की यह घटना हमें सिखाती है कि प्राकृतिक आपदाएं कभी भी दस्तक दे सकती हैं और सुरक्षा सर्वोपरि है। हालांकि, सामूहिक प्रयासों से विवाह संपन्न हुए, लेकिन इस तबाही ने आयोजकों को भविष्य के लिए एक बड़ा सबक दिया है।
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