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राज्य

तमिलनाडु: दो-भाषा नीति पर TVK अडिग, केंद्र को दी चुनौती

बलजीत सिंह शेखावत

मंत्री राजमोहन ने पीएम श्री योजना को नकारा, केंद्र पर फंड रोकने का आरोप लगाया।

HIGHLIGHTS

  • तमिलनाडु सरकार ने दो-भाषा नीति पर अपना कड़ा रुख बरकरार रखा है।
  • मंत्री राजमोहन ने केंद्र की तीन-भाषा नीति और पीएम श्री योजना को नकारा।
  • केंद्र द्वारा रोके गए 3,500 करोड़ रुपये के शिक्षा फंड पर सवाल उठाए।
  • विकास के लिए सिंगापुर मॉडल और अंग्रेजी भाषा की महत्ता पर जोर दिया।
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चेन्नई | तमिलनाडु में विजय की TVK सरकार ने प्रदेश की पारंपरिक दो-भाषा नीति पर एक बार फिर अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन ने वैचारिक स्पष्टता के साथ इसकी पुष्टि की।

मंत्री ने कहा कि सरकार अपनी इस ऐतिहासिक और वैचारिक नीति पर किसी भी स्थिति में कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने केंद्र सरकार की तीन-भाषा नीति को राज्य की संस्कृति के खिलाफ बताया है।

राजमोहन ने स्पष्ट किया कि पीएम श्री स्कूल योजना को लागू करने के लिए राज्य पर किसी भी तरह का दबाव काम नहीं करेगा। उन्होंने इसे राज्य की भाषाई स्वायत्तता पर सीधा हमला करार दिया।

शिक्षा फंड और केंद्र का कड़ा विरोध

मंत्री राजमोहन ने केंद्र सरकार पर पिछले दो वर्षों से प्रदेश के समग्र शिक्षा फंड को रोकने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने इसे राज्य के छात्रों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ बताया है।

उन्होंने कहा कि यह पैसा विशेष रूप से छात्रों के कल्याण और सुविधाओं के लिए है। इसे किसी अधिकारी या केंद्र सरकार की व्यक्तिगत पसंद-नापसंद के आधार पर बिल्कुल नहीं रोका जाना चाहिए।

केंद्र ने समग्र शिक्षा फंड को पीएम श्री योजना से जोड़ दिया है। इसके कारण तमिलनाडु का लगभग 3,500 करोड़ रुपये से अधिक का फंड केंद्र सरकार के पास अभी तक लंबित पड़ा है।

वैचारिक प्रतिबद्धता और राज्य का रुख

मंत्री ने साफ किया कि जैसे महिलाओं के अधिकार और भूमि अधिकार TVK की मूल विचारधारा हैं, वैसे ही दो-भाषा नीति भी पार्टी की एक घोषित, स्पष्ट और काफी अटल नीति है।

हम किसी भी प्रकार के अप्रत्यक्ष दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। हमारी नीतियां राज्य के लोगों के हितों और तमिल भाषा के गौरव को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं।

सिंगापुर मॉडल और अंग्रेजी की महत्ता

मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री ने सिंगापुर के विकास मॉडल का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कैसे वहां अंग्रेजी को वैश्विक जुड़ाव और व्यापार का मुख्य माध्यम बनाया गया था।

उन्होंने सिंगापुर के पूर्व प्रधानमंत्री ली कुआन यू का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया से जुड़ने और प्रगति करने के लिए अंग्रेजी ही काफी है, अन्य भाषाओं का बोझ जरूरी नहीं है।

शिक्षा व्यवस्था का भविष्य

इससे पहले अटकलें थीं कि सरकार पीएम श्री योजना पर विचार कर सकती है। हालांकि, मंत्री के इस कड़े बयान ने सभी संशयों को खत्म कर राज्य की वैचारिक दिशा स्पष्ट कर दी है।

तमिलनाडु अब अपनी शिक्षा व्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। सरकार का लक्ष्य छात्रों को बिना किसी अतिरिक्त भाषाई बोझ के पूरी तरह सशक्त बनाना है।

अंततः, यह विवाद केंद्र और राज्य के बीच शिक्षा और भाषाई अधिकारों को लेकर एक नई बहस छेड़ सकता है। राज्य सरकार अपनी मांगों और सिद्धांतों पर अडिग रहने के लिए तैयार है।

*Edit with Google AI Studio

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