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भारत

US- Iran: होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका-ईरान के बीच भीषण सैन्य संघर्ष

बलजीत सिंह शेखावत

ईरानी बेड़े ने अमेरिकी युद्धपोतों पर हमला किया, ट्रंप ने लेजर हथियार के इस्तेमाल का दावा किया।

HIGHLIGHTS

  • होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी 'मोस्कीटो फ्लीट' ने तीन अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और गोलीबारी से हमला किया।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लेजर हथियार से जवाबी कार्रवाई की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की।
  • ईरान ने अमेरिका पर केश्म पोर्ट और बंदर अब्बास जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों पर हमले करने का आरोप लगाया है।
  • दोनों देशों के बीच तनाव के बावजूद समुद्री नाकेबंदी खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर सहमति बन सकती है।
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वाशिंगटन | होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर भीषण सैन्य संघर्ष देखने को मिला है। ईरान की 'मोस्कीटो फ्लीट' ने तीन अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाया। इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव काफी बढ़ गया है।

ईरानी छोटे जहाजों के बेड़े ने स्ट्रेट को पार करने की कोशिश कर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइलें दागीं। इसके साथ ही भारी गोलीबारी भी की गई। अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस हमले की पुष्टि की है।

होर्मुज स्ट्रेट में मिसाइल और लेजर युद्ध

अमेरिकी युद्धपोतों ने ईरानी हमले का कड़ा जवाब देने का दावा किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तीनों युद्धपोत सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना ने सफलतापूर्वक इस हमले को विफल कर दिया है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक विशेष फोटो भी पोस्ट की है। इस तस्वीर में अमेरिकी युद्धपोत से लेजर हथियार फायर करते हुए देखा जा सकता है। यह तकनीक काफी उन्नत मानी जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लेजर हथियारों का उपयोग आधुनिक नौसैनिक युद्ध में एक नया मोड़ है। इससे मिसाइलों और ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट किया जा सकता है। ट्रंप ने इसे अमेरिकी शक्ति का प्रदर्शन बताया है।

ईरान के गंभीर आरोप और जवाबी कार्रवाई

ईरान ने अमेरिका पर पलटवार करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरानी सेना के अनुसार, अमेरिकी सेना ने होर्मुज के पास स्थित केश्म पोर्ट पर हमला किया। इसके अलावा बंदर अब्बास को भी निशाना बनाया गया है।

ईरानी अधिकारियों ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। हालांकि, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन बहुत ही सीमित दायरे में था। इसका उद्देश्य केवल ईरानी आक्रामकता को रोकना था।

यूएई की सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव

इस संघर्ष का असर पड़ोसी देशों पर भी दिख रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने शुक्रवार को मिसाइल और ड्रोन हमले होने की जानकारी दी। यूएई ने इन हमलों के लिए क्षेत्रीय अस्थिरता को जिम्मेदार ठहराया है।

यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने इन खतरों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर लिया। इससे एक बड़ी तबाही टल गई। क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को भी चिंता में डाल दिया है।

मिसाइल भंडार और कूटनीतिक चेतावनी

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने उन मीडिया रिपोर्ट्स को बकवास बताया जिनमें ईरानी मिसाइल भंडार के नष्ट होने का दावा किया गया था। अराघची ने अपनी सैन्य ताकत का बखान किया।

"हमारे मिसाइल भंडार 1000 प्रतिशत तक तैयार हैं। जब भी कोई कूटनीतिक समाधान निकलता है, अमेरिका सैन्य दुस्साहस का रास्ता चुनता है। ईरानी लोग किसी भी दबाव में नहीं झुकेंगे।"

अराघची ने आगे कहा कि अमेरिका की यह दबाव बनाने की भद्दी चाल है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। ईरान ने स्पष्ट किया कि वे अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर बन सकती है सहमति

इतने भारी तनाव के बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर जल्द सहमति बन सकती है।

इस समझौते के तहत अमेरिका अपनी समुद्री नाकेबंदी खत्म कर सकता है। इसके बदले में ईरान होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को सुचारू करेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

वर्तमान में होर्मुज स्ट्रेट में सैकड़ों व्यापारिक जहाज फंसे हुए हैं। यदि यह समझौता सफल होता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है। दोनों देश अब कूटनीतिक रास्तों पर विचार कर रहे हैं।

होर्मुज स्ट्रेट में हुआ यह संघर्ष वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील है। हालांकि दोनों पक्ष युद्धविराम की बात कर रहे हैं, लेकिन सैन्य गतिविधियों ने अनिश्चितता पैदा कर दी है। आने वाले दिन इस क्षेत्र के भविष्य को तय करेंगे।

*Edit with Google AI Studio

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