नई दिल्ली | भारतीय क्रिकेट के युवा सितारे वैभव सूर्यवंशी ने क्रिकेट की दुनिया में तहलका मचा दिया है। ट्राई-नेशन ए सीरीज के खिताबी मुकाबले में उन्होंने लिस्ट-ए क्रिकेट का सबसे तेज अर्धशतक जड़कर एक नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।
Cricket: वैभव सूर्यवंशी का धमाका, 11 गेंदों में जड़ा सबसे तेज अर्धशतक
ट्राई-नेशन ए सीरीज के फाइनल में वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास, श्रीलंका के खिलाफ 11 गेंदों में अर्धशतक जड़ा।
HIGHLIGHTS
- वैभव सूर्यवंशी ने सिर्फ 11 गेंदों में अर्धशतक जड़कर विश्व रिकॉर्ड बनाया।
- यह लिस्ट-ए क्रिकेट के इतिहास का सबसे तेज अर्धशतक है।
- उन्होंने श्रीलंका के कौशल्या वीररत्ने का 19 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा।
- सूर्यवंशी ने सरफराज खान के सबसे तेज भारतीय अर्धशतक का रिकॉर्ड भी ध्वस्त किया।
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श्रीलंका ए के खिलाफ इस फाइनल मैच में वैभव ने महज 11 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया। अपनी इस विस्फोटक पारी में उन्होंने 6 चौके और 5 गगनचुंबी छक्के लगाए।
तोड़ा 19 साल पुराना वर्ल्ड रिकॉर्ड
वैभव सूर्यवंशी ने इस पारी के साथ श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर कौशल्या वीररत्ने का लगभग दो दशक पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। वीररत्ने ने साल 2005 में 12 गेंदों में अर्धशतक बनाया था, जो अब तक लिस्ट-ए क्रिकेट का कीर्तिमान था।
लेकिन अब, वैभव ने इस रिकॉर्ड को ध्वस्त करते हुए अपना नाम इतिहास के पन्नों में सबसे ऊपर दर्ज करा लिया है। यह कारनामा उन्होंने एक महत्वपूर्ण फाइनल मुकाबले में किया, जो उनकी प्रतिभा को और भी खास बनाता है।
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सरफराज खान का भारतीय रिकॉर्ड भी ध्वस्त
विश्व रिकॉर्ड के अलावा, वैभव ने सबसे तेज भारतीय अर्धशतक का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड सरफराज खान के नाम था, जिन्होंने इसी साल मुंबई के लिए खेलते हुए 15 गेंदों में अर्धशतक जड़ा था।
सरफराज ने अभिजीत काले के 1995 में बनाए 16 गेंदों के रिकॉर्ड को तोड़ा था। वैभव ने इन सभी दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए एक नया भारतीय बेंचमार्क स्थापित किया है।
फाइनल में दिखाया विस्फोटक अंदाज
मैच में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम के लिए वैभव और प्रियांश आर्या ने ताबड़तोड़ शुरुआत की। वैभव पहली गेंद से ही आक्रामक मूड में दिखे।
पारी के दूसरे ओवर में उन्होंने चौकों-छक्कों की बारिश करते हुए 26 रन बटोरे। इसके बाद चौथे ओवर में दो छक्के और एक चौका लगाकर अपना ऐतिहासिक अर्धशतक पूरा कर लिया।
इस शानदार प्रदर्शन से पहले सीरीज में उनका बल्ला खामोश था। श्रीलंका ए के खिलाफ दो मैचों में वह सिर्फ 35 रन और अफगानिस्तान ए के खिलाफ 85 रन ही बना पाए थे। उन पर फाइनल में अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव था।
खिताबी मुकाबले में उन्होंने न केवल आलोचकों को जवाब दिया, बल्कि एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया जिसे तोड़ना किसी भी बल्लेबाज के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। उनकी इस पारी ने भारत ए की जीत की नींव रखी।
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