जयपुर | राजस्थान में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026' की शुरुआत होने जा रही है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने इस अभियान को एक व्यापक जन आंदोलन के रूप में चलाने के कड़े निर्देश दिए हैं।
वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान 2026: राजस्थान में जल क्रांति: वंदे गंगा अभियान की तैयारी तेज
मुख्य सचिव ने जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने और अधिकारियों को गांवों में रात्रि प्रवास के निर्देश दिए।
HIGHLIGHTS
- वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026 का आयोजन 25 मई से 5 जून तक होगा।
- मुख्य सचिव ने अधिकारियों को गांवों में रात्रि प्रवास और चौपाल करने के निर्देश दिए।
- अभियान के तहत जल स्रोतों की सफाई, पौधारोपण और श्रमदान जैसी गतिविधियां होंगी।
- मोबाइल ऐप के जरिए ग्राम पंचायत स्तर तक की गतिविधियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग होगी।
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शनिवार को शासन सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव ने विभागवार गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल संरक्षण अब केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी है।
मुख्य सचिव ने विशेष रूप से उन जिलों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है जहां जल संकट गहराया हुआ है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे पूरी गंभीरता और गति के साथ अभियान को धरातल पर उतारें।
जल संरक्षण के लिए अधिकारियों का गांव प्रवास
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की। उन्होंने सभी प्रभारी सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे हर महीने कम से कम एक रात किसी गांव में प्रवास करें।
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गांवों में रात्रि चौपालें आयोजित करने के लिए कहा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना और उन्हें जल स्रोतों के पुनर्जीवन की प्रक्रिया से जोड़ना है।
श्री श्रीनिवास ने कहा कि जब बड़े अधिकारी खुद जमीन पर उतरेंगे, तो अभियान की गतिविधियों में अधिक प्रभावी सुधार आएगा। इससे स्थानीय स्तर पर जन जागरूकता और जनभागीदारी को काफी मजबूती मिलेगी।
12 दिनों तक चलेगा गतिविधियों का दौर
पंचायती राज विभाग के शासन सचिव जोगा राम ने अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि यह अभियान 25 मई से शुरू होकर 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस तक चलेगा।
अभियान का आगाज 25 मई को जल संरक्षण संकल्प के साथ होगा। इसके बाद 26 से 31 मई तक राज्यभर में जल स्रोतों की सफाई, वर्षा जल संचयन और सघन पौधारोपण जैसे कार्य किए जाएंगे।
इस दौरान स्कूलों और ग्राम स्तर पर रैलियां और श्रमदान के कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। 1 जून को विशेष तकनीकी प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी, जो जल संरक्षण की आधुनिक विधियों के बारे में जानकारी देंगी।
डिजिटल मॉनिटरिंग और रियल टाइम रिपोर्टिंग
अभियान की पारदर्शिता और सफलता सुनिश्चित करने के लिए मोबाइल ऐप का सहारा लिया जाएगा। ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाली हर गतिविधि की रियल टाइम मॉनिटरिंग इस ऐप के माध्यम से की जाएगी।
शासन सचिव ने बताया कि अभियान के तहत पुरानी जल संरचनाओं के पुनर्जीवन पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसमें लागत दक्षता और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि परिणाम स्थायी हों।
जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जन सहयोग से जुड़ा सामाजिक दायित्व है, जिसमें गांव स्तर तक सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
पर्यावरण दिवस पर होगा भव्य समापन
अभियान का समापन 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर होगा। इस दिन पूरे राजस्थान में बड़े स्तर पर जनसहभागिता आधारित विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जाएगा।
बैठक में सभी संभागीय आयुक्त और जिला कलेक्टर्स वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। मुख्य सचिव ने सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि वे अपने जिलों में अभियान की नियमित मॉनिटरिंग करें।
अंत में, मुख्य सचिव ने विश्वास जताया कि इस अभियान के माध्यम से राजस्थान जल संरक्षण के क्षेत्र में एक नया उदाहरण पेश करेगा। यह प्रयास आने वाले समय में राज्य को जल आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगा।
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